सतना में फिर फूटा ‘बदखर तालाब’ का दर्द: 15 वर्षीय किशोर की डूबने से मौत; 1 घंटे तक नहीं आई पुलिस, अवैध खनन और निगम की लापरवाही पर जनता का भारी आक्रोश

सतना, मध्य प्रदेश: सतना नगर निगम क्षेत्र के कोलगवां थाना अंतर्गत आने वाले बदखर परशुराम राम तालाब में महज 48 घंटे के भीतर मासूम की डूबने की यह दूसरी दर्दनाक घटना सामने आई है। सोमवार की शाम तालाब में नहाने गए एक 15 वर्षीय किशोर की गहरे पानी में समा जाने से मौत हो गई। इस हादसे ने जहां पीड़ित परिवार को उम्र भर का गम दे दिया है, वहीं जिला प्रशासन, पुलिस की लेती लतीफी और नगर निगम के दिखावटी सौंदर्यीकरण के दावों की कलई खोलकर रख दी है।

शाम 7 बजे नहाने गया था किशोर, देखते ही देखते गहरे पानी में हुआ लापता

यह रूह कंपा देने वाला वाकया सोमवार शाम करीब 7:00 बजे का है:

  • अचानक डूबा बच्चा: जानकारी के अनुसार, संतोष रजक का 15 वर्षीय पुत्र अपने कुछ दोस्तों के साथ बदखर तालाब में नहाने गया था। नहाते-नहाते वह अचानक तालाब के एक बेहद गहरे हिस्से में चला गया और देखते ही देखते पानी में लापता हो गया।
  • दोस्तों ने मचाया शोर: साथ मौजूद बच्चों के शोर मचाने पर स्थानीय लोग तुरंत मौके पर दौड़े और अपने स्तर पर किशोर को तलाशने का प्रयास किया, लेकिन पानी गहरा होने के कारण सफलता नहीं मिली।

“अगर समय पर आती पुलिस, तो बच जाती जान”— डेढ़ घंटे की देरी ने बढ़ाया आक्रोश

इस पूरी त्रासदी में पुलिस और रेस्क्यू टीम का एक बेहद संवेदनहीन चेहरा सामने आया है, जिससे स्थानीय नागरिकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया:

  • घंटों इंतजार: परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई थी, लेकिन करीब एक से डेढ़ घंटे तक न तो कोलगवां थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और न ही कोई गोताखोर दल।
  • देरी से पहुंचा अमला: जब तक काफी देर हो चुकी थी, तब कहीं जाकर पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, उनका साफ कहना है कि यदि मदद 15 मिनट पहले भी आ जाती, तो उनके लाडले की जान बचाई जा सकती थी।

48 घंटे में दूसरी मौत: शनिवार को भी डूबा था 14 साल का परमानंद

उल्लेखनीय है कि इसी बदखर तालाब में ठीक एक दिन पहले यानी शनिवार की शाम को भी ऐसी ही एक दर्दनाक घटना घटी थी। टपरिया बस्ती का रहने वाला 14 वर्षीय परमानंद (पुत्र राम बसोर) भी इसी तालाब में डूब गया था, जिसका शव करीब 6 घंटे की भारी मशक्कत के बाद बाहर निकाला जा सका था। इस घटना से सबक लेने के बजाय प्रशासन सोता रहा, जिसका खामियाजा सोमवार को दूसरे किशोर को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।

अवैध खनन और नगर निगम के ‘दिखावटी’ सौंदर्यीकरण पर उठे गंभीर सवाल

हादसे के बाद मौके पर जमा भारी भीड़ ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को घेरकर तीखे सवाल दागे:

  1. मौत के कुएं बने अवैध गड्ढे: ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बदखर तालाब में लंबे समय से धड़ल्ले से अवैध खनन (Illegal Mining) किया जा रहा है। भारी मशीनों से मिट्टी-मुरम निकालने के कारण तालाब के भीतर कई खतरनाक और जानलेवा गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिनकी गहराई का अंदाजा बच्चों को नहीं होता।
  2. दिखावे का सौंदर्यीकरण: लोगों ने नगर निगम को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि तालाब के केवल सामने वाले हिस्से को चमकाकर ‘सौंदर्यीकरण’ का ढोंग किया जा रहा है, जबकि खतरनाक और गहरे क्षेत्रों में न तो कोई सुरक्षा घेरा (Barricading) बनाया गया है और न ही कोई ‘चेतावनी बोर्ड’ लगाया गया है।

फिलहाल, एसडीआरएफ की टीम शव को तलाशने और बाहर निकालने की कार्रवाई में जुटी हुई है, लेकिन इस दोहरे हादसे ने सतना की कानून-व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

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