मैहर में ज़मीन का महा-फर्जीवाड़ा: असली मालिक को भनक तक नहीं और सीमेंट कंपनी को बेच दी 28 लाख की बेशकीमती भूमि; ईओडब्ल्यू ने दर्ज की FIR

रीवा/मैहर (सलैया): विंध्य अंचल के मैहर जिले से फर्जी दस्तावेजों के सहारे गरीबों और जनजातीय वर्ग की जमीनों को हड़पने का एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने फर्जी भूमि स्वामी, तथाकथित विक्रेता और बिचौलियों सहित 7 नामजद और अन्य आरोपियों के खिलाफ जालसाजी का एक बड़ा आपराधिक मुकदमा दर्ज किया है। शातिर ठगों ने असली मालिक के नाम पर फर्जी आईडी प्रूफ तैयार कर करीब 28 लाख रुपये की बेशकीमती जमीन आरसीसीपीएल सीमेंट कंपनी को बेच डाली, जबकि असली मालिक को इस सौदे का एक धेला तक नसीब नहीं हुआ।

भास्कर हाइलाइट्स: इन 6 मुख्य आरोपियों सहित 7 पर गिरी गाज

ईओडब्ल्यू रीवा ने मामले की गहन जांच और सत्यापन के बाद धारा 120बी, 420, 467, 468 और 471 आईपीसी (IPC) के तहत इन आरोपियों पर शिकंजा कसा है:

  1. राजकुमार गौतम (पिता लवकुश प्रसाद गौतम, निवासी ग्राम मनटोलवा, मैहर)
  2. संजय मिश्रा (पिता ध्रुव मिश्रा, निवासी सलैया)
  3. धनेन्द्र सिंह (निवासी हरनामपुर)
  4. आलोक गौतम (पिता सनत कुमार गौतम, निवासी प्रेमविहार कालोनी, सतना)
  5. अमित चतुर्वेदी (पिता रमेश चतुर्वेदी, निवासी ग्राम सोहावल)
  6. प्रतीक राय (निवासी चौपड़ा कालोनी, मैहर)
  • इनके अलावा गिरोह में शामिल अन्य कूटनीतिक बिचौलियों और कूट रचित दस्तावेज बनाने वालों को भी आरोपी बनाया गया है।

फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाकर हुआ ‘ज़मीन का बड़ा खेला’

ईओडब्ल्यू के आधिकारिक सत्यापन में इस पूरे घोटाले की जो क्रोनोलॉजी सामने आई है, वह बेहद हैरान करने वाली है:

  • असली मालिक महाराष्ट्र का: मैहर के ग्राम सलैया में विभिन्न खसरा नंबरों की कुल 0.700 हेक्टेयर बेशकीमती भूमि के वास्तविक स्वामी प्रतीक राय (निवासी रागपुर, महाराष्ट्र) थे।
  • ऐसे रचा गया षड्यंत्र: जालसाजों ने असली प्रतीक राय की आंखों में धूल झोंककर उनके नाम का फर्जी आईडी कार्ड और जाली दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद इस गिरोह ने कागजों पर जमीन को पहले राजकुमार गौतम के नाम ट्रांसफर (विक्रय) कर दिया।
  • फैक्ट्री को बेची ज़मीन: राजकुमार गौतम और बिचौलियों ने मिलकर इस विवादित जमीन को मैहर के भरौली में स्थित एमपी बिरला समूह की आरसीसीपीएल प्राइवेट लिमिटेड सीमेंट फैक्ट्री के राकेश बाफना को 28 लाख रुपये में बेच दिया। रजिस्ट्री भी हो गई, कंपनी ने पैसे भी दे दिए, लेकिन असली मालिक प्रतीक राय के हाथ पूरी तरह खाली रहे।

अल्ट्राटेक को भी लगा चुके हैं 2.50 करोड़ का चूना

जांच अधिकारियों के मुताबिक, इस गिरोह के कारनामे यहीं नहीं रुकते। इसी तरह के कूटरचित और फर्जी दस्तावेजों के जरिए इस रैकेट ने मैहर जिले के ही ग्राम भदनपुर में स्थित लगभग 3.500 हेक्टेयर भूमि को अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी को करीब 2.50 करोड़ रुपये में बेच दिया था। ईओडब्ल्यू रीवा की टीम इस करोड़ों के दूसरे घोटाले की भी समानांतर जांच कर रही है, जिसमें वास्तविक आदिवासियों और गरीबों की जमीनें हड़पी गई थीं।

शिकायत पर एसपी डॉ. अरविंद सिंह ठाकुर का बड़ा एक्शन

ईओडब्ल्यू रीवा के पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. अरविंद सिंह ठाकुर ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि गरीबों, आदिवासियों और बाहरी भू-स्वामियों को टारगेट करने वाले इस गिरोह की शिकायत मिलते ही इसकी सूक्ष्मता से जांच कराई गई थी।

एसपी डॉ. ठाकुर की दो टूक —

“फर्जी विक्रेता और बिचौलियों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बाद एफआईआर दर्ज कर मामले को विवेचना में ले लिया गया है। इस रैकेट से जुड़े किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। राजस्व विभाग के जिन भी कर्मचारियों या पटवारियों की इसमें संलिप्तता पाई जाएगी, उन्हें भी सह-आरोपी बनाया जाएगा।”

उल्लेखनीय है कि 19 करोड़ के बहुचर्चित डामर घोटाले (जिसमें 47 आरोपी नामजद हैं) को उजागर करने वाली एसपी डॉ. ठाकुर की ब्रिगेड के इस ताजा एक्शन से मैहर और सतना के जमीन माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।

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