कूनो नदी को बचाने सिंधिया ने दी ₹43 करोड़ की परियोजना की सौगात! 101 गांवों का सुधरेगा जलस्तर, किसानों को मिलेगी 1800 हेक्टेयर सिंचाई की विधिक सुविधा

गुना: केंद्रीय नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री और स्थानीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने तीन दिवसीय मध्य प्रदेश दौरे के दौरान गुना जिले को एक ऐतिहासिक पर्यावरणीय और कृषि सौगात दी है. सिंधिया ने गुना जिले के कंजा गांव पहुंचकर, जो कूनो नदी का उद्गम स्थल है, वहां विशेष पूजा-अर्चना की. इसके बाद वे जिला स्तरीय ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. इस भव्य मंच से केंद्रीय मंत्री ने कूनो नदी के संरक्षण, जीर्णोद्धार और प्रवाह को अविरल बनाने के लिए 43 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘कूनो नदी पुनर्जीवन परियोजना’ का विधिक लोकार्पण किया. इस महत्वाकांक्षी योजना से क्षेत्र के हजारों किसानों की तकदीर बदलेगी और जल संकट से जूझ रहे गांवों को बड़ी राहत मिलेगी.

जानिए क्या है कूनो नदी पुनर्जीवन परियोजना और इसके विधिक लक्ष्य

इस दीर्घकालिक जल संरक्षण परियोजना के मुख्य तकनीकी और विकासपरक बिंदु इस प्रकार हैं:

  • विशाल प्रशासनिक दायरा: इस पुनर्जीवन परियोजना के अंतर्गत क्षेत्र की 23 ग्राम पंचायतों और कुल 101 गांवों को विधिक रूप से शामिल किया गया है, जहां जल संवर्धन के कार्य किए जाएंगे.
  • जल भंडारण में बंपर इजाफा: ₹43 करोड़ की इस सरकारी लागत से नदी क्षेत्र की जल भंडारण क्षमता में 5.12 MCM (मिलियन क्यूबिक मीटर) की भारी बढ़ोतरी दर्ज होगी, जिससे भूजल स्तर (Groundwater Level) तेजी से ऊपर आएगा.
  • खेती-किसानी को संबल: पानी का ठहराव बढ़ने से क्षेत्र की करीब 1800 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर सिंचाई की अतिरिक्त व सुदृढ़ सुविधा विकसित होगी, जो किसानों के आर्थिक उन्नयन में मील का पत्थर बनेगी.

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान: उद्गम स्थल पर रोपे जा रहे 2500 पौधे

समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पर्यावरण और मानव जीवन के अंतर्संबंधों पर गहरा विधिक प्रकाश डाला:

  1. प्रकृति है तो ही मानव अस्तित्व: सिंधिया ने कहा कि पृथ्वी और प्रकृति की सुरक्षा से ही मानव का अस्तित्व विधिक रूप से सुरक्षित रह सकता है. इसी दूरदर्शी सोच के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्तर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का शंखनाद किया है.
  2. हरा-भरा होगा कूनो का मायका: कूनो नदी के उद्गम स्थल कंजा गांव के कैचमेंट एरिया को सुरक्षित करने के लिए 2500 पौधों के विधिक रोपण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 1700 से अधिक पौधे रोपे जा चुके हैं.

कूनो राष्ट्रीय उद्यान की ‘लाइफ लाइन’ है यह 180 किमी लंबी नदी

नदी का भौगोलिक महत्व और जनसुनवाई का विधिक मोर्चा —

“केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि 180 किलोमीटर लंबी कूनो नदी मध्य प्रदेश के चार प्रमुख जिलों— गुना, शिवपुरी, श्योपुर और मुरैना से होकर गुजरती है. इस नदी का सबसे बड़ा रणनीतिक और पर्यावरणीय महत्व यह है कि यह ‘कूनो राष्ट्रीय उद्यान’ (Kuno National Park) के ठीक बीच से प्रवाहित होती है और वहां रह रहे चीतों व अन्य वन्यजीवों के लिए एकमात्र ‘लाइफ लाइन’ यानी जीवन रेखा है. कूनो नदी का 35 प्रतिशत प्रवाह क्षेत्र अकेले गुना जिले में आता है और यह अंत में मुरैना जिले में जाकर चंबल नदी में विलीन हो जाती है. उद्गम स्थल पर किए जा रहे इन विधिक कार्यों का सकारात्मक असर पूरी नदी के इकोसिस्टम पर पड़ेगा.

लोकार्पण कार्यक्रम से पूर्व केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने गुना में सुबह एक वृहद जनसुनवाई कार्यक्रम का भी आयोजन किया. इस दौरान उन्होंने अंचल से आए सैकड़ों आम नागरिकों की व्यक्तिगत, विधिक और सामाजिक समस्याएं सुनीं और मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर उनके त्वरित निराकरण के कड़े विधिक निर्देश जारी किए.”

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