भोपाल/इंदौर, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश में आम जनता को सुगम, सुरक्षित और आधुनिक सफर का तोहफा देने के लिए मोहन सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसले पर मुहर लगा दी है। लंबे समय के बाद राज्य में सरकारी नियंत्रण वाली बस सेवा की बड़े पैमाने पर वापसी हो रही है। ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना’ के तहत पूरे प्रदेश में 5,206 नई बसें चलाई जाएंगी। इस महा-परियोजना की शुरुआत सबसे पहले इंदौर संभाग से होने जा रही है। खास बात यह है कि इस नई व्यवस्था के आने से वर्तमान में चल रहे निजी बस संचालकों के परमिट पर कोई आंच नहीं आएगी।

इंदौर संभाग बनेगा इस क्रांति का केंद्र; जुलाई से दौड़ेंगी 150 ‘PM ई-बसें’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित ‘मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ के संचालक मंडल की बैठक में इस परिवहन क्रांति का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया गया:
- इंदौर को सबसे बड़ी सौगात: योजना का श्रीगणेश इंदौर संभाग से होगा। इंदौर क्षेत्र में इंटरसिटी, सिटी और अंतर्राज्यीय (Interstate) रूटों को मिलाकर कुल 250 मार्ग तय किए गए हैं, जिन पर अकेले 1,688 बसें दौड़ेंगी।
- इलेक्ट्रिक बसों का सफर: इंदौर शहर और उपनगरीय इलाकों के लिए 28 सिटी रूट तय हुए हैं, जहां 784 बसें चलेंगी। इनमें जुलाई 2026 से शुरू होने वाली 150 अत्याधुनिक पीएम ई-बसें (Electric Buses) भी शामिल हैं।
7 हब में बंटेगा मध्य प्रदेश, पड़ोसी राज्यों तक मिलेगा सीधा कनेक्शन
यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरे प्रदेश को 7 मुख्य परिवहन क्षेत्रों (Hubs) में विभाजित किया गया है:
7 परिवहन क्षेत्र: इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर और रीवा।
- इंटरसिटी रूट्स: इन सातों मुख्यालयों से प्रदेश के विभिन्न जिलों को जोड़ने वाले कुल 620 इंटरसिटी मार्ग चिन्हित किए गए हैं, जिन पर 2,432 बसें चलेंगी। (इसमें इंदौर से 121 मार्गों पर 608 बसें शामिल हैं)।
- पड़ोसी राज्यों का सफर आसान: इंदौर से महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश (UP) के लिए 101 अंतर्राज्यीय रूट तय किए गए हैं, जिन पर 276 बसें चलेंगी। इन सेवाओं की कमान ‘अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड’ (AICTSL) के हाथों में होगी।
रोजगार की बहार: 1190 नए पदों को मंजूरी, 4 साल में होगी भर्ती
इस बड़े ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को संभालने के लिए सरकार बड़े पैमाने पर नौकरियां भी निकालने जा रही है:
- राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी और सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों को मिलाकर कुल 1,190 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है।
- इन पदों को अगले 4 सालों के भीतर चरणबद्ध (Phase-wise) तरीके से भरा जाएगा।
- बसों की सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) और सुचारू संचालन के लिए अलग-अलग हाईटेक विंग्स बनाए जाएंगे।
प्राइवेट बस ऑपरेटरों को घबराने की जरूरत नहीं; मोटरयान अधिनियम के तहत संचालन
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने निजी बस मालिकों की चिंता को भी दूर किया। सरकार ने साफ किया है कि इस सरकारी सेवा से निजी बसों के परमिट और संचालन पर कोई असर नहीं पड़ेगा, वे पहले की तरह ही चलती रहेंगी। पूरी व्यवस्था मोटरयान अधिनियम-1988 के नियमों के तहत संचालित होगी। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टरों और नगरीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि बस स्टैंड और रूट्स पर यात्रियों के लिए पीने के पानी, शेड और सुरक्षा जैसी तमाम जनसुविधाएं युद्ध स्तर पर चाक-चौबंद की जाएं।







