अमरपाटन/मैहर : मैहर जिले के अमरपाटन विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम खरमसेड़ा में शुक्रवार को तीन बेकसूर यादव युवकों की जान लेने वाले कुएं को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा विधिक वैज्ञानिक खुलासा हुआ है। घटनास्थल पर जांच करने पहुंची प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) और प्रशासनिक विशेषज्ञों की टीम ने पाया कि वह कुआं सामान्य जलस्रोत नहीं, बल्कि ‘साइलेंट किलर’ बन चुका था। मौके पर मशीनों द्वारा किए गए विधिक परीक्षण में कुएं के भीतर 12,900 PPM (पार्ट्स पर मिलियन) से अधिक मीथेन जैसी जहरीली गैस दर्ज की गई है, जिसने कुएं के अंतःस्थल को गैस चैंबर में तब्दील कर दिया था।

सामान्य से आधी बची थी ऑक्सीजन; नीचे उतरते ही चंद सेकंड में रुक जाती हैं सांसें
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिकों द्वारा जारी किए गए विधिक आंकड़े रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं:
- दमघोंटू बना कुएं का वातावरण: वैज्ञानिक जांच के अनुसार, कुएं के भीतर ऑक्सीजन (Oxygen) का स्तर घटकर महज 12 से 13 प्रतिशत रह गया था। विधिक व वैज्ञानिक मानकों के अनुसार, सामान्य वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर 21 प्रतिशत होना अनिवार्य है। 12% स्तर का मतलब है कि वहाँ कदम रखते ही इंसान चंद सेकंड के भीतर फेफड़ों में ऑक्सीजन न पहुंचने के कारण अचेत हो जाएगा।
- बैल को बचाने में गई थी तीन जानें: गौरतलब है कि शुक्रवार शाम कुएं में गिरे एक बैल को बचाने के चक्कर में कृष्ण कुमार यादव, वीरेंद्र यादव और राहुल यादव एक-एक कर नीचे उतरे थे और इसी अदृश्य गैस के जाल में फंसकर तीनों की तड़पकर मौत हो गई थी।

वैज्ञानिकों के दावे पर ग्रामीणों का संशय! लकड़ी के मचान पर बकरी बांधकर कुएं में उतारा
प्रशासनिक दावों और वैज्ञानिक थ्योरी को लेकर खरमसेड़ा गांव के स्थानीय निवासियों में भारी संशय और आक्रोश देखा गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने खुद धरातल पर एक अनोखा प्रयोग कर डाला:
- देसी स्टाइल में किया परीक्षण: ग्रामीणों का तर्क था कि यदि कुएं में इतनी खतरनाक जहरीली गैस मौजूद है, तो प्रशासन ने इस कुएं को विधिक रूप से तुरंत सील या बंद क्यों नहीं कराया? इसी संशय को दूर करने के लिए ग्रामीणों ने लकड़ी का एक मचान (तख्ता) तैयार किया।
- सुरक्षित बाहर आई बकरी: ग्रामीणों ने उस मचान पर एक जिंदा बकरी को रस्सी के सहारे बांधा और धीरे-धीरे कुएं के उसी गहरे तल तक उतार दिया जहाँ युवकों की मौत हुई थी। हालांकि, कुछ देर तक कुएं के भीतर रखने के बाद जब बकरी को वापस ऊपर खींचा गया, तो वह पूरी तरह विधिक रूप से सुरक्षित और सामान्य थी। इस लोक-परीक्षण के बाद ग्रामीण वैज्ञानिक थ्योरी पर और ज्यादा सवाल उठा रहे हैं।
जोखिम भरे प्रयोग न करें ग्रामीण, पीसीबी की अंतिम विधिक रिपोर्ट का इंतजार — प्रशासन
वैज्ञानिक बाइट और प्रशासनिक चेतावनी का विधिक संदेश —
“मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) सतना के वैज्ञानिक व क्षेत्रीय अधिकारी गणेश कुमार बैगा ने अपनी प्राथमिक विधिक बाइट में स्पष्ट किया है कि— ‘लंबे समय से बंद, गहरे और उमस भरे कुओं के निचले हिस्से में जैविक अपघटन (Organic Decomposition) के कारण भारी मात्रा में मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी भारी गैसें जमा हो जाती हैं। यह गैसें ऑक्सीजन को रिप्लेस कर देती हैं। 12,900 PPM मीथेन की मौजूदगी इंसानी जान के लिए तत्काल घातक है। बकरी के बच जाने के पीछे तकनीकी कारण हो सकते हैं, क्योंकि कई बार गैस के पॉकेट्स कुएं के विशिष्ट कोनों में ही भारी होते हैं।’
जिला प्रशासन और स्थानीय अमरपाटन थाना पुलिस ने ग्रामीणों से विधिक अपील की है कि वे कुएं के पास अनावश्यक भीड़ न लगाएं और न ही इस तरह के जानलेवा व जोखिम भरे प्रयोग खुद करें। पुलिस मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम की अंतिम विधिक रिपोर्ट और फॉरेंसिक विंग की विस्तृत टेक्निकल रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिसके बाद ही मौत की विधिक कड़ियों की अंतिम पुष्टि हो सकेगी।”







