इंदौर कलेक्टर का ‘ऑन-द-स्पॉट’ बड़ा एक्शन! ₹2 लाख की रिश्वत मांगने के आरोप में पटवारी तत्काल प्रभाव से निलंबित,विभागीय जांच शुरू

इंदौर: भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति अपनाते हुए इंदौर के जिला कलेक्टर शिवम वर्मा ने एक बहुत बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान कलेक्ट्रेट पहुंचे एक पीड़ित की गंभीर शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने ₹2 लाख की मोटी रिश्वत मांगने के आरोपी पटवारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। प्राथमिक जांच में भ्रष्टाचार के आरोप पहली नजर में सही पाए जाने के बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है। इसके साथ ही कलेक्टर ने पीड़ित को बड़ी राहत देते हुए उसके अटके हुए काम को चौबीसों घंटे के भीतर पूरा करने के भी सख्त निर्देश मातहत अधिकारियों को जारी किए हैं।

बिचौली हप्सी तहसील में पदस्थ पटवारी पर लगा था गंभीर आरोप

इंदौर के राजस्व और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचाने वाले इस पूरे मामले का विवरण इस प्रकार है:

  • बटांकन आदेश के नाम पर वसूली: इंदौर जिले की बिचौली हप्सी तहसील के हल्का क्षेत्र में पदस्थ पटवारी अनुशील जोसफ के खिलाफ एक पीड़ित किसान/नागरिक ने जनसुनवाई में उपस्थित होकर गुहार लगाई थी। शिकायत में बताया गया था कि सक्षम राजस्व न्यायालय द्वारा बकायदा एक बटांकन (जमीन के बंटवारे का अमल) आदेश पारित किया जा चुका है, लेकिन पटवारी उसे सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने के एवज में ₹2,00,000 की रिश्वत मांग रहा है।
  • कलेक्टर की त्वरित जांच: शिकायत सुनते ही कलेक्टर शिवम वर्मा ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गोपनीय तरीके से इसकी प्राथमिक जांच करवाई। जांच रिपोर्ट में पटवारी के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोप प्रथम दृष्टया पूरी तरह सही पाए गए।

7 दिन के भीतर पेश करना होगा ‘आरोप पत्र’; बिचौली हप्सी ही रहेगा मुख्यालय

कलेक्टर के कड़े रुख के बाद अनुविभागीय अधिकारी (SDM राजस्व, बिचौली हप्सी) द्वारा पटवारी के निलंबन का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है:

  1. विभागीय जांच के आदेश: आदेश के तहत पटवारी अनुशील जोसफ को शासकीय सेवा से तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) संस्थित कर दी गई है। निलंबन की इस पूरी अवधि के दौरान उनका नियत मुख्यालय तहसील कार्यालय बिचौली हप्सी ही निर्धारित किया गया है, जहाँ उन्हें रोज अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
  2. तहसीलदार को अल्टीमेटम: निलंबन आदेश में क्षेत्र के तहसीलदार को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि आरोपी पटवारी के खिलाफ पुख्ता आरोप पत्र (Charge Sheet) और उससे जुड़े तमाम आवश्यक साक्ष्य व विधिक दस्तावेज तैयार कर आगामी 7 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि सेवा समाप्ति जैसी कड़ी वैधानिक कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके।

काम भी होगा तुरंत; अन्य भ्रष्ट अधिकारियों को कलेक्टर की दो टूक चेतावनी

प्रशासनिक सुधार और जनता को राहत —

“आरोपी पटवारी पर गाज गिराने के साथ-साथ कलेक्टर शिवम वर्मा ने आम जनता को यह भरोसा दिलाया है कि किसी भी वैध काम के लिए किसी को भी दलाली या रिश्वत देने की जरूरत नहीं है। कलेक्टर ने बिचौली हप्सी के राजस्व अमले को कड़े निर्देश दिए हैं कि पीड़ित व्यक्ति के संबंधित बटांकन आदेश का बिना किसी हीलाहवाली के तुरंत अमल सुनिश्चित किया जाए। कलेक्ट्रेट सूत्रों के मुताबिक, कलेक्टर ने साफ कहा है कि जनसुनवाई में आने वाली भ्रष्टाचार की शिकायतों पर सीधे बर्खास्तगी और लोकायुक्त की कार्रवाई की जाएगी।”

कलेक्टर शिवम वर्मा के इस ताबड़तोड़ और सख्त फैसले की इंदौर की जनता और सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। लोगों का कहना है कि जनसुनवाई की सार्थकता तभी है जब भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ इसी तरह ऑन-द-स्पॉट कड़े फैसले लिए जाएं।

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