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स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में अस्पताल ही ‘बीमार’: 2 साल से भयंकर जल संकट से जूझ रहा तिवनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र; घरों से पानी लाने को मजबूर स्टाफ

स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में अस्पताल ही ‘बीमार’: 2 साल से भयंकर जल संकट से जूझ रहा तिवनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र; घरों से पानी लाने को मजबूर स्टाफ

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The Khabrilal

Published On: Jun 27, 2026, 8:20 PM IST

Updated On: Jun 27, 2026, 8:20 PM IST

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रीवा/मनगवां: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को हाईटेक और सर्वसुविधायुक्त बनाने के बड़े-बड़े विधिक दावों के बीच, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सूबे के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के गृह जिले रीवा के मनगवां विधानसभा क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यहाँ स्थित तिवनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पिछले करीब दो वर्षों से बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है। अस्पताल परिसर में पेयजल की समुचित विधिक व्यवस्था न होने के कारण इलाज कराने आने वाले ग्रामीण मरीजों, गर्भवती महिलाओं और दिन-रात सेवाएं देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

तत्कालीन सीएम दिग्विजय सिंह ने किया था लोकार्पण, आज बुनियादी सुविधा गायब

इस सरकारी अस्पताल के गौरवशाली इतिहास और वर्तमान बदहाली का विधिक ब्योरा इस प्रकार है:

  • 28 साल पुराना इतिहास: तिवनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का लोकार्पण 10 अगस्त 1998 को तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय श्रीनिवास तिवारी द्वारा विधिक रूप से किया गया था, ताकि अंचल के ग्रामीणों को इलाज के लिए रीवा दौड़ना न पड़े।
  • हैंडपंप उखड़ा, बन गया खाद गोदाम: स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, अस्पताल परिसर में एकमात्र खारे पानी का हैंडपंप था। उसके खराब होने के बाद उसे विधिक रूप से मरम्मत कराने के बजाय वहां से पूरी तरह हटा दिया गया और अब उस चिन्हित स्थान पर खाद गोदाम का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे पानी का संकट स्थायी हो गया है।

स्वास्थ्य मंत्री के निवास से महज 27 किमी दूर बदहाली; जनप्रतिनिधियों पर अनदेखी का आरोप

अस्पताल की इस दयनीय स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में क्षेत्रीय नेताओं और प्रशासनिक मॉनिटरिंग के खिलाफ भारी असंतोष है:

  1. हाई-प्रोफाइल जिला फिर भी उपेक्षा: ग्रामीणों का कहना है कि यह बदहाल अस्पताल स्वयं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के गृह जिले में आता है और उनके रीवा स्थित निजी निवास से इसकी दूरी महज 27 किलोमीटर है।
  2. नेताओं का गढ़, फिर भी जनता बेहाल: गंगेव जनपद पंचायत के अध्यक्ष विकास तिवारी स्वयं इसी तिवनी गांव के मूल निवासी हैं। इसके बावजूद अस्पताल का जल संकट दूर नहीं हो सका। वहीं क्षेत्रीय विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति पर भी क्षेत्र की जनता इस गंभीर जनहित के मुद्दे की लगातार अनदेखी करने का विधिक आरोप लगा रही है।

सफाई व्यवस्था भी वेंटिलेटर पर; संक्रमण फैलने का बढ़ा विधिक खतरा

अस्पताल का अंदरूनी संकट और नागरिकों की मांग —

“पानी की भारी किल्लत का सीधा और खतरनाक असर अस्पताल की आंतरिक साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन पर पड़ रहा है। प्रसव (Delivery) और ओपीडी सेवाओं के लिए पानी बेहद विधिक आवश्यकता है। स्थिति यह है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अपने घरों से बोतलों और बर्तनों में पानी भरकर लाने को मजबूर हैं, जबकि गरीब मरीजों को तीमारदारों के सहारे बाहर से पानी खरीदकर या भटककर लाना पड़ता है। गंदगी के कारण अस्पताल परिसर में संक्रमण (Infection) फैलने का विधिक खतरा कई गुना बढ़ गया है।

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में शासन द्वारा यहाँ नए डॉक्टर और फार्मासिस्ट की विधिक पदस्थापना की गई थी, जिससे ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी। लेकिन इसी बीच आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से तैनात एकमात्र सफाईकर्मी का स्थानांतरण दूसरे स्थान पर कर दिया गया, जिससे नियमित सफाई ठप हो गई है। स्थानीय नागरिकों ने जिला कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से तिवनी अस्पताल में तत्काल बोरिंग कराकर पेयजल बहाल करने तथा आवश्यक सफाई स्टाफ की विधिक उपलब्धता सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है।”

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