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प्रोजेक्ट चीता को सबसे बड़ा झटका: कूनो में गामिनी की बेटी KGP-11 की मौत, 25 दिन के भीतर 5 चीतों ने तोड़ा दम; जानें देश में अब कितने बचे

प्रोजेक्ट चीता को सबसे बड़ा झटका: कूनो में गामिनी की बेटी KGP-11 की मौत, 25 दिन के भीतर 5 चीतों ने तोड़ा दम; जानें देश में अब कितने बचे

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The Khabrilal

Published On: Jun 7, 2026, 8:20 PM IST

Updated On: Jun 7, 2026, 8:20 PM IST

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श्योपुर/मुरैना: मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से वन्यजीव प्रेमियों और केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ के लिए एक बेहद दर्दनाक और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। कूनो की सीमाओं को लांघकर मुरैना के बीहड़ों तक पहुंच चुकी 27 महीने की युवा मादा चीता KGP-11 की इलाज के दौरान मौत हो गई है। भारत की धरती पर पैदा हुई इस दूसरी पीढ़ी की मादा चीता की मौत के बाद कूनो में पिछले 25 दिनों के भीतर दम तोड़ने वाले चीतों का आंकड़ा 5 (4 शावक और 1 वयस्क) पर पहुंच गया है, जिससे वन्यजीव प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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भास्कर हाइलाइट्स: मुरैना के जंगलों में मिली थी घायल, इंटरनल ब्लीडिंग बनी काल

  • पहाड़गढ़ में मिला था सुराग: बीती 1 जून 2026 को कूनो से भटककर मुरैना जिले के पहाड़गढ़ रेंज के जंगलों में पहुंची यह मादा चीता अज्ञात कारणों से गंभीर रूप से जख्मी हो गई थी।
  • नहीं बच सकी जान: वन विभाग की टीम ने तुरंत रेस्क्यू कर इसे पालपुर (कूनो) के विशेष बाड़े (बोमा) में शिफ्ट किया था। वेटरनरी डॉक्टरों की टीम लगातार उसे बचाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन शरीर के अंदरूनी अंगों में आई गंभीर चोटों और लगातार हो रहे इंटरनल ब्लीडिंग (आंतरिक रक्तस्राव) के कारण उसने दम तोड़ दिया।

क्यों बड़ा झटका है KGP-11 की मौत?

कूनो के रिकॉर्ड के मुताबिक, KGP-11 की मौत नामीबिया या दक्षिण अफ्रीका से आए चीतों की तुलना में कहीं अधिक बड़ा नुकसान है:

  • भारतीय मूल की चीता: यह चीता विदेशी नहीं थी, बल्कि कूनो की आबोहवा में ही नर चीता पावक और मादा चीता गामिनी के मेल से जन्मी भारत की अपनी संतान थी।
  • माहौल में ढल चुकी थी: भारत के जंगलों और मौसम के अनुकूल पूरी तरह ढल चुकी 27 महीने की इस युवा और सक्रिय मादा चीता का असमय जाना भविष्य में चीतों की आबादी बढ़ाने के संकल्प को तगड़ा झटका दे गया है।

25 दिनों में 5 चीतों की मौत, सवालों के घेरे में मॉनिटरिंग सिस्टम

कूनो नेशनल पार्क में पिछले कुछ हफ्ते काल बनकर टूटे हैं। KGP-11 की मौत से ठीक पहले, बीती 12 मई 2026 को ही मादा चीता KGP-12 के चार नवजात शावकों ने एक-एक कर दम तोड़ दिया था। महज 25 दिनों के भीतर 5 चीतों की मौत ने कूनो के सुरक्षा घेरे, सैटेलाइट ट्रैकिंग और वाइल्डलाइफ डॉक्टरों की मॉनिटरिंग पर दोबारा बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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देश में अब क्या है चीतों का लेटेस्ट आंकड़ा?

KGP-11 की मौत के बाद भारत में चीतों का कुनबा एक बार फिर सिमट गया है:

विवरणवर्तमान संख्या
भारत में कुल जीवित चीते52 (कूनो में 49 + गांधीसागर में 3)
भारत की धरती पर जन्मे चीते32 (कुल 49 में से)
खुले जंगल में घूम रहे चीते19 (सुरक्षित बाड़ों से बाहर)

जहाँ एक ओर कूनो में मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, वहीं दूसरी ओर बुंदेलखंड के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीता पुनर्वास की आधारशिला रखी जा चुकी है। अब देखना यह है कि वन्यजीव विशेषज्ञ इन लगातार हो रही मौतों को रोकने के लिए क्या नया कदम उठाते हैं।

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