भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का हमीदिया अस्पताल, जो पूरे सूबे का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल माना जाता है, वहां से सिस्टम की घोर संवेदनहीनता की एक ऐसी भयावह तस्वीर सामने आई है जो किसी के भी रोंगटे खड़े कर दे। इस भीषण गर्मी में अस्पताल का अति-संवेदनशील बर्न वार्ड (Burn Ward) एक तपती हुई भट्टी में तब्दील हो चुका है। यहाँ जिंदगी और मौत के बीच झुलस रहे मरीजों को राहत देने के बजाय सिस्टम की नाकामी के आंसू रोने पर मजबूर किया जा रहा है।

भास्कर हाइलाइट्स: रूह कंपा देने वाली लापरवाही
- महीनों से बंद हैं AC: बर्न आईसीयू (ICU), जनरल वार्ड और यहाँ तक कि मुख्य ऑपरेशन थिएटर (OT) के एयर कंडीशनर पिछले कई महीनों से पूरी तरह कबाड़ होकर बंद पड़े हैं।
- जानलेवा संक्रमण का साया: 70 से 90 फीसदी तक झुलसे मरीज बिना एसी के भयंकर गर्मी में तड़प रहे हैं। त्वचा जलने के बाद शरीर का सुरक्षा कवच खत्म हो जाता है, जिससे हवा में मौजूद कीटाणुओं से जानलेवा इन्फेक्शन का खतरा 100 गुना बढ़ गया है।
- रिफॉर्म बनाम नियम: नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) के कड़े नियमों के मुताबिक, बर्न वार्ड में तापमान का पूरी तरह नियंत्रित होना और छनकर आने वाली शुद्ध हवा (Filtered Air) मेडिकल अनिवार्यता है, लेकिन हमीदिया में नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं।
घर से कूलर और बर्फ लाने को मजबूर हुए तीमारदार
अस्पताल के भीतर का नजारा किसी को भी विचलित कर सकता है। सरकारी दावों और स्वास्थ्य बजट को मुंह चिढ़ाती ये तस्वीरें अंदर की हकीकत बयां कर रही हैं:
- गत्ते के पंखों का सहारा: वार्डों में भर्ती मरीजों के लाचार परिजन खुद हाथ से गत्ते के टुकड़े और पंखे हिलाकर अपनों की तड़प को कम करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।
- खुद खरीदा सामान: कई तीमारदार भारी परेशानी उठाते हुए अपने घरों से खुद के पैसे खर्च कर कूलर, लंबी बिजली के तार (एक्सटेंशन बोर्ड) और बाजार से बर्फ के बड़े-बड़े ब्लॉक (टुकड़े) खरीदकर ला रहे हैं, ताकि मरीजों के जख्मों की भयानक जलन को थोड़ा शांत किया जा सके।
शर्मनाक: साधारण एयर कूलर की अशुद्ध हवा में हो रही जटिल सर्जरीज
लापरवाही की सबसे पराकाष्ठा हमीदिया के बर्न ऑपरेशन थिएटर (OT) में देखने को मिली है। यहाँ डॉक्टरों को बेहद संवेदनशील प्लास्टिक और बर्न सर्जरी साधारण घरेलू एयर कूलर चलाकर करनी पड़ रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, कूलर से निकलने वाली अत्यधिक नमी (Moisture) और धूल-मिट्टी वाली अशुद्ध हवा सीधे मरीजों के खुले जख्मों पर पड़ती है, जिससे मरीजों में मल्टी-ऑर्गन फेल्योर और सेप्टीसीमिया (खून का संक्रमण) होने का खतरा है।
1 साल में कई रिमाइंडर्स, अफसरों की आपसी खींचतान में अटकी मरीजों की सांसें
आधिकारिक और पुख्ता दस्तावेजों से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह बदइंतजामी अचानक नहीं हुई है, बल्कि सोची-समझी प्रशासनिक सुस्ती का नतीजा है:
- डॉक्टरों की चेतावनी बेअसर: बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने जून 2025 से लेकर अब तक अस्पताल प्रशासन और संबंधित विभागों को लगातार कई लिखित रिमाइंडर्स (यादपत्र) भेजे हैं।
- आखिरी अल्टीमेटम भी फेल: मई 2026 में भेजी गई आखिरी लिखित चेतावनी में साफ कहा गया था कि 11 एसी यूनिट्स पिछले 8 महीनों से पूरी तरह बंद पड़ी हैं और इससे मरीजों की मौत हो सकती है।
- बजट के बाद भी काम ठप: सूत्रों के अनुसार, इस काम के लिए सरकारी फंड और बजट भी पास हो चुका है, लेकिन पीडब्ल्यूडी (PIU) और अस्पताल प्रबंधन के बीच आपसी खींचतान और कागजी कोरम के चक्कर में टेंडर और रिपेयरिंग का काम अधर में लटका हुआ है।
इस पूरे मामले ने प्रदेश की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था और राजधानी के सबसे बड़े वीआईपी अस्पताल की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।







