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मऊगंज में राहुल गांधी के फोन के बाद टूटी सिस्टम की नींद: नीट छात्रा की खुदकुशी के 15 दिन बाद गांव पहुंचे कलेक्टर; नेशनल मीडिया में खबर चमकी तो भागा अमला

मऊगंज में राहुल गांधी के फोन के बाद टूटी सिस्टम की नींद: नीट छात्रा की खुदकुशी के 15 दिन बाद गांव पहुंचे कलेक्टर; नेशनल मीडिया में खबर चमकी तो भागा अमला

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The Khabrilal

Published On: Jun 6, 2026, 6:28 AM IST

Updated On: Jun 6, 2026, 6:28 AM IST

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मऊगंज/रीवा: मध्य प्रदेश के नवनिर्मित मऊगंज जिले से प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही को पूरी तरह कटघरे में खड़ा करती एक बेहद बड़ी खबर सामने आई है। नागपुर में नीट (NEET) परीक्षा की तैयारी कर रही मऊगंज के मंगनिया गांव निवासी होनहार छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की खुदकुशी के ठीक 15 दिन बाद आखिरकार जिला प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटी है। राष्ट्रीय मीडिया में मामला तूल पकड़ने और देश के बड़े विपक्षी नेताओं के सीधे दखल के बाद कलेक्टर संजय कुमार जैन भारी-भरकम प्रशासनिक अमले के साथ पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने उनके घर पहुंचे।

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बीती 20 मई को हुआ था दर्दनाक हादसा, 2 हफ्ते तक प्रशासन रहा ‘लापता’

यह पूरा मामला मऊगंज जिले के मंगनिया गांव की एक होनहार बेटी के आत्मघाती कदम से जुड़ा है, जिसने पूरे विंध्य अंचल को झकझोर दिया था:

  • नागपुर में की थी खुदकुशी: आकांक्षा चतुर्वेदी नागपुर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रही थीं। मानसिक तनाव या अन्य कारणों के चलते बीती 20 मई को उन्होंने वहां अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी।
  • प्रशासन की बेरुखी: इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद दो हफ्तों तक स्थानीय शासन-प्रशासन या किसी बड़े अधिकारी ने पीड़ित परिवार की सुध लेना तक मुनासिब नहीं समझा, जिससे परिजनों में गहरा आक्रोश था।

राहुल गांधी ने फोन पर बांटा था दर्द, ₹3 लाख की भेजी थी मदद

जब स्थानीय प्रशासन सोया हुआ था, तब दिल्ली और राष्ट्रीय स्तर पर इस मामले को लेकर बड़ी सियासी हलचल शुरू हो चुकी थी:

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  • विपक्ष का सीधा दखल: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कुछ दिनों पहले ही पीड़ित चतुर्वेदी परिवार से फोन पर सीधी बात की थी। उन्होंने न सिर्फ परिवार का ढांढस बंधाया, बल्कि अपनी टीम के जरिए ₹3 लाख की नकद आर्थिक सहायता पीड़ित परिवार तक भिजवाकर हर संभव कानूनी और सामाजिक मदद का भरोसा दिया था।
  • मीडिया के दबाव में झुके अफसर: राहुल गांधी के दखल और पीड़ित परिवार की बेबसी की खबर जब राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों (National Media) में प्रमुखता से हेडलाइन बनी, तो भोपाल से लेकर रीवा-मऊगंज के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में अधिकारियों का मंगनिया गांव का दौरा तय किया गया।

कलेक्टर सहित रीवा-मऊगंज के आला अधिकारियों की टीम पहुंची मंगनिया गांव

शनिवार सुबह मऊगंज कलेक्टर संजय कुमार जैन आला अधिकारियों की पूरी फौजी टुकड़ी के साथ अचानक मृतका के घर पहुंचे:

  • अफसरों का जमावड़ा: कलेक्टर के साथ इस दौरे में रीवा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) मेहताब सिंह गुर्जर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) विक्रम सिंह और मऊगंज एसडीएम (SDM) एपी द्विवेदी भी मुख्य रूप से मौजूद रहे।
  • हरसंभव मदद का आश्वासन: मंगनिया गांव पहुंचे कलेक्टर संजय कुमार जैन ने पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि “यह घटना अत्यंत दुखद और हृदय विदारक है। किसी भी परिवार के लिए अपनी होनहार संतान को खोना एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती।” कलेक्टर ने परिवार को जिला प्रशासन की ओर से नियमानुसार हरसंभव वित्तीय और सामाजिक सहयोग प्रदान करने का लिखित और मौखिक आश्वासन भी दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर पीड़ित जनता की आवाज तब तक नहीं सुनी जाती, जब तक कि दिल्ली के बड़े नेताओं का दखल और मीडिया का भारी दबाव अधिकारियों पर न पड़े।

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