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जबलपुर में मकान की खुदाई के दौरान मिला 15 किलो का जिंदा बम: 50 मीटर थी मारक क्षमता; दिल्ली से परमिशन के बाद सेना के जांबाजों ने किया डिफ्यूज, टला बड़ा हादसा

जबलपुर में मकान की खुदाई के दौरान मिला 15 किलो का जिंदा बम: 50 मीटर थी मारक क्षमता; दिल्ली से परमिशन के बाद सेना के जांबाजों ने किया डिफ्यूज, टला बड़ा हादसा

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The Khabrilal

Published On: Jun 2, 2026, 7:51 PM IST

Updated On: Jun 2, 2026, 7:51 PM IST

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जबलपुर, मध्य प्रदेश: संस्कारधानी जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट के समीप स्थित गधेरी गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक रिहायशी मकान के निर्माण कार्य के दौरान जमीन के भीतर से एक भारी-भरकम जिंदा बम (UXO) बरामद हुआ। करीब 15 किलोग्राम वजनी इस बम की मारक क्षमता 50 मीटर के दायरे तक थी और यह पूरी तरह से एक्टिव (सक्रिय) था। जिला प्रशासन, पुलिस और भारतीय सेना (Indian Army) के बीच चले 8 घंटे के हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन और रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) से मिली विशेष अनुमति के बाद सेना के बम निरोधक दस्ते ने इसे सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज कर एक बेहद बड़े हादसे को टाल दिया।

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पिलर की खुदाई के दौरान 4 फीट नीचे मिला ‘काल’

यह पूरी थर्रा देने वाली घटना गधेरी गांव के रहने वाले सुनील यादव के प्लॉट पर घटित हुई:

  • मजदूरों में फैली दहशत: सुनील यादव के प्लॉट पर मकान निर्माण के लिए पिलर (खंभों) की खुदाई का काम चल रहा था। खुदाई करते हुए मजदूर जब जमीन से करीब 3 से 4 फीट नीचे पहुंचे, तो उनका फावड़ा एक बेहद सख्त और संदिग्ध लोहे की वस्तु से टकराया।
  • तुरंत रोका काम: जब मिट्टी हटाई गई तो उसकी आकृति हूबहू एक बड़े बम जैसी नजर आई। बम देखते ही मजदूरों और आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। काम को तुरंत रोककर इसकी सूचना तत्काल जिला पुलिस को दी गई।

15 किलो वजन, 50 मीटर तक तबाही मचाने की क्षमता

सूचना मिलते ही पुलिस और बम डिस्पोजल स्क्वॉड (BDS) की टीम मौके पर पहुंची। शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए, उसने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए:

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  • सक्रिय अवस्था में था बम: जांच में पता चला कि यह जमीन के अंदर दबा हुआ एक UXO (Unexploded Ordnance – बिना फटा हुआ सैन्य बम) है।
  • खमरिया ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से दूरी: घटना स्थल से देश की प्रसिद्ध आयुध निर्माणी फैक्ट्री खमरिया (OFK) की दूरी महज 6 किलोमीटर है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यह बम सेना के पुराने अभ्यास या टेस्टिंग के दौरान का है, जो काफी पुराना होने के बावजूद पूरी तरह जिंदा और बेहद खतरनाक था।

दिल्ली से लेनी पड़ी परमिशन, 8 घंटे चला महा-ऑपरेशन

चूंकि बम पूरी तरह एक्टिव था और इसे हिलाना या ज्यादा देर तक रखना रिहायशी इलाके के लिए आत्मघाती साबित हो सकता था, इसलिए तुरंत सेना को इनवॉल्व किया गया:

रक्षा मंत्रालय का दखल: बम की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस और सेना के शीर्ष अधिकारियों ने तुरंत नई दिल्ली स्थित रक्षा मंत्रालय (MoD) से संपर्क साधा। वहां से त्वरित परमिशन मिलने के बाद ऑपरेशन शुरू हुआ।

बम मिलने से लेकर उसे डिफ्यूज करने तक की पूरी प्रक्रिया में करीब 8 घंटे का कड़ा वक्त लगा। सेना के जांबाज जवानों ने प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बम को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उसे पूरी तरह डिफ्यूज (निष्क्रिय) कर दिया, जिसके बाद प्रशासन और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

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