सिंगरौली: मध्य प्रदेश की ऊर्जाधानी सिंगरौली में प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी करना देश के बड़े औद्योगिक घरानों को भारी पड़ गया है। प्रतिबंध के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर कोयला और फ्लाईऐश का परिवहन करने के मामले में सिंगरौली कलेक्टर गौरव बेनल (IAS) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर के निर्देश पर अडानी एंटरप्राइजेज और एसीसी लिमिटेड सहित 6 बड़ी कंपनियों और उनके ट्रांसपोर्टर्स के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। औद्योगिक क्षेत्र सिंगरौली में इसे अब तक की सबसे बड़ी और कड़क कार्रवाई माना जा रहा है।

भास्कर हाइलाइट्स: क्या था कलेक्टर का आदेश और कहाँ हुई चूक?
सिंगरौली में बढ़ते प्रदूषण और सड़कों की बदहाली की शिकायतों को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया था:
- 23 मई को लगा था बैन: कलेक्टर गौरव बेनल ने 23 मई की सुबह 6 बजे से लेकर 24 मई की दोपहर 12 बजे तक सड़क मार्ग से कोयले और फ्लाईऐश की ढुलाई पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया था।
- तहसीलदार ने रंगे हाथों पकड़ा: इस प्रतिबंध के बावजूद सरई और बरगवां इलाके में कोयले से लदे ट्रक धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ते रहे। बरगवां तहसीलदार ने खुद मौके पर जाकर निरीक्षण किया और नियमों की धज्जियां उड़ते देख अपनी जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी।
इन दिग्गजों और कंपनियों पर कसा कानूनी शिकंजा
प्रशासन ने नियम तोड़ने वाली कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन किसी भी कंपनी ने तय समय में जवाब देने की जहमत नहीं उठाई। इसके बाद कलेक्टर ने बरगवां तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर इन प्रमुख नामजद कंपनियों पर एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया:
- गौतम अडानी (अडानी एंटरप्राइजेज / अडानी लॉजिस्टिक्स)
- एमडीओ (MDO)
- टीएचडीसी (THDC)
- एसीसी लिमिटेड (ACC Limited)
- एपीएमडीसी (APMDC / एमपी मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन)
- संबंधित ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स कंपनियां
अडानी जैसे बड़े नाम पर कार्रवाई से औद्योगिक घरानों में हड़कंप
कानून सबके लिए बराबर —
सिंगरौली जिला प्रशासन का यह कदम साफ संदेश देता है कि नियम तोड़ने पर अब देश की सबसे बड़ी और रसूखदार कंपनियों को भी बख्शा नहीं जाएगा। कोयला बेल्ट में पहली बार किसी कलेक्टर ने अडानी और एसीसी जैसे कॉर्पोरेट दिग्गजों पर सीधे एफआईआर दर्ज कराने का साहस दिखाया है, जिससे पूरे क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट माफिया और उद्योगपतियों में हड़कंप मच गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सिंगरौली की जनता की सेहत और पर्यावरण से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी भी कीमत पर किसी उद्योग को नहीं दी जा सकती।







