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सोन नदी किनारे बसे गांवों में हाई अलर्ट: बाणसागर डैम से आज सुबह 6 बजे से छोड़ा जा रहा पानी; प्रशासन मुस्तैद, ग्रामीणों को नदी से दूर रहने की चेतावनी

सोन नदी किनारे बसे गांवों में हाई अलर्ट: बाणसागर डैम से आज सुबह 6 बजे से छोड़ा जा रहा पानी; प्रशासन मुस्तैद, ग्रामीणों को नदी से दूर रहने की चेतावनी

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The Khabrilal

Updated On: Jun 1, 2026, 6:40 PM IST

Published On: Jun 2, 2026, 2:31 PM IST

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देवलोंद/सतना: खरीफ सिंचाई वर्ष 2026 की तैयारियों के बीच बाणसागर परियोजना से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील खबर सामने आई है। बाणसागर पक्का बांध संभाग क्रमांक-3 देवलोंद द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, 2 जून 2026 (आज) सुबह 6:00 बजे से बाणसागर जलाशय से सोन नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। पानी छोड़े जाने के चलते सोन नदी के जलस्तर में अचानक और तीव्र बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है, जिसके मद्देनजर प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।

पावर हाउस-3 से छूटेगा पानी, तेज होगा नदी का बहाव

परियोजना के अधिकारियों द्वारा दी गई तकनीकी जानकारी के अनुसार, पानी छोड़ने का यह ऑपरेशन पूरी तरह नियंत्रित होगा, लेकिन नदी का रूप अचानक बदल सकता है:

  • लाखों लीटर पानी का प्रवाह: प्रतिदिन लगभग 2017 क्यूसेक (यानी करीब 4000 एकड़ फीट) पानी पावर हाउस क्रमांक-3 के माध्यम से सीधे सोन नदी में प्रवाहित किया जाएगा।
  • बढ़ेगा खतरा: पानी की इस भारी तादाद के कारण नदी का बहाव बेहद तेज हो जाएगा और तटीय इलाकों व किनारों पर भारी फिसलन और डूबने का खतरा बढ़ जाएगा।

मैहर जिले के इन गांवों के लिए विशेष ‘रेड अलर्ट’ जारी

सोन नदी के निचले और मैदानी क्षेत्रों में बसे गांवों को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। विशेषकर मैहर जिला के रामनगर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले निम्नलिखित गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को चेताया गया है:

प्रभावित गांव: केथहा, सरिया, हरियरी, डड़िया, कुआं, राझुआ और पेपखरा।

प्रशासन और आपदा प्रबंधन (SDRF) की टीम मुस्तैद; इन बातों का रखें ध्यान:

बाणसागर परियोजना प्रबंधन ने सतना, मैहर और आसपास के जिला प्रशासन, पुलिस महकमे और आपदा प्रबंधन (Disaster Management) की टीमों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने आम जनता से यह सख्त अपील की है:

  1. नदी किनारे न जाएं: सोन नदी और उसके आस-पास के घाटों पर अनावश्यक आवाजाही और सेल्फी लेने से पूरी तरह बचें।
  2. बच्चों पर रखें नजर: भी भी बच्चों को नदी या उसके सहायक नालों के पास अकेले न जाने दें।
  3. मवेशियों की सुरक्षा: अपने पालतू पशुओं और मवेशियों को नदी किनारे बांधने या चराने के बजाय सुरक्षित और ऊंचाई वाले स्थानों पर शिफ्ट करें।

अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने के दौरान स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय थानों और गोताखोरों की टीम को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है।

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