मैहर में शिक्षा विभाग पर कलेक्टर का हंटर: 10वीं बोर्ड में घटिया रिजल्ट देने वाले 5 सरकारी प्राचार्यों की रुकेगी वेतनवृद्धि; 7 दिन में मांगा जवाब

मैहर/सतना: माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्य प्रदेश द्वारा घोषित हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा 2025-26 के परिणामों में जिले का बेहद लचर प्रदर्शन देख जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मैहर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी विदिशा मुखर्जी ने जिले के पांच शासकीय उच्चतर माध्यमिक और हाईस्कूलों के प्राचार्यों को गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) थमा दिया है। कलेक्टर ने इन सभी की एक वार्षिक वेतनवृद्धि (Increment) तत्काल प्रभाव से रोकने की चेतावनी देते हुए सात दिनों के भीतर लिखित जवाब तलब किया है।

राज्य और जिला औसत की रेस में पूरी तरह पिछड़े स्कूल

प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, जहां इस बार कक्षा 10वीं का राज्य स्तरीय औसत परीक्षा परिणाम 73.42 प्रतिशत रहा, वहीं मैहर जिले का कुल औसत परिणाम मात्र 62.13 प्रतिशत पर ही सिमट गया। जिले को गर्त में धकेलने वाले इन 5 स्कूलों का रिपोर्ट कार्ड बेहद शर्मनाक रहा:

विद्यालय का नामवर्तमान प्राचार्य/प्रभारीस्कूल का कुल रिजल्ट
हाईस्कूल पटरा, अमरपाटनयोगेन्द्र सिंह चौहान18.18% (सबसे खराब)
कन्या उमावि रामनगरसंजीव कुमार तिवारी22.61%
शासकीय उमावि नादनलक्ष्मीनारायण द्विवेदी22.92%
हाईस्कूल बरहियास्वामीदीन साकेत25.00%
शासकीय उमावि गोरसरीज्ञानेन्द्र सिंह27.50%

कदाचरण और अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना गया कृत्य

कलेक्टर विदिशा मुखर्जी द्वारा जारी कड़े आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इन विद्यालयों के परीक्षा परिणाम से यह साफ उजागर होता है कि सत्र के दौरान छात्रों की पढ़ाई और रिजल्ट सुधारने के लिए प्राचार्यों द्वारा कोई भी अपेक्षित या प्रभावी प्रयास नहीं किए गए।

  1. दायित्वों के प्रति उदासीनता: इसे अधिकारियों की अपने पदीय दायित्वों के प्रति घोर उदासीनता और गंभीर लापरवाही माना गया है।
  2. नियम-16 के तहत कार्रवाई: यह कृत्य सीधे तौर पर कदाचरण एवं अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इसी के चलते मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-16 के तहत यह दंडात्मक नोटिस जारी किया गया है।

7 दिन में जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपना होगा जवाब, वरना नपेंगे अफसर

नोटिस के जरिए सभी पांचों प्राचार्यों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने बचाव में साक्ष्यों, दस्तावेजों और पुख्ता अभिलेखों के साथ सात दिवस के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के समक्ष प्रस्तुत करें।

कलेक्टर की दो टूक चेतावनी —

यदि निर्धारित समयावधि के भीतर संबंधित संस्था प्रमुखों का उत्तर संतोषजनक नहीं पाया जाता है, या वे जवाब देने में टालमटोल करते हैं, तो बिना किसी दोबारा अवसर के उनकी एक वेतनवृद्धि रोकने की अनुशासनात्मक कार्रवाई तत्काल प्रभाव से अमल में लाई जाएगी। इसके बाद होने वाली किसी भी अन्य विभागीय कार्रवाई की समस्त जिम्मेदारी स्वयं संबंधित अधिकारियों की होगी। जिला प्रशासन के इस सख्त कदम से शिक्षा विभाग के अन्य सुस्त अधिकारियों और शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है।

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