सतना, मध्य प्रदेश: सतना केंद्रीय कारागार (Central Jail Satna) की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को पूरी तरह तार-तार करने वाला एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। जेल के भीतर कैदियों तक कथित तौर पर गांजा, शराब और मोटी नकदी पहुंचाने से जुड़ा एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस खुलासे के बाद जेल महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल अधीक्षक (Jail Superintendent) लीना कोस्टा ने त्वरित एक्शन लेते हुए आरोपी प्रमुख मुख्य प्रहरी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है।

25 ग्राम गांजा, शराब की बोतल और ₹5000 कैश की ‘डील’
जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर शाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक स्क्रीन रिकॉर्डिंग के साथ ऑडियो तेजी से प्रसारित हुआ। इस वायरल ऑडियो ने जेल के भीतर चलने वाले काले कारनामों की पोल खोलकर रख दी है:
- राजेन्द्र चौधरी का नाम आया सामने: ऑडियो में एक अज्ञात युवक और सतना सेंट्रल जेल में पदस्थ प्रमुख मुख्य प्रहरी राजेन्द्र चौधरी के बीच हुई कथित बातचीत साफ सुनाई दे रही है।
- सामान रखवाने की बात: कॉल रिकॉर्डिंग में जेल के अंदर 25 ग्राम गांजा, विदेशी शराब की बोतल और ₹5,000 नगद पहुंचाने की पूरी सौदेबाजी (डील) का दावा किया जा रहा है। ऑडियो में कथित रूप से सामान को एक तय सुरक्षित जगह पर रखवा देने और बाद में उसे अंदर कस्टडी में लेने की बात कही जा रही है।
स्क्रीन रिकॉर्डिंग के मोबाइल नंबर ने खोला राज; जेल अधीक्षक की त्वरित कार्रवाई
ऑडियो के सोशल मीडिया पर ट्रेंड करते ही जेल प्रशासन और खुफिया विंग तुरंत एक्टिव हो गई:
- नंबर से मिला सुराग: अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि बातचीत के दौरान एक मोबाइल से सीधे कॉल की गई थी, जबकि दूसरे मोबाइल से इस पूरी बातचीत की स्क्रीन रिकॉर्डिंग की गई। वायरल वीडियो में जो मोबाइल नंबर फ्लैश हो रहा है, वह प्रमुख मुख्य प्रहरी राजेंद्र चौधरी का ही पाया गया है।
- विभागीय जांच शुरू: जेल अधीक्षक लीना कोस्टा ने मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि जेल की सुरक्षा और साख से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने राजेंद्र चौधरी को सस्पेंड कर उनके खिलाफ विस्तृत विभागीय जांच (Departmental Enquiry) के आदेश दे दिए हैं।
प्रशासन के सामने दो बड़ी चुनौतियां: कब का है ऑडियो और कितनी है सच्चाई?
जेल सूत्रों के अनुसार, इस ऑडियो के बाहर आने के बाद केंद्रीय कारागार की तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह ऑडियो किस तारीख को रिकॉर्ड किया गया था और इसमें सुनाई दे रही आवाज पूरी तरह असली है या नहीं। फॉरेंसिक और सायबर टीम इस ऑडियो की सत्यता की बारीकी से जांच कर रही है। इस दुस्साहसिक मामले ने विंध्य अंचल के जेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।







