हनुमना/मऊगंज: विंध्य अंचल के नवगठित मऊगंज जिले से इंसानियत, संवेदनशीलता और बेजुबान वन्यजीवों के प्रति प्रेम की एक बेहद खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है। जिले की हनुमना तहसील क्षेत्र अंतर्गत आने वाले बेलहा गांव में ग्रामीणों की सजगता और मध्य प्रदेश पुलिस की डायल-112 टीम की त्वरित विधिक मुस्तैदी के कारण जंगल से भटककर आए एक नन्हे हिरण के शावक को नया जीवन मिल गया है। इस सराहनीय और मानवीय कार्य की समूचे अंचल में जमकर प्रशंसा हो रही है।

आवारा कुत्तों के चंगुल में फंसने ही वाला था शावक, देवदूत बनकर आगे आए ग्रामीण
बेलहा गांव के जमीनी और प्रत्यक्षदर्शी घटनाक्रम की कड़ियाँ इस प्रकार हैं:
- मां से बिछड़कर पहुंचा आबादी के पास: शनिवार को एक छोटा और बेहद मासूम हिरण का शावक भटकते हुए जंगल की सीमा को लांघकर बेलहा गांव की आवासीय बस्ती के करीब पहुंच गया। शावक अपनी मां से बिछड़ने के कारण बुरी तरह सहमा हुआ था।
- कुत्तों से था जान का खतरा: गांव के पास एकाएक जंगली जीव को देखकर स्थानीय आवारा कुत्तों ने उसे घेरना शुरू कर दिया था। कुत्तों की भौंकने की आवाज सुनकर ग्रामीण तुरंत मौके पर दौड़े। उन्होंने स्थिति की संवेदनशीलता को भांपते हुए कुत्तों को खदेड़ा और शावक को चारों तरफ से सुरक्षित सुरक्षा घेरे में ले लिया।
पायलट रामाश्रय चौधरी और संजीव सिंह ने संभाला मोर्चा; डायल-112 की मदद से सुरक्षित लाया गया मऊगंज
ग्रामीणों ने वन्यजीव की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए तत्काल सरकारी तंत्र से विधिक संपर्क साधा:
- डायल-112 पर दी त्वरित सूचना: ग्रामीणों ने बिना एक पल की देरी किए आपातकालीन पुलिस सेवा डायल-112 को फोन कर मामले से अवगत कराया।
- पुलिस बनी रक्षक: सूचना मिलते ही डायल-112 के वाहन पायलट रामाश्रय चौधरी और उनके सहयोगी पुलिस स्टाफ संजीव सिंह त्वरित गति से बेलहा गांव पहुंचे। पुलिस टीम ने ग्रामीणों की मौजूदगी में शावक को अपने विधिक संरक्षण में लिया, उसे दुलारकर पानी पिलाया और सुरक्षित वाहन से जिला मुख्यालय मऊगंज लेकर आए।
शावक पूरी तरह स्वस्थ, कुछ दिन की देखरेख के बाद प्राकृतिक आवास में छोड़ेंगे — वन विभाग
वन्यजीव संरक्षण और मऊगंज रिपोर्टर राजेंद्र पयासी की विधिक कड़ियाँ —
“मऊगंज जिला मुख्यालय पर पुलिस टीम ने पूरी विधिक कागजी औपचारिकताओं के साथ हिरण के शावक को वन विभाग (Forest Department) के सुपुर्द कर दिया.
वन विभाग के अधिकारियों और डॉक्टरों ने शावक का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद बताया कि शावक पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है. चूंकि वह अभी बहुत छोटा है, इसलिए उसे कुछ दिनों तक वन विभाग के विशेष रेस्क्यू सेंटर की देखरेख में एक्सपर्ट्स की निगरानी में रखा जाएगा। जैसे ही वह बाहरी वातावरण के अनुकूल पूरी तरह सुदृढ़ हो जाएगा, उसे उसके प्राकृतिक विधिक आवास (घने जंगल) में सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा। वन विभाग के रेंजरों ने बेलहा के ग्रामीणों और डायल-112 की टीम का आभार व्यक्त करते हुए अंचल की जनता से अपील की है कि वे जंगलों से भटके वन्यप्राणियों को नुकसान न पहुंचाएं और तत्काल वन्यजीव हेल्पलाइन या पुलिस को सूचना दें।”







