भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का मुख्य रेलवे स्टेशन इन दिनों अपनी बदइंतजामी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण यात्रियों के लिए मुसीबत का सबब बन चुका है। प्रतिदिन हजारों मुसाफिरों की आवाजाही वाले इस बेहद व्यस्त स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-6 पर उतरने वाले यात्रियों को भीषण अव्यवस्थाओं से दो-चार होना पड़ रहा है। खासकर मानसून की एंट्री के साथ ही यहाँ के हालात बद से बदतर हो गए हैं। इस गंभीर जन-समस्या को लेकर अब विपक्ष भी हमलावर हो गया है और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सीधे रेल मंत्रालय व स्थानीय प्रशासन के खिलाफ विधिक मोर्चा खोल दिया है।

भारी सामान और बच्चों को लेकर 300 मीटर पैदल चलने की मजबूरी; मेट्रो निर्माण ने बढ़ाई आफत
ग्राउंड जीरो से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भोपाल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-6 से बाहर निकलने वाले यात्रियों की मुख्य विधिक व व्यावहारिक परेशानियां इस प्रकार हैं:
- दूरी बनी सबसे बड़ी मुसीबत: प्लेटफॉर्म नंबर-6 के मुख्य निकास द्वार से ऑटो स्टैंड की दूरी करीब 250 से 300 मीटर है। इतनी लंबी दूरी के कारण ट्रेन से उतरने वाले बुजुर्गों, दिव्यांगों, गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाले परिवारों को भारी-भरकम सूटकेस लेकर पैदल घिसटना पड़ता है।
- कीचड़ और जलभराव का साम्राज्य: स्टेशन परिसर के बाहर एक तरफ जहां मेट्रो रेल परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से पूरा एप्रोच रोड कीचड़ और पानी से लबालब है। हमीदिया रोड की तरफ कदम बढ़ाते ही यात्रियों को घुटने भर पानी और गंदगी का सामना करना पड़ता है।
कांग्रेस प्रवक्ता प्रवीण धौलपुरे ने दागे तीखे सवाल; रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को दी विधिक चेतावनी
यात्रियों की इस दुर्दशा को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण धौलपुरे ने सरकार, रेलवे बोर्ड और स्थानीय नगर निगम प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने अंचल के नागरिकों की विधिक आवाज बुलंद करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, डीआरएम (DRM) भोपाल, स्थानीय सांसद, महापौर, जिला कलेक्टर और नरेला विधायक विश्वास सारंग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने रेलवे प्रशासन के समक्ष प्रमुख रूप से निम्नलिखित 3 विधिक मांगें रखी हैं:
- गेट के पास बने परमानेंट स्टैंड: यात्रियों की सुविधा के लिए प्लेटफॉर्म नंबर-6 के मुख्य प्रवेश/निकास द्वार के ठीक पास कम से कम 25 ऑटो के खड़े होने के लिए एक स्थायी (Permanent) स्टैंड आरक्षित किया जाए।
- पिक-अप और ड्रॉप की विधिक सुविधा: निजी वाहनों और कमर्शियल टैक्सियों को प्लेटफॉर्म के गेट तक यात्रियों को छोड़ने (Drop) और वहीं से बैठाने (Pick-up) की विधिक अनुमति दी जाए, ताकि मरीजों व दिव्यांगों को पैदल न चलना पड़े।
- मानसून इमरजेंसी एक्शन: बारिश के मौसम और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए इस पूरी वैकल्पिक व्यवस्था को तत्काल और प्राथमिकता के आधार पर धरातल पर लागू किया जाए।
राजधानी के स्टेशन की यह तस्वीर बेहद शर्मनाक, सुधरे व्यवस्था वरना होगा उग्र आंदोलन — विपक्ष
प्रशासनिक उदासीनता और जनहित की कड़ियाँ —
“कांग्रेस नेता प्रवीण धौलपुरे ने दोटूक शब्दों में कहा कि भोपाल रेलवे स्टेशन केवल एक स्टेशन नहीं, बल्कि प्रदेश की साख का विधिक केंद्र है. यदि प्रतिदिन हजारों लोग देश के कोने-कोने से यहाँ आ रहे हैं और उन्हें ऑटो पकड़ने के लिए कीचड़ में 300 मीटर पैदल चलना पड़ रहा है, तो यह ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्मार्ट सिटी’ के दावों पर एक बड़ा तमाचा है.
यदि रेलवे प्रशासन और स्थानीय जिला प्रशासन ने आगामी कुछ दिनों के भीतर प्लेटफॉर्म नंबर-6 की विधिक कड़ियों को दुरुस्त नहीं किया और यात्रियों को सुरक्षित व सुविधाजनक आवागमन का अधिकार नहीं दिया, तो कांग्रेस पार्टी रेल यात्रियों और ऑटो चालकों को साथ लेकर स्टेशन परिसर में उग्र विधिक प्रदर्शन के लिए बाध्य होगी।”







