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बड़वानी में भड़का पेसा एक्ट का गुस्सा: आमलिया पानी में तहसीलदार का पुतला बनाकर महिलाओं ने चप्पल-लाठियों से पीटा, बाद में फूंका; जानें क्यों आक्रोशित हैं ग्रामीण

बड़वानी में भड़का पेसा एक्ट का गुस्सा: आमलिया पानी में तहसीलदार का पुतला बनाकर महिलाओं ने चप्पल-लाठियों से पीटा, बाद में फूंका; जानें क्यों आक्रोशित हैं ग्रामीण

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The Khabrilal

Published On: Jun 6, 2026, 2:47 PM IST

Updated On: Jun 7, 2026, 5:12 AM IST

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बड़वानी: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिला मुख्यालय से सटे ग्राम आमलिया पानी में शुक्रवार को उस समय भारी बवाल और हंगामा खड़ा हो गया, जब प्रशासनिक फैसले से नाराज ग्रामीण और आदिवासी महिलाएं सड़कों पर उतर आईं। ग्राम सभा की अनुमति और सहमति के बिना गांव की चारागाह भूमि को ट्रेचिंग ग्राउंड (कचरा निस्तारण केंद्र) के लिए आवंटित किए जाने से नाराज महिलाओं और ग्रामीणों का गुस्सा तहसीलदार हितेंद्र भावसार पर फूट पड़ा। आक्रोशित महिलाओं ने तहसीलदार का एक प्रतीकात्मक पुतला बनाया और पहले उसकी चप्पलों व पत्थरों से जमकर पिटाई की। जब इससे भी मन नहीं भरा, तो महिलाएं घर से डंडे-लाठियां उठा लाईं और पुतले को बेरहमी से पीटने के बाद उसे बीच सड़क पर आग के हवाले कर दिया।

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भास्कर हाइलाइट्स: क्यों सुलग उठा आमलिया पानी गांव?

  • बिना सहमति भूमि आवंटन: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जिला प्रशासन और तहसीलदार हितेंद्र भावसार ने ‘ग्राम सभा’ की संवैधानिक स्वीकृति लिए बिना ही ट्रेचिंग ग्राउंड के लिए गांव की जमीन चिन्हित कर नगर पालिका को आवंटित कर दी है।
  • पुलिस बल के दम पर कब्जा: ग्रामीण पूनमचंद राठौर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस बल की भारी मौजूदगी का फायदा उठाकर संबंधित भूमि पर प्रशासन ने कब्जा दिलवा दिया और पहाड़ी क्षेत्र में कचरा केंद्र का निर्माण कार्य भी शुरू करवा दिया गया है।

पेसा एक्ट (PESA Act) के उल्लंघन और बदसलूकी का आरोप

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों और आदिवासी नेताओं ने इस पूरी कार्रवाई को कानून के खिलाफ बताया है:

  • संवैधानिक अधिकारों का हनन: ग्रामीण रमेश ने कहा कि यह सीधे तौर पर पेसा एक्ट (PESA Act) के नियमों का खुला उल्लंघन है। गांव की जिस चारागाह और सार्वजनिक उपयोग की भूमि को कचरा डंप करने के लिए दिया गया है, उससे पूरे क्षेत्र का वातावरण प्रदूषित होगा, बीमारियां फैलेंगी और जनस्वास्थ्य पर बेहद गंभीर व जानलेवा दुष्प्रभाव पड़ेंगे।
  • सरपंच को धमकाने का दावा: ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए आरोप लगाया कि जब गांव के लोगों ने इस मनमानी का शांतिपूर्वक विरोध दर्ज कराना चाहा, तो तहसीलदार ने ग्राम सरपंच के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास भी किया।

ग्रामीणों का अल्टीमेटम: “तहसीलदार माफी मांगें और आवंटन निरस्त हो”

पुतला दहन और चप्पल-लाठियों से पिटाई के इस उग्र प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के सामने अपनी दो टूक मांगें रख दी हैं:

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  1. सार्वजनिक माफी की मांग: तहसीलदार हितेंद्र भावसार खुद गांव पहुंचकर ग्रामीणों और ग्राम सभा के सामने सार्वजनिक रूप से अपनी बदसलूकी के लिए माफी मांगें।
  2. कचरा केंद्र रद्द हो: ट्रेचिंग ग्राउंड के लिए नगर पालिका को किया गया भूमि आवंटन तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।

आंदोलन उग्र करने की चेतावनी: प्रदर्शनकारियों और ग्रामीण महिलाओं ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी जायज मांगों पर जिला प्रशासन ने शीघ्र ही कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा और गांव में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।

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