सीधी, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के सीधी जिले से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ वनांचल क्षेत्र कुसमी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गाजर के चिनगी गांव में रविवार-सोमवार की दरमियानी रात जंगली हाथियों के एक झुंड ने एक घर पर धावा बोल दिया। हाथियों ने सो रहे एक बुजुर्ग दंपती (पति-पत्नी) को बेरहमी से कुचलकर मार डाला। इस खौफनाक हादसे के बाद से पूरे इलाके में भारी दहशत का माहौल है, वहीं वन विभाग और प्रशासन की लचर नीतियों के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है।

रात 2 बजे सोते समय हाथियों ने घेरा घर, दंपती की मौके पर मौत
यह रूह कंपा देने वाला वाकया रविवार देर रात करीब 2:00 बजे का है, जब पूरा गांव गहरी नींद में सोया हुआ था:
- चारों तरफ से घेरा: ग्राम तिलिया के रहने वाले भैयालाल यादव (60 वर्ष, पिता लालमन यादव) और उनकी बुजुर्ग पत्नी अपने घर के भीतर सो रहे थे। इसी दौरान संजय टाइगर रिजर्व की तरफ से आया हाथियों का एक विशाल झुंड चिनगी गांव में घुस गया।
- मलबे में तब्दील किया आशियाना: हाथियों ने बुजुर्ग दंपती के घर को चारों तरफ से घेर लिया और उसे बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इससे पहले कि बुजुर्ग पति-पत्नी को भागने या संभलने का मौका मिलता, हाथियों ने दोनों को पैरों तले कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
प्रशासन के खिलाफ फूटा आक्रोश— “जब तक न्याय नहीं, तब तक शव नहीं उठाएंगे”
सुबह होते ही जैसे ही इस दोहरे हत्याकांड जैसी त्रासदी की खबर फैली, पूरे अंचल में सनसनी मच गई। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ मौके पर जमा हो गए:
- अधिकारियों को घेरा: सूचना मिलते ही पुलिस, राजस्व और वन विभाग (Forest Department) की टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन उन्हें भारी जन-आक्रोश का सामना करना पड़ा।
- शव उठाने से रोका: गुस्से से तमतमाए ग्रामीणों ने मृतकों के शवों को उठाने से साफ इनकार कर दिया और प्रशासनिक अमले के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
टुकड़ों में विस्थापन की नीति पर उठे गंभीर सवाल, 40 परिवार अब भी खतरे में
ग्रामीणों ने इस दर्दनाक हादसे के लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और वन विभाग की दोषपूर्ण ‘विस्थापन नीति’ को जिम्मेदार ठहराया है:
- अधूरा विस्थापन बना काल: ग्रामीणों का आरोप है कि संजय टाइगर रिजर्व (Sanjay Tiger Reserve) क्षेत्र से लगे इस बेहद संवेदनशील गांव में हाथियों का खतरा सालों से बना हुआ है। वन विभाग ने गांव के कुछ रसूखदार या चुनिंदा परिवारों को तो विस्थापित (Shift) कर दिया, लेकिन मृतक परिवार सहित करीब 40 गरीब परिवारों को अब तक विस्थापन की मुख्यधारा और लाभ से वंचित रखा गया है।
- लापरवाह अफसर: स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने सुरक्षित पुनर्वास के लिए कई बार एसडीएम (SDM) कार्यालय और वन विभाग के आला अधिकारियों को लिखित आवेदन दिए, लेकिन अफसरों ने फाइलों को ठंडे बस्ते में डाले रखा।
- मुआवजे में हेराफेरी: कई गरीब परिवार उचित और पूरा मुआवजा न मिलने के कारण अपनी जमीन नहीं छोड़ पाए, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की स्थिति लगातार बनी हुई है।
वर्तमान स्थिति
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक पूरे गांव के व्यवस्थित विस्थापन, प्रभावित परिवारों के समुचित पुनर्वास और मृतकों के आश्रितों को भारी मुआवजे का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमला ग्रामीणों को समझाने और स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए मौके पर डटा हुआ है।







