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देश की ऊर्जा राजधानी में इतिहास का सबसे बड़ा विस्थापन! जयंत कोयला परियोजना के लिए उजड़ेगा पूरा मोरवा शहर, 22 हजार मकान और 50 हजार लोग होंगे बेघर

देश की ऊर्जा राजधानी में इतिहास का सबसे बड़ा विस्थापन! जयंत कोयला परियोजना के लिए उजड़ेगा पूरा मोरवा शहर, 22 हजार मकान और 50 हजार लोग होंगे बेघर

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The Khabrilal

Published On: Jun 27, 2026, 8:13 PM IST

Updated On: Jun 27, 2026, 8:13 PM IST

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सिंगरौली: देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में विख्यात सिंगरौली जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है. नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) की महत्वाकांक्षी जयंत परियोजना के वृहद विस्तार के लिए सैकड़ों साल पुराने ऐतिहासिक मोरवा शहर को चरणबद्ध विधिक तरीके से खाली कराए जाने की विस्थापन प्रक्रिया गति पकड़ चुकी है. इस महा-विस्थापन की जद में केवल रिहायशी मकान ही नहीं, बल्कि पूरा सामाजिक और व्यावसायिक ढांचा आ रहा है. सरकारी आकलन के अनुसार, इस पूरी विधिक कार्रवाई में करीब 22 हजार मकान, 50 हजार से अधिक आबादी, 30 से ज्यादा प्रतिष्ठित स्कूल, कई ऐतिहासिक धार्मिक स्थल, अस्पताल और सैकड़ों की संख्या में स्थापित व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह जमींदोज और प्रभावित होंगे.

अगले 25 वर्षों तक निर्बाध कोयला उत्पादन बढ़ाने की है महा-योजना

एनसीएल (NCL) प्रबंधन से प्राप्त आधिकारिक व तकनीकी विधिक जानकारी के अनुसार, इस विस्थापन के पीछे का मुख्य उद्देश्य इस प्रकार है:

  • देश को मिलेगी बिजली: जयंत परियोजना वर्तमान में देश की सबसे बड़ी कोयला खदानों में शुमार है, जहां से प्रतिवर्ष लगभग 30 मिलियन टन कोयले का रिकॉर्ड उत्पादन किया जाता है. मोरवा शहर को अधिग्रहित कर परियोजना का विस्तार होने से अगले 25 सालों तक देश के विभिन्न ताप विद्युत संयंत्रों (Power Plants) को कोयले की निर्बाध आपूर्ति विधिक रूप से सुनिश्चित की जा सकेगी.
  • 2029-30 तक का है विधिक लक्ष्य: इस महा-परियोजना को पूर्ण करने और पूरे मोरवा क्षेत्र को खाली कराने का अंतिम विधिक लक्ष्य वर्ष 2029-30 तय किया गया है.

फरवरी 2024 से शुरू हो चुकी है कार्रवाई; 70 मकानों पर चल चुका है पीला पंजा

प्रशासनिक और भू-अर्जन विभाग के स्तर पर विस्थापन की जमीनी विधिक कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ रही है:

  1. डिजिटल पोर्टल से मुआवजा: पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस बार LADM (Land Acquisition and Development Management) डिजिटल पोर्टल के माध्यम से मुआवजा वितरण, विधिक सर्वेक्षण और नोटिस की प्रक्रिया फरवरी 2024 से ही अनवरत जारी है.
  2. तीन श्रेणियों में वर्गीकरण: प्रभावित होने वाले परिवारों को विधिक रूप से तीन मुख्य श्रेणियों— भूमि स्वामी, सरकारी या अन्य भूमि पर काबिज परिवार तथा स्थानीय दुकानदार व छोटे व्यवसायी, में विभाजित कर विधिक मूल्यांकन किया जा रहा है.
  3. ध्वस्तीकरण की शुरुआत: मोरवा के वार्ड क्रमांक 10 और 9 से इस विस्थापन का आगाज हो चुका है. अब तक लगभग 70 मकानों को विधिक रूप से ध्वस्त किया जा चुका है, जबकि 475 अन्य मकानों पर बेदखली की कार्रवाई अंतिम चरण में है. आगामी चरणों में वार्ड 8, 7, 5, 4 और 3 को भी पूरी तरह खाली कराया जाएगा.

“सिर्फ मुआवजा नहीं, हमें सामूहिक पुनर्वास चाहिए”— अनिश्चितता के बीच प्रभावितों की मांग

सामाजिक पहचान और पुनर्वास की विधिक चुनौती —

“मोरवा का यह विस्थापन सिर्फ ईंट-गारे के मकानों के हटने की यांत्रिक कहानी नहीं है, बल्कि यह हजारों परिवारों की पीढ़ियों पुरानी यादों, स्थापित रोज़गार और सामाजिक ताने-बाने के पूरी तरह बिखर जाने का विधिक व मानवीय संकट है. स्थानीय संघर्ष समितियों और विस्थापित नागरिकों का स्पष्ट रूप से कहना है कि केवल पैसों का मुआवजा उनकी आजीविका और संस्कृति की भरपाई नहीं कर सकता. प्रभावित परिवारों की पुरजोर विधिक मांग है कि सरकार और एनसीएल प्रबंधन सभी विस्थापितों को एक ही विशाल सर्वसुविधायुक्त सर्व-साधारण कॉलोनी में एक साथ व्यवस्थित रूप से बसाए, ताकि उनकी सामाजिक, सांस्कृतिक और पारस्परिक पहचान पूरी तरह सुरक्षित रह सके. वर्तमान में पुनर्वास की कोई सुस्पष्ट ब्लूप्रिंट नीति सामने न आने से 50 हजार की आबादी के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं. ऐसे में देश के औद्योगिक विकास और नागरिकों के सुरक्षित मानवीय विस्थापन के बीच एक आदर्श विधिक संतुलन स्थापित करना सिंगरौली जिला प्रशासन और एनसीएल के लिए अब तक की सबसे कठिन परीक्षा साबित होने वाला है.”

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