ग्वालियर: समाजवादी आंदोलन के पुरोधा, ‘युवा तुर्क’ और देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के जन्मशती समारोह के ऐतिहासिक अवसर पर ग्वालियर के चेम्बर ऑफ कॉमर्स में एक भव्य गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष समारोह में देश के राजनीतिक दिग्गजों, विचारकों और विद्वानों ने शिरकत कर पूर्व प्रधानमंत्री के संघर्षों, लोकतंत्र की रक्षा में उनके ऐतिहासिक योगदान और उनके अटल सिद्धांतों को याद किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय, आईटीएम यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति रमाशंकर सिंह तथा राज्यसभा सांसद अशोक सिंह सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी विधिक व वैचारिक रूप से उपस्थित रहे।

“मन, वचन, कर्म और आत्मा से सच्चे समाजवादी थे चंद्रशेखर जी”
समारोह को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने पूर्व प्रधानमंत्री के विराट व्यक्तित्व पर गहरा प्रकाश डाला:
- भारतीय चिंतन के प्रतीक: तोमर ने कहा कि आज के राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में सच्ची समाजवादी विचारधारा को पुनर्जीवित करने की महती आवश्यकता है। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर मन, वचन, कर्म और आत्मा से पूर्णतः समाजवादी थे, और यही सच्चा भारतीय चिंतन है जो एकात्मक दर्शन का पर्याय माना जाता है।
- साहसपूर्वक सत्य की स्वीकार्यता: उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के बीच हुए एक ऐतिहासिक विधिक व राजनैतिक संवाद का स्मरण करते हुए कहा कि बगैर निर्भीक होकर सत्य बोले कोई भी व्यक्ति महान नहीं बन सकता। साहसपूर्वक सत्य को स्वीकार करना ही महान होने की पूर्णता है।

पदयात्रा से मथा था भारत; सुबोध कांत सहाय बोले— “उनके समय सुलझने वाला था अयोध्या विवाद”
समारोह में देश के अन्य बड़े नेताओं ने भी पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के साथ बिताए अपने संस्मरणों और उनकी विधिक कार्यशैली को साझा किया:
- पदयात्रा से जानी गरीबों की पीड़ा: विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने रेखांकित किया कि चंद्रशेखर जी ने देशव्यापी ऐतिहासिक पदयात्रा के जरिए देश की ग्रामीण महिलाओं, नौजवानों और शोषित गरीबों की वास्तविक पीड़ा को बेहद करीब से तलाश किया था। उनकी इस पदयात्रा ने पूरे भारत को वैचारिक रूप से मथने का कार्य किया था।
- राजनैतिक रूप से बेहद ईमानदार: पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने चंद्रशेखर जी को एक ‘मॉडरेट समाजवादी’ बताते हुए कहा कि वे केवल विरोध के लिए कांग्रेस के विरोधी नहीं थे। सहाय ने एक बड़ा विधिक व ऐतिहासिक दावा करते हुए कहा कि चंद्रशेखर जी के प्रधानमंत्री रहते हुए अयोध्या का जटिल राम मंदिर विवाद पूरी तरह से सुलझने की विधिक स्थिति में आ गया था। वे अत्यंत राजनैतिक रूप से ईमानदार राजनेता थे।
ग्वालियर में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की प्रतिमा स्थापित करने की उठी विधिक मांग
लोकतंत्र की आत्मा और आयोजन समिति की मुस्तैदी —
“कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रख्यात शिक्षाविद व पूर्व मंत्री रमाशंकर सिंह ने कहा कि आज का दिन देश में लोकतंत्र को अक्षुण्ण रखने के विधिक संकल्प का दिन है। पूर्व प्रधानमंत्री में गजब का लोकतांत्रिक साहस था। सहभागिता और असहमति ही भारतीय लोकतंत्र की असली आत्मा है, लेकिन आज नागरिकों में विधिक निडरता की कमी हो रही है जिसे दूर करना होगा। इस अवसर पर रमाशंकर सिंह ने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और राज्यसभा सांसद अशोक सिंह से विधिक आग्रह किया कि ग्वालियर की ऐतिहासिक धरती पर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की एक भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए और इसके लिए शासन स्तर से उपयुक्त भूमि आवंटित कराई जाए।
इससे पूर्व अतिथियों ने चंद्रशेखर जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का विधिक शुभारंभ किया. समारोह के मुख्य संयोजक अरुण श्रीवास्तव ने जन्मशती वर्ष की विधिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम का सफल संचालन राजवीर राठौर ने किया तथा आभार प्रदर्शन राकेश शर्मा बल्लरी द्वारा व्यक्त किया गया. इस अवसर पर पूर्व मंत्री अरुण सिंह तोमर और अभिमन्यु सिंह सेंगर सहित अंचल के कई गणमान्य नागरिक और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे.”






