खरगोन, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से कानून-व्यवस्था को तार-तार कर देने वाली एक बेहद सनसनीखेज और खौफनाक वारदात सामने आई है। चैनपुर थाना क्षेत्र के दामखेड़ा गांव में एक ही साल के भीतर दो सगे भाइयों की आत्महत्या के बाद पूरा गांव सुलग उठा। अंधविश्वास और आक्रोश के मेल ने ऐसा उग्र रूप अख्तियार किया कि ग्रामीणों ने शव उठाने आई पुलिस टीम पर जानलेवा हमला कर दिया। महिलाओं ने पुलिसवालों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, जबकि थाना प्रभारी (TI) को जान बचाने के लिए एक घर में छिपना पड़ा, जहां वे करीब 4 घंटे तक बंधक बने रहे।

अंधविश्वास का खौफनाक साया: एक ही साल में दो सगे भाइयों की मौत
इस पूरे बवाल की जड़ें अंधविश्वास और जादू-टोने (Superstition) के गंभीर आरोपों से जुड़ी हैं:
- अर्जुन की आत्महत्या: सोमवार सुबह 21 वर्षीय आदिवासी युवक अर्जुन अपने घर से लगी दुकान में फांसी के फंदे पर लटका मिला।
- छोटे भाई अरुण का अतीत: चौंकाने वाली बात यह है कि इसी वर्ष 11 फरवरी को अर्जुन के छोटे भाई अरुण ने भी अपनी ऑटो पार्ट्स की दुकान में फांसी लगाकर जान दे दी थी। अरुण की मौत के कुछ समय बाद उसकी दुकान में रहस्यमयी तरीके से आग भी लग गई थी।
- ग्रामीणों का आरोप: परिजनों और ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि गांव के ही रमेश नाम के व्यक्ति ने अरुण पर ‘जादू-टोना’ किया था, जिसके कारण उसने सुसाइड किया। पुलिस ने तब कोई ठोस एक्शन नहीं लिया, और अब उसी तंत्र-मंत्र के फेर में आकर बड़े भाई अर्जुन को भी अपनी जान गंवानी पड़ी।
शव उतारने से किया इनकार, नेशनल हाईवे पर लगाया कई घंटों का जाम
अर्जुन की मौत की खबर मिलते ही जब चैनपुर थाना प्रभारी (TI) गेहलोद सेमलिया पुलिस बल के साथ पंचनामा करने पहुंचे, तो ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया:
- शव को नहीं छूने दिया: आक्रोशित आदिवासियों ने पुलिस को शव फंदे से उतारने से साफ रोक दिया और ‘चित्तौड़गढ़-भुसावल राष्ट्रीय राजमार्ग’ (National Highway) पर चक्काजाम कर दिया। हाईवे पर घंटों गाड़ियों के पहिये थमे रहे।
पुलिस टीम पर हमला: महिलाओं ने पीटा, टीआई को घर में होना पड़ा नजरबंद
हाईवे जाम और हंगामे के बीच स्थिति तब बेकाबू हो गई जब पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की:
- जान बचाकर भागे पुलिसकर्मी: गांव की महिलाओं के एक उग्र समूह ने लाठी-डंडों से एक पुलिसकर्मी को घेरकर सरेराह पीटना शुरू कर दिया, जिससे उसे अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा।
- 4 घंटे बंधक रहे थाना प्रभारी: उग्र भीड़ ने थाना प्रभारी गेहलोद सेमलिया को भी घेर लिया। कुछ स्थानीय सूझबूझ वाले लोगों ने उन्हें भीड़ से सुरक्षित निकालकर एक मकान के भीतर बंद किया। टीआई को लगभग चार घंटे तक उसी मकान में बंधक की तरह रहना पड़ा। हालांकि, उन्होंने उसी सुरक्षित स्थान से सूझबूझ दिखाते हुए पंचनामा की कागजी कार्रवाई पूरी की और वायरलेस पर सीनियर अफसरों को बैकअप के लिए सूचना दी।
पूरा गांव बना पुलिस छावनी, भारी बल के बाद थमा चक्काजाम
मामला बिगड़ता देख निमाड़ रेंज के डीआईजी (DIG) सिद्धार्थ बहुगुणा और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) शकुंतला रुहल भारी पुलिस फोर्स के साथ दामखेड़ा पहुंचे:
- 6 थानों की फोर्स तैनात: स्थिति को काबू में करने के लिए डीआरपी लाइन खरगोन के साथ ही बड़वाह, सनावद, गोगावां, बिस्टान और भीकनगांव थानों से अतिरिक्त पुलिस बल मंगाकर पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया।
- अंतिम संस्कार संपन्न: अधिकारियों की कई घंटों की कड़ी समझाइश और कार्रवाई के आश्वासन के बाद सोमवार शाम को चक्काजाम खत्म हुआ। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया और भारी पुलिस सुरक्षा के बीच अर्जुन का अंतिम संस्कार कराया गया।
पुलिस का बयान: “जादू-टोने का आरोप कार्रवाई का आधार नहीं, पर हर पहलू की जांच जारी”
इस बेहद संवेदनशील मामले पर पुलिस के आला अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि गांव में शांति है लेकिन एहतियातन फोर्स तैनात रखी गई है:
“केवल जादू-टोने के मौखिक आरोपों को किसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का आधार नहीं बनाया जा सकता। हालांकि, 11 फरवरी को छोटे भाई अरुण की आत्महत्या के बाद एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उसने जीवन में कुछ हासिल नहीं कर पाने की हताशा (Depression) के कारण सुसाइड की बात कही थी। हम अर्जुन के मामले की भी सभी पहलुओं और तकनीकी एंगल से गहराई से जांच कर रहे हैं।”
— सिद्धार्थ बहुगुणा, डीआईजी (DIG), निमाड़ रेंज







