BCCI की चयन प्रक्रिया के कटघरे में विंध्य और एमपी के लाल: लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद भी मध्य प्रदेश के क्रिकेटरों को क्यों नहीं मिला टीम इंडिया में मौका?

भोपाल (ब्यूरो): भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की राष्ट्रीय चयन नीति एक बार फिर विवादों और तीखे सवालों के घेरे में आ गई है। भोपाल डिविजन क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व संयुक्त सचिव एडवोकेट मोहन चतुर्वेदी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए चयन समिति पर मध्य प्रदेश के होनहार क्रिकेटरों को लगातार नजरअंदाज करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि रणजी ट्रॉफी और आईपीएल (IPL) जैसे बड़े मंचों पर रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन करने के बावजूद एमपी के खिलाड़ियों के साथ सालों से पक्षपात का एक सेट पैटर्न चल रहा है।

भास्कर हाइलाइट्स: लगातार दो बार आरसीबी को चैंपियन बनाने वाले रजत पाटीदार भी बाहर!

इस बहस में सबसे ताजा और हैरान करने वाला नाम इंदौर और मध्य प्रदेश टीम के कप्तान रजत पाटीदार का है:

  • IPL में कप्तानी का लोहा माना: रजत पाटीदार की कप्तानी में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने साल 2025 का आईपीएल खिताब जीता और अभी हाल ही में संपन्न हुए 2026 के आईपीएल सीजन में भी उनकी कप्तानी में टीम ने दोबारा ट्रॉफी अपने नाम की।
  • 500+ रन का रिकॉर्ड: इस 2026 के सीजन में बल्ले से कोहराम मचाते हुए पाटीदार ने 501 रन ठोके। एडवोकेट मोहन चतुर्वेदी का सवाल है कि इतने निरंतर और उच्च स्तरीय कप्तानी व बल्लेबाजी प्रदर्शन के बाद भी उन्हें राष्ट्रीय टीम में मौका न मिलना चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा संदेह पैदा करता है।

इतिहास गवाह है: हिरवानी से लेकर ईश्वर पांडे तक सब बने ‘वेबसाइट के आंकड़े’

एडवोकेट चतुर्वेदी ने एमपी क्रिकेट के उन 4 अन्य बड़े चेहरों का भी कच्चा चिट्ठा खोला, जिनके अंतरराष्ट्रीय करियर को बीसीसीआई की नीतियों ने सीमित कर दिया:

  1. नरेंद्र हिरवानी (ऐतिहासिक डेब्यू का अंत): अपने डेब्यू मैच में ही वेस्टइंडीज के खिलाफ दोनों पारियों में 8-8 विकेट (कुल 16 विकेट) लेकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाले इस स्पिनर को भारतीय टीम में लंबे समय तक लगातार अवसर ही नहीं दिए गए।
  2. ईश्वर पांडे (घरेलू क्रिकेट का सुल्तान): फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 263 विकेट, लिस्ट ए में 63 विकेट और टी20 में 68 विकेट चटकाने वाले इस तेज गेंदबाज ने 2012-13 रणजी सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लिए थे, लेकिन टीम इंडिया की कैप के लिए तरसा दिया गया।
  3. जे.पी. यादव (बेहतरीन ऑलराउंडर): प्रथम श्रेणी के 131 मैचों में 296 विकेट (महज 2.19 की इकॉनमी) और 7,393 रन बनाने वाले इस ऑलराउंडर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 8वें नंबर पर आकर नाबाद 69 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी, पर इनका करियर भी सीमित रहा।
  4. अमय खुरासिया: वर्ल्ड कप की टीम में चुने जाने के बावजूद इस आक्रामक बल्लेबाज को प्लेइंग इलेवन में खुद को साबित करने के पर्याप्त मौके नहीं दिए गए।

क्या वाकई क्षेत्रवाद हावी है या है कड़ी प्रतिस्पर्धा?

क्रिकेट एसोसिएशन का तीखा आरोप —

“यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि एक पैटर्न है। जब भी मध्य प्रदेश का कोई खिलाड़ी अपने खेल के चरम पर होता है, चयनकर्ता आंखें मूंद लेते हैं। रणजी और आईपीएल के प्रदर्शन की कद्र नहीं होगी तो घरेलू क्रिकेट खेलने का क्या मतलब रह जाएगा?”

विशेषज्ञों का दूसरा पहलू:

दूसरी ओर, क्रिकेट विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि टीम इंडिया में एंट्री के लिए केवल क्षेत्रीय आंकड़े नहीं बल्कि करंट फॉर्म, फिटनेस, टीम का तत्कालीन कॉम्बिनेशन और नेशनल पूल में चल रही बेहद कड़ी प्रतिस्पर्धा मायने रखती है। इसे किसी राज्य विशेष के खिलाफ पूर्वाग्रह कहना जल्दबाजी होगी। बहरहाल, आईपीएल 2026 की चमचमाती ट्रॉफी उठाने के बाद भी रजत पाटीदार की अनदेखी ने इस ठंडी पड़ी बहस में घी डालने का काम जरूर कर दिया है।

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