मैहर/सतना: मध्य प्रदेश की विख्यात संगीत नगरी और मां शारदा की पवित्र पावन धरा मैहर की ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ा और गौरवशाली सम्मान प्राप्त हुआ है. उस्ताद अलाउद्दीन खां साहब द्वारा स्थापित करीब 108 साल पुरानी विश्वविख्यात संगीत परंपरा ‘मैहर वाद्यवृंद’ (मैहर बैंड) को भारत सरकार की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (National Intangible Cultural Heritage – ICH) सूची में आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया गया है. इस बड़ी उपलब्धि के बाद विंध्य क्षेत्र सहित पूरे मध्य प्रदेश के कला, साहित्य और संगीत जगत में हर्ष व उत्साह का माहौल है. अब मैहर बैंड देश की उन चुनिंदा और विशिष्ट सांस्कृतिक अनमोल धरोहरों में शुमार हो गया है, जिन्हें संरक्षित, प्रचारित और संवर्धित करने के लिए राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर विशेष प्राथमिकता दी जाती है.

भगोरिया नृत्य और गोंड चित्रकला के बाद मैहर बैंड ने रचा इतिहास
संस्कृति विभाग और शासन स्तर से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस राष्ट्रीय गौरव के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- विशिष्ट क्लब में शामिल: भारत सरकार की इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सूची में जगह बनाने वाला मैहर बैंड मध्य प्रदेश की तीसरी बड़ी विधा है. इससे पहले प्रदेश की लोक संस्कृति के प्रतीक ‘भगोरिया नृत्य’ और जनजातीय गौरव ‘गोंड चित्रकला’ को भी इस सूची में विधिक व गौरवपूर्ण स्थान मिल चुका है.
- कलाकारों में उत्साह: अपर मुख्य सचिव (संस्कृति) शिव शेखर शुक्ला ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर शासकीय संगीत महाविद्यालय मैहर और इससे जुड़े सभी प्रतिभावान संगीत साधकों व कलाकारों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित की हैं.
क्या है अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) सूची और क्या होगा इसका लाभ?
यह सूची केंद्र सरकार द्वारा देश की उन प्राचीन और अनूठी परंपराओं को लुप्त होने से बचाने और सहेजने के लिए तैयार की जाती है, जिनका ऐतिहासिक व सामाजिक मूल्य बेहद अनमोल होता है:
- एक सदी पुराने संगीत को मिला विधिक संरक्षण: मैहर बैंड की स्थापना बाबा अलाउद्दीन खां ने प्रथम विश्वयुद्ध के अनाथ बच्चों को संगीत से जोड़ने के लिए की थी. इसकी अनूठी विशेषता यह है कि इसमें भारतीय शास्त्रीय रागों को विभिन्न अनूठे वाद्यों के फ्यूजन (वाद्यवृंद) के साथ प्रस्तुत किया जाता है. एक सदी से अधिक पुरानी इस विशिष्ट वादन परंपरा को अब राष्ट्रीय स्वीकृति मिल गई है.
- संगीत परंपरा के लिए स्थापित होगा ‘गुरुकुल’: इस संगीत विधा को नई पीढ़ी तक प्रामाणिक रूप से पहुँचाने और इसके मूल स्वरूप को जीवित रखने के लिए मैहर में एक विशेष संगीत गुरुकुल भी स्थापित किया जाएगा. इस गुरुकुल के माध्यम से देश-विदेश के छात्र मैहर घराने की पारंपरिक संगीत पद्धतियों और दुर्लभ वाद्यों को बजाने का विधिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे.
मुख्यमंत्री और संस्कृति विभाग के निरंतर प्रयासों को मिली राष्ट्रीय सफलता
संस्कृति विभाग का आधिकारिक वक्तव्य और विजन —
“संस्कृति विभाग के संचालक एनपी नामदेव ने इस विधिक उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक संरक्षण एवं संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश की शास्त्रीय व लोक कलाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाने के लिए विभाग लंबे समय से निरंतर प्रयासरत था. मैहर बैंड का यह चयन उसी विधिक और भगीरथ प्रयास का परिणाम है. केंद्र सरकार की इस सूची में आने के बाद अब मैहर बैंड के विकास, कलाकारों के मानदेय, वाद्ययंत्रों के रख-रखाव और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े सांस्कृतिक मंचों पर इसकी प्रस्तुतियों के विधिक रास्ते पूरी तरह साफ हो गए हैं, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत के स्वर्णिम काल की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा.”







