भगवान न करे मैहर में कहीं बड़ी आग लगे! जिस कंडम दमकल की वजह से जिंदा जला था मासूम, वो आज भी कबाड़; मानवाधिकार आयोग के संज्ञान के बाद भी फाइलों में दफन है मंजूरी

मैहर/रामनगर: नवगठित मैहर जिले (सतना संभाग) से प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करने वाली एक बेहद डरावनी जमीनी हकीकत सामने आई है। जिले में दमकल व्यवस्था कागजों पर तो चाक-चौबंद दिखाई देती है, लेकिन धरातल पर आज भी आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक उपकरणों की जगह ‘मैनपावर’ (स्थानीय लोगों की बाल्टियों और लाठियों) का ही सहारा है। सबसे शर्मनाक स्थिति रामनगर विकासखंड की है, जहाँ की दमकल पिछले कई सालों से कबाड़ और कंडम हालत में खड़ी धूल फांक रही है।

प्रशासनिक सुस्ती का आलम यह है कि पिछले 3 महीनों में जिले के 16 अलग-अलग स्थानों पर आगजनी की घटनाएं हुईं, लेकिन दमकल के समय पर न पहुंचने के कारण करोड़ों का नुकसान हो गया और आग बुझने की बजाय खुद ही शांत हुई।

चेन रिएक्शन पर टिकी है तीन विकासखंडों की सुरक्षा

मैहर जिले के तीनों विकासखंडों— मैहर, अमरपाटन और रामनगर में कागजों पर एक-एक फायर ब्रिगेड तैनात है, लेकिन उनकी आपसी निर्भरता ने पूरे सिस्टम का मजाक बना दिया है:

  • रामनगर का संकट: रामनगर में आग लगने पर दमकल गाड़ी स्टार्ट ही नहीं होती। मजबूरन अमरपाटन से गाड़ी बुलानी पड़ती है। जब तक गाड़ी पहुंचती है, सब कुछ जलकर खाक हो जाता है।
  • अमरपाटन का संकट: यदि रामनगर की आग बुझाने अमरपाटन की गाड़ी चली जाए और उसी वक्त अमरपाटन में आग लग जाए, तो वहां की सुरक्षा रामभरोसे हो जाती है। ऐसी स्थिति में अमरपाटन को मैहर से दमकल की भीख मांगनी पड़ती है।

2 साल पहले जिंदा जला था मासूम, मानवाधिकार आयोग की फटकार भी बेअसर

यह लापरवाही सिर्फ पैसों या संसाधनों की नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगियों से खिलवाड़ की है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार:

“करीब दो साल पहले रामनगर क्षेत्र में भीषण आगजनी हुई थी। समय पर फायर ब्रिगेड नहीं पहुंचने के कारण एक मासूम बच्चा जिंदा जल गया था। इस दर्दनाक हादसे पर मानवाधिकार आयोग (Human Rights Commission) ने कड़ा संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को तलब किया था और जवाब मांगा था।”

हैरानी की बात यह है कि मासूम की मौत और मानवाधिकार आयोग की फटकार के बाद भी अफसरों की नींद नहीं टूटी। पिछले दो साल से नए दमकल वाहन की खरीदी की फाइल एक टेबल से दूसरे टेबल पर दौड़ रही है, लेकिन आपात स्थिति में दौड़ने वाले वाहन को हरी झंडी नहीं मिल सकी है। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि क्या प्रशासन को किसी और बड़े हादसे या किसी और मासूम की जान जाने का इंतजार है?

औद्योगिक हब होने के बावजूद सुरक्षा सीमित, उठ रही ये मांगें

मैहर जिला अपनी बड़ी सीमेंट फैक्ट्रियों और भारी औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। ऐसे में यहाँ किसी भी वक्त बड़ी औद्योगिक आगजनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सीमित और कंडम संसाधनों के भरोसे इतने संवेदनशील जिले को छोड़ना बड़े खतरे को आमंत्रण देना है।

नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की दो टूक मांग:

  1. रामनगर की कंडम फायर ब्रिगेड को तत्काल कबाड़ घोषित कर नए वाहन की खरीदी को बजट से तुरंत मंजूरी दी जाए।
  2. तीनों विकासखंडों में आधुनिक दमकल वाहनों की संख्या बढ़ाई जाए।
  3. आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड में पर्याप्त और प्रशिक्षित स्टाफ (फायर फाइटर्स) की तत्काल स्थाई नियुक्ति की जाए।

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