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NEET री-एग्जाम में देशव्यापी ‘सॉल्वर गैंग’ का सनसनीखेज भंडाफोड़! सतना मेडिकल कॉलेज का छात्र बिहार में गिरफ्तार, 15-20 लाख में डील

NEET री-एग्जाम में देशव्यापी ‘सॉल्वर गैंग’ का सनसनीखेज भंडाफोड़! सतना मेडिकल कॉलेज का छात्र बिहार में गिरफ्तार, 15-20 लाख में डील

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The Khabrilal

Published On: Jun 25, 2026, 9:02 AM IST

Updated On: Jun 25, 2026, 9:02 AM IST

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सतना देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET UG Re-Exam) को लेकर एक बार फिर बड़ा और बेहद चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। बिहार के लखीसराय पुलिस ने परीक्षा केंद्रों पर सक्रिय एक बेहद हाई-टेक और संगठित ‘सॉल्वर गैंग’ (Solver Gang) का पर्दाफाश करते हुए कुल 30 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। इस पूरे सिंडिकेट में सबसे सनसनीखेज मोड़ मध्य प्रदेश के सतना से जुड़ा है, जहाँ के शासकीय मेडिकल कॉलेज (GMC Satna) के फर्स्ट ईयर का एक छात्र बिहार के परीक्षा केंद्र में दूसरे अभ्यर्थी की जगह फर्जी परीक्षार्थी (सॉल्वर) बनकर पेपर देते हुए रंगे हाथों दबोचा गया है।

पिता ने जमीन बेचकर बेटे को बनाया था भावी डॉक्टर; खुद निकला सॉल्वर

बिहार पुलिस की जांच और सतना मेडिकल कॉलेज से मिली प्राथमिक व विधिक कड़ियों के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े का ब्योरा इस प्रकार है:

  • यह है आरोपी छात्र: गिरफ्तार सॉल्वर की शिनाख्त हिमांशु कुमार (पिता शिवनारायण साह) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार के सुपौल जिले के जोल्हनिया (पथरा गांव) का निवासी है। वह सतना शासकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस (MBBS) प्रथम वर्ष का छात्र है।
  • पिता की मेहनत पर फिरा पानी: सूत्रों के मुताबिक, हिमांशु के पिता एक साधारण किसान हैं, जिन्होंने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने का सपना पूरा करने के लिए अपनी पैतृक जमीन तक बेच दी थी। लेकिन हिमांशु चंद रुपयों के लालच में आकर इस बड़े अंतर्राज्यीय रैकेट का हिस्सा बन गया।

6 राज्यों के मेडिकल कॉलेजों से हायर किए गए सॉल्वर; बायोमेट्रिक में हुई बड़ी हेराफेरी

जांच में खुलासा हुआ है कि इस गैंग का जाल मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और पश्चिम बंगाल सहित देश के 6 राज्यों में फैला हुआ है:

  1. जरूरतमंद मेडिकल छात्रों पर थी नजर: यह गिरोह देश के प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेजों के ऐसे मेधावी छात्रों को टारगेट करता था, जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत होती थी। असली अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर रसूखदारों से 40 लाख रुपये की मोटी डील की जाती थी, जिसमें से फर्जी सॉल्वर बनने वाले इन मेडिकल छात्रों को 15 से 20 लाख रुपये तक का भारी-भरकम ऑफर दिया जाता था।
  2. बायोमेट्रिक एजेंसी के कर्मियों से साठगांठ: परीक्षा केंद्रों पर पकड़े जाने से बचने के लिए गैंग ने बायोमेट्रिक सत्यापन (Biometric Verification) करने वाली आधिकारिक एजेंसी के कर्मचारियों को भी मोटी रकम देकर अपने साथ मिला लिया था। असली छात्र के फिंगरप्रिंट और डेटा में तकनीकी हेरफेर कर सॉल्वर छात्रों को आसानी से परीक्षा हॉल के अंदर एंट्री दिला दी जाती थी।

सतना मेडिकल कॉलेज में हड़कंप; 15 दिनों की छुट्टी की एप्लीकेशन छोड़ गायब था छात्र

कॉलेज प्रबंधन की छानबीन और आधिकारिक पक्ष —

“बिहार में हिमांशु की गिरफ्तारी की खबर सतना पहुंचते ही शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रबंधन में हड़कंप मच गया। कॉलेज के पीआरओ (PRO) अंबरीश मिश्रा ने बताया कि उन्हें इस गंभीर मामले की आधिकारिक जानकारी फिलहाल मीडिया के माध्यम से ही मिली है, अभी तक बिहार पुलिस या किसी प्रशासनिक विभाग का कोई औपचारिक विधिक पत्र (Administrative Letter) प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि, कॉलेज रिकॉर्ड की जांच करने पर कैंपस के सिक्योरिटी इंचार्ज के पास हिमांशु कुमार की एक लीव एप्लीकेशन मिली है। इस आवेदन में उसने ‘पारिवारिक कारणों से पैतृक गांव जाने’ का जिक्र कर बीते 15 दिनों से आवश्यक अवकाश लिया हुआ था। कॉलेज प्रशासन अपने स्तर पर छात्र के पूरे बैकग्राउंड और रिकॉर्ड की जांच कर रहा है।”

लखीसराय पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की री-एग्जाम सुरक्षा व्यवस्था और बायोमेट्रिक वेंडर्स की विधिक पारदर्शिता एक बार फिर देशव्यापी जांच के दायरे में आ गई है।

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