एमपी की सियासत में ‘जमीन विवाद’ पर महासंग्राम! बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का बड़ा पलटवार— ‘CM मोहन यादव पर कांग्रेस के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और निराधार’

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार पर लगाए गए 335 एकड़ जमीन घोटाले के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने राजधानी भोपाल में एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस (PC) आयोजित कर कांग्रेस के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। खंडेलवाल ने आंकड़ों के साथ हकीकत सामने रखते हुए कहा कि कांग्रेस केवल भ्रम फैलाकर सूबे के एक बेहद लोकप्रिय और पिछड़े वर्ग के मुख्यमंत्री को बदनाम करने का कुत्सित और सुनियोजित प्रयास कर रही है।

प्रदेश अध्यक्ष ने गिनाई जमीन की सच्चाई, 2023 से अब तक नहीं बदला कोई आंकड़ा

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी, बेटे और बहु के नाम दर्ज संपत्तियों का पूरा विधिक ब्योरा मीडिया के सामने रखा:

  • मुख्यमंत्री की खुद की जमीन: खंडेलवाल ने बताया कि डॉ. मोहन यादव ने साल 2023 के विधानसभा चुनाव में जो चुनावी हलफनामा (Nomination) दाखिल किया था, उसके अनुसार उनके पास 17 एकड़ निजी कृषि भूमि थी, जो आज जून 2026 में भी हूबहू उतनी ही है, इसमें एक इंच का भी इजाफा नहीं हुआ।
  • पत्नी और बेटे की संपत्ति: सीएम की पत्नी सीमा यादव के नाम रजिस्टर्ड 12.29 एकड़ और बेटे वैभव यादव के नाम 2023 से पहले की 16 एकड़ जमीन में भी मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह सारी जमीन मास्टर प्लान लागू होने से बहुत पहले की है।
  • बहू की कृषि भूमि: सीएम की बहू शालिनी यादव द्वारा जो 10 एकड़ की जमीन खरीदी गई है, वह पूरी तरह कृषि भूमि है और वह भी आधिकारिक मास्टर प्लान क्षेत्र की सीमाओं से पूरी तरह बाहर स्थित है।

सिद्धि विनायक कंपनी और रिश्तेदारों पर लगे आरोपों का भी किया खंडन

जमीन विवाद में घसीटी गई कंपनी और सीएम के करीबियों को लेकर भी प्रदेश अध्यक्ष ने कड़ा रुख अपनाया:

  1. डायरेक्टर पद से 2017 में ही दे चुके हैं इस्तीफा: आरोपों में जिक्र की गई ‘सिद्धि विनायक’ कंपनी के बारे में खंडेलवाल ने साफ किया कि इस कंपनी के पास साल 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जो जून 2026 में घटकर महज 65 एकड़ रह गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस कंपनी के डायरेक्टर पद से साल 2017 में ही आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे चुके हैं।
  2. रिश्तेदार लेंगे विधिक एक्शन: खंडेलवाल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जिन रिश्तेदारों का नाम इसमें घसीटा गया है, उनका अपना स्वतंत्र व्यवसाय और अस्तित्व है। गलत तथ्य पेश करने के कारण वे सभी कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कड़ी कानूनी और विधिक कार्रवाई (Defamation Case) करने की तैयारी कर रहे हैं।

“उमा भारती, शिवराज से लेकर मोहन यादव तक… पिछड़े वर्ग का नेतृत्व बर्दाश्त नहीं कर पा रही कांग्रेस”

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का तीखा राजनीतिक हमला —

“प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस की मानसिकता पर सीधा प्रहार करते हुए कहा— ‘यह मध्य प्रदेश का इतिहास रहा है कि जब-जब किसी पिछड़े वर्ग (OBC) के नेता को प्रदेश की कमान मिली है, चाहे वे साध्वी उमा भारती जी हों, शिवराज सिंह चौहान जी हों या अब डॉ. मोहन यादव हों, कांग्रेस के सामंतवादी विचार के नेताओं को यह पचता नहीं है। समाज के कुछ ठेकेदार पिछड़े वर्ग के नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और लगातार षड्यंत्र रचकर सरकार को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। लेकिन सूबे की जनता इस दुष्प्रचार का जवाब देगी।’

इस करारे पलटवार और तथ्यात्मक स्पष्टीकरण के बाद अब देखना होगा कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस मामले को आगे किस मोड़ पर ले जाता है।

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