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इंदौर कांग्रेस में बड़ा ‘डैमेज कंट्रोल’! नेता प्रतिपक्ष बदलने पर भड़की बगावत के बाद संगठन ने संभाला मोर्चा; 2 घंटे चले हाई-वोल्टेज मंथन के बाद टला इस्तीफों का संकट

इंदौर कांग्रेस में बड़ा ‘डैमेज कंट्रोल’! नेता प्रतिपक्ष बदलने पर भड़की बगावत के बाद संगठन ने संभाला मोर्चा; 2 घंटे चले हाई-वोल्टेज मंथन के बाद टला इस्तीफों का संकट

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The Khabrilal

Published On: Jun 23, 2026, 8:32 PM IST

Updated On: Jun 23, 2026, 8:32 PM IST

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इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के सियासी गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब इंदौर नगर निगम (IMC) में नेता प्रतिपक्ष की कमान बदलते ही कांग्रेस के भीतर अंतर्कलह और असंतोष की चिंगारी फूट पड़ी। शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिए गए एक संगठनात्मक फैसले से नाराज होकर पार्टी के कई स्थानीय पदाधिकारियों, ब्लॉक अध्यक्षों और जमीनी कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफे देने तक की तैयारी कर ली थी। हालांकि, संकट गहराता देख कांग्रेस के संकटमोचकों और वरिष्ठ नेताओं ने तत्काल मोर्चा संभाला। रविवार, 23 जून 2026 की देर शाम हुई एक हाई-प्रोफाइल आपातकालीन बैठक और भारी मान-मनौव्वल के बाद फिलहाल इस ‘इस्तीफा ड्रामे’ पर पूरी तरह विराम लग गया है।

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सोनिला मीमरोट भाटिया की ताजपोशी से क्यों सुलग उठी थी ‘बगावत’?

इंदौर शहर कांग्रेस के भीतर अचानक उपजे इस गंभीर सांगठनिक संकट की मुख्य इनसाइड कड़ियां इस प्रकार हैं:

  • इस नियुक्ति का था विरोध: इंदौर नगर निगम के भीतर नेता प्रतिपक्ष की अहम जिम्मेदारी वार्ड क्रमांक 45 की कद्दावर पार्षद और पूर्व महिला कांग्रेस शहर अध्यक्ष सोनिला मीमरोट भाटिया को सौंपे जाने का आधिकारिक आदेश जारी हुआ था।
  • अचानक तेज हुईं इस्तीफे की अटकलें: इस एकतरफा फैसले से नाराज होकर शहर के कई कद्दावर गुटों, वार्ड प्रभारियों और ब्लॉक अध्यक्षों ने इसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की अनदेखी बताया और संगठन के खिलाफ बगावती तेवर अख्तियार करते हुए सामूहिक इस्तीफे की अफवाहों को हवा दे दी।

दीपू यादव के निवास पर 2 घंटे तक चला कड़ा मंथन; रूठों को ऐसे मनाया गया

मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस के शीर्ष रणनीतिकारों ने डैमेज कंट्रोल की कमान अपने हाथों में ली:

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  1. बंद कमरे में मैराथन बैठक: बगावत को शांत करने के लिए इंदौर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता दीपु यादव के निजी निवास पर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील बैठक बुलाई गई। बंद कमरे में करीब 2 घंटे से अधिक समय तक दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और मंथन का दौर चला।
  2. नो-इस्तीफा फार्मूला पर बनी सहमति: वरिष्ठ नेताओं ने नाराज ब्लॉक अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि सांगठनिक संतुलन बनाए रखने के लिए उनकी चिंताओं को प्रदेश संगठन (PCC) के सामने प्रमुखता से रखा जाएगा। लंबी जद्दोजहद के बाद सभी इस बात पर राजी हुए कि कोई भी पदाधिकारी फिलहाल पार्टी से इस्तीफा नहीं देगा।

लोकतांत्रिक पार्टी में असहमति का हक, लेकिन अब हम पूरी तरह एकजुट: सोनिला भाटिया

नवनियुक्त नेता प्रतिपक्ष का आधिकारिक पक्ष —

“पार्टी के भीतर मचे इस घमासान को शांत करने के बाद नवनियुक्त नेता प्रतिपक्ष सोनिला मीमरोट भाटिया ने परिपक्वता दिखाते हुए मीडिया के सामने अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा— ‘कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से लोकतांत्रिक सिद्धांतों और आंतरिक लोकतंत्र पर चलती है। यहाँ हर कार्यकर्ता और पदाधिकारी को अपनी सहमति या असहमति जताने का पूरा विधिक अधिकार है। कुछ संवादहीनता के कारण गलतफहमियां उपजी थीं, जिन्हें आपसी चर्चा और बड़े भाई दीपू यादव जी के हस्तक्षेप से पूरी तरह सुलझा लिया गया है। अब इंदौर कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और नगर निगम में बीजेपी के भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूती से मिलकर लड़ेगी।’

इस सफल डैमेज कंट्रोल के बाद भले ही इंदौर कांग्रेस ने एक बड़े सार्वजनिक बिखराव को टाल दिया हो, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मालवा अंचल में कांग्रेस के भीतर गुटीय संतुलन बनाए रखना शीर्ष नेतृत्व के लिए आज भी कितनी बड़ी टेढ़ी खीर है।

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