इंदौर: मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के सियासी समर में बुधवार को उस समय बड़ा भूचाल आ गया, जब कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र जांच के बाद निरस्त कर दिया गया। इस फैसले से भड़की कांग्रेस अब सीधे सड़कों पर उतर आई है। इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा चौक पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है। पार्टी का साफ कहना है कि इस एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ अब वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

राजवाड़ा पर अहिल्या प्रतिमा के नीचे फूटा गुस्सा
इंदौर के राजवाड़ा चौक पर लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर की प्रतिमा के सामने कांग्रेस ने विशाल धरने का आयोजन किया:
- नोटिस का जवाब दिया, फिर भी हुई कार्रवाई: धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश प्रवक्ता संतोष सिंह गौतम ने चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ ऐसा कोई गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज ही नहीं था, जिसका नामांकन पत्र में उल्लेख करना अनिवार्य हो। उन्हें केवल एक नोटिस मिला था, जिसका जवाब समय पर दिया जा चुका था और कोर्ट ने उस पर कोई संज्ञान नहीं लिया था।
- सुधार का मौका तक नहीं दिया: प्रदेश प्रवक्ता व एडवोकेट प्रमोद द्विवेदी ने चुनाव आयोग के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनावी नियमों के तहत यदि शपथ पत्र में कोई मामूली त्रुटि होती है, तो उम्मीदवार को उसमें सुधार करने का समय दिया जाता है, लेकिन मीनाक्षी नटराजन के मामले में बिना सुनवाई के ही पर्चा खारिज कर दिया गया।
क्रॉस वोटिंग के डर से रची गई साजिश: चिंटू चौकसे
शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ‘काला दिवस’ बताया है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा:
भाजपा के डर की जीत —
“मीनाक्षी नटराजन जी पूरी तरह से गांधीवादी और साफ-सुथरी छवि की नेता हैं। उनके खिलाफ यह एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है। भाजपा अंदरखाने इतनी डरी हुई थी कि उन्हें कांग्रेस के पक्ष में संभावित क्रॉस वोटिंग (विपक्षी विधायकों के वोट टूटने) का खौफ सता रहा था। इसी डर के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाकर यह कदम उठवाया गया है।”
अब दिल्ली और हाईकोर्ट तक खिंचेगी कानूनी लड़ाई
कांग्रेस नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि वे इस फैसले को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे। पार्टी के विधि प्रकोष्ठ (लीगल सेल) ने दिल्ली के केंद्रीय चुनाव आयोग में आपत्ति दर्ज कराने के साथ-साथ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) में याचिका दायर करने की तैयारी पूरी कर ली है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई अब केवल एक सीट की नहीं, बल्कि निष्पक्ष चुनाव प्रणाली और विपक्ष के लोकतांत्रिक अधिकारों को बचाने की महालड़ाई बन चुकी है।







