मऊगंज में स्वच्छता नियम बेहद सख्त: घर और दुकान के बाहर दो डस्टबिन रखना हुआ अनिवार्य; नियम तोड़ा तो मौके पर लगेगा ₹5,000 का भारी जुर्माना

मऊगंज: मऊगंज नगर को स्वच्छ, सुंदर और डस्ट-फ्री बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने अब बेहद कड़ा और दंडात्मक विधिक रुख अख्तियार कर लिया है. कलेक्टर संजय कुमार जैन के औचक निरीक्षण और कड़े दिशा-निर्देशों के बाद नगर परिषद मऊगंज द्वारा एक नया और सख्त लोक-आदेश जारी किया गया है. इस विधिक आदेश के तहत अब शहर के भीतर आने वाले प्रत्येक मकान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, दुकान और यहाँ तक कि छोटे ठेले वालों को भी अपने बाहर गीले और सूखे कचरे के निपटारे के लिए दो अलग-अलग डस्टबिन रखना अनिवार्य कर दिया गया है. यदि कोई भी नागरिक या व्यापारी इस नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर 5 हजार रुपये तक का नगद जुर्माना (चालान) ठोंका जाएगा.

कलेक्टर के औचक निरीक्षण में खुली थी पोल, अधिकारियों को लगी फटकार

नगर परिषद और प्रशासनिक स्तर पर अचानक लिए गए इस बड़े फैसले की पृष्ठभूमि इस प्रकार है:

  • बाजार में मिली थी घोर लापरवाही: हाल ही में कलेक्टर संजय कुमार जैन ने मऊगंज शहर के मुख्य बाजार और रिहायशी इलाकों का बिना किसी पूर्व सूचना के औचक विधिक निरीक्षण किया था. इस दौरान अधिकांश दुकानों और व्यावसायिक परिसरों के बाहर कचरा प्रबंधन की घोर विफलता देखने को मिली, जहाँ गीला और सूखा कचरा एक ही जगह या सड़कों पर फेंका जा रहा था.
  • तत्काल एक्शन के निर्देश: इस अव्यवस्था पर गहरी नाराजगी जताते हुए कलेक्टर ने मौके पर ही नगर परिषद के मुख्य अधिकारियों को विधिक फटकार लगाई और शहर की सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए तत्काल दंडात्मक और सुधारात्मक विधिक कदम उठाने के कड़े निर्देश जारी किए थे.

हरे और नीले डस्टबिन का विधिक गणित; जानिए किस रंग में कौन सा कचरा जाएगा

प्रशासन द्वारा जारी सार्वजनिक विधिक सूचना के अनुसार, कचरे के स्रोत पर ही पृथक्कीकरण (Segregation at Source) को अनिवार्य किया गया है:

  1. हरा डस्टबिन (Green Dustbin): यह डस्टबिन पूरी तरह से गीले कचरे (जैसे बचा हुआ भोजन, फल-सब्जियों के छिलके, पेड़-पौधों की पत्तियां आदि) के लिए आरक्षित रहेगा. इस कचरे का उपयोग नगर परिषद द्वारा जैविक खाद (Compost) बनाने में किया जाएगा.
  2. नीला डस्टबिन (Blue Dustbin): यह डस्टबिन सूखे कचरे (जैसे प्लास्टिक, कागज, गत्ते, कांच, लोहा व रीसाइक्लिंग योग्य सामग्री) के लिए नियत किया गया है. इसके माध्यम से कचरे का वैज्ञानिक पुनर्चक्रण (Recycling) आसान होगा.

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि इस विधिक व्यवस्था से शहर की नालियों का जाम होना, जगह-जगह सड़ांध और बदबू जैसी गंभीर जन-स्वास्थ्य समस्याओं पर पूरी तरह से विधिक रोक लग सकेगी.

बिना सूचना के रोज़ाना छापा मारेगा विशेष जांच दल; मौके पर ही कटेगा रसीद

प्रशासनिक अमले की मुस्तैदी और व्यापारियों में मची हलचल —

“इस नए विधिक आदेश को कड़ाई से धरातल पर उतारने के लिए नगर परिषद ने एक विशेष जांच दल (Flying Squad) का विधिक गठन कर दिया है. यह टीम बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के प्रतिदिन शहर के किसी भी वॉर्ड, गली, मोहल्ले या मुख्य व्यापारिक मार्ग पर औचक दबिश देगी और डस्टबिन की विधिक उपलब्धता की जांच करेगी. जहाँ भी नियमों की अवहेलना या डस्टबिन गायब मिलेंगे, वहां मौके पर ही ₹5,000 की विधिक चालानी कार्रवाई की जाएगी और इसकी दैनिक रिपोर्ट नोडल अधिकारी को सौंपी जाएगी. आदेश जारी होते ही मऊगंज के सर्राफा, कपड़ा और गल्ला बाजार सहित सभी छोटे-बड़े व्यापारियों में भारी हलचल मच गई है और लोग डस्टबिन खरीदने में जुट गए हैं. प्रशासन ने साफ किया है कि यह नियम बड़े शोरूम से लेकर सड़क किनारे ठेला लगाने वाले छोटे वेंडर्स पर भी समान रूप से विधिक रूप से लागू होगा. अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे जुर्माने के विधिक भय से नहीं, बल्कि मऊगंज को एक स्वस्थ और आदर्श शहर बनाने के संकल्प के साथ इस महा-अभियान में अपना विधिक व नैतिक सहयोग प्रदान करें.”

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