इंदौर: केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के प्रमुख रामदास अठावले ने अपने इंदौर प्रवास के दौरान महाराष्ट्र की सियासत को लेकर एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। अठावले ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना यूबीटी) के भीतर भारी असंतोष है और उनके कई मौजूदा सांसद व विधायक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने के लिए लगातार संपर्क कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि वे एनडीए में आते हैं तो उनका सहृदय स्वागत किया जाएगा, यहाँ तक कि भविष्य में खुद उद्धव ठाकरे भी एनडीए का हिस्सा बन सकते हैं।

“एनडीए में आने के रास्ते खुले हैं, लेकिन यहाँ से जाने का मार्ग बंद है”
इंदौर पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने मीडिया से रूबरू होते हुए महाराष्ट्र के मौजूदा सियासी घटनाक्रम पर बेहद तल्ख और बेबाक टिप्पणियां कीं:
- घट रहा है जनाधार: अठावले ने कहा कि महाराष्ट्र की जमीन पर अब उद्धव ठाकरे गुट की पकड़ बेहद कमजोर हो चुकी है और उनका जनाधार लगातार घट रहा है। यही वजह है कि उनके बचे-खुचे नेता भी अब भविष्य को देखते हुए एकनाथ शिंदे और एनडीए के नेतृत्व पर भरोसा जता रहे हैं।
- संजय राउत पर साधा निशाना: शिवसेना (UBT) के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत पर सीधा हमला बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने चुटकी ली और कहा कि उन्हें पार्टी में केवल और केवल अनर्गल बयानबाजी करने के लिए ही रखा गया है, जमीन पर उनका कोई वजूद नहीं है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर भी कड़े तेवर: ‘कितना भी बड़ा रसूखदार हो, बख्शा नहीं जाएगा’
महाराष्ट्र की राजनीति के अलावा, केंद्रीय मंत्री ने देश के अन्य समसामयिक और संवेदनशील मुद्दों पर भी सरकार का रुख पूरी तरह साफ किया:
- चढ़ावे की चोरी पर कड़ा रुख: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि की कथित हेराफेरी को लेकर खड़े हुए विवाद पर अठावले ने सख्त लहजे में कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच चल रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे कानूनन किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा— चाहे वह राम जन्मभूमि ट्रस्ट का कितना ही बड़ा पदाधिकारी हो या फिर किसी बेहद प्रभावशाली व्यक्ति का करीबी क्यों न हो।
- मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं: इस दौरान अठावले ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा चलाई जा रही जन कल्याणकारी योजनाओं, सामाजिक न्याय और अपनी पार्टी (आरपीआई) के आगामी देशव्यापी सांगठनिक विस्तार के एजेंडे को भी मीडिया के सामने प्रमुखता से साझा किया।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के इस ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के बाद अब महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में एक बार फिर कयासों का दौर शुरू हो गया है।







