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मैहर में महा-घोटाला: 111 रसूखदारों को फर्जी तरीके से बनाया ‘गरीब’, खा गए राशन! EOW ने दो पूर्व जनपद CEO समेत 6 बड़े अफसरों पर दर्ज की FIR

मैहर में महा-घोटाला: 111 रसूखदारों को फर्जी तरीके से बनाया ‘गरीब’, खा गए राशन! EOW ने दो पूर्व जनपद CEO समेत 6 बड़े अफसरों पर दर्ज की FIR

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The Khabrilal

Published On: Jun 26, 2026, 7:38 AM IST

Updated On: Jun 26, 2026, 7:38 AM IST

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सतना/मैहर: मध्य प्रदेश के नवनिर्मित मैहर जिले से प्रशासनिक गलियारों को हिलाकर रख देने वाली एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है. गरीबों के हक पर डाका डालकर 111 अपात्र व अमीर लोगों को फर्जी तरीके से बीपीएल (BPL – गरीबी रेखा से नीचे) सूची में शामिल करने के एक बेहद गंभीर और संगठित भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ हुआ है. इस महा-फर्जीवाड़े की शिकायत पर विधिक जांच पूरी करते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने मैहर जनपद पंचायत के दो पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) सहित कुल छह अधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है.

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वर्ष 2018 से डकार रहे थे गरीबों का हक, एक ही नंबर पर जारी थे दो-दो कार्ड

ईओडब्ल्यू (EOW) रीवा के पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. अरविंद सिंह ठाकुर से मिली विधिक व आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे घोटाले की मुख्य कड़ियां इस प्रकार हैं:

  • एक ही नंबर पर दो हितग्राही: भोपाल ईओडब्ल्यू मुख्यालय को मिली एक गोपनीय शिकायत के बाद जब जांच शुरू हुई, तो चौकाने वाले विधिक तथ्य मिले. अधिकारियों ने भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं लांघते हुए एक ही बीपीएल नंबर पर दो-दो अलग-अलग हितग्राहियों के नाम दर्ज कर फर्जी प्रमाण पत्र जारी कर दिए थे.
  • राजस्व को भारी नुकसान: आरोपी अधिकारी और ये 111 अपात्र लोग वर्ष 2018 से लगातार शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील जनकल्याणकारी योजनाओं (जैसे मुफ्त राशन, चिकित्सा सहायता) का अवैध और अनुचित लाभ उठा रहे थे, जिससे सीधे तौर पर सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा है.

न पटवारी का सर्वे हुआ, न तहसीलदार का सत्यापन; सीधे बांट दिए बीपीएल प्रमाण पत्र

विधिक प्रक्रिया और नियमों को ताक पर रखकर किस तरह इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया, जांच में इसका भी पूरा ब्योरा सामने आया है:

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  1. सत्यापन प्रक्रिया को किया दरकिनार: किसी भी नागरिक का नाम बीपीएल सूची में जोड़ने के लिए बकायदा पटवारी द्वारा जमीनी स्तर पर सर्वे किया जाता है और उसके बाद संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार द्वारा उसकी विधिक अनुशंसा या आदेश जारी होता है.
  2. अधिकारियों की मनमानी: लेकिन मैहर जनपद पंचायत के तत्कालीन पदस्थ अधिकारियों ने शासन के इन कड़े विधिक निर्देशों और नियमों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया. बिना किसी पटवारी सर्वे और बिना तहसीलदार के आदेश के ही, सीधे टेबल पर बैठकर अपात्र लोगों को बीपीएल प्रमाण पत्र थमा दिए गए.

इन 2 पूर्व सीईओ समेत 6 अधिकारियों पर दर्ज हुआ भ्रष्टाचार का मुकदमा

EOW रीवा ने प्राथमिक जांच में पूरी तरह दोषी पाए जाने पर जिन तत्कालीन और वर्तमान अधिकारियों को नामजद आरोपी बनाया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  • वेदमणि मिश्र — तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत मैहर
  • आर.एन. शर्मा — तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत मैहर
  • प्रेमलाल गौतम — सहायक विकास विस्तार अधिकारी
  • सुदामा प्रसाद चौरसिया — तत्कालीन विकासखंड अधिकारी
  • दीपक मिश्रा — तत्कालीन बीपीएल प्रभारी
  • रामसुंदर मिश्रा — वर्तमान बीपीएल प्रभारी

आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की इन गंभीर धाराओं में केस दर्ज

विधिक कार्रवाई और आगामी गिरफ्तारियों का खाका —

“आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने सभी छह नामजद आरोपियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (शासकीय धन का गबन), 120-बी (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ए) एवं 13(2) के तहत गंभीर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया है. ईओडब्ल्यू एसपी डॉ. अरविंद सिंह ठाकुर ने मीडिया को बताया कि वर्तमान में 111 अपात्रों की विधिक पुष्टि हो चुकी है, लेकिन मामले की विवेचना और फाइलें खंगालने का काम अभी जारी है. इस जांच के दायरे में कई अन्य लिपिक, पटवारी और वे अपात्र हितग्राही भी आएंगे जिन्होंने फर्जी दस्तावेज बनवाए, जिसके चलते आने वाले दिनों में आरोपियों की संख्या और गिरफ्तारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ सकता है.”

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