राजस्व तंत्र की बेरहमी! मऊगंज में महीनों से नामांतरण के लिए भटक रहे किसान ने गले में बांधी मवेशियों वाली रस्सी; वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

मऊगंज (हनुमना): मध्य प्रदेश के नवनिर्वाचित मऊगंज जिले से राजस्व अमले और सरकारी बाबूशाही की संवेदनहीनता को उजागर करने वाली एक बेहद शर्मनाक और हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। हनुमना तहसील कार्यालय में वारिसाना (उत्तराधिकार नामांतरण) की फाइल महीनों से दबाकर बैठे बाबुओं की कथित रिश्वतखोरी और प्रताड़ना से तंग आकर एक पीड़ित अन्नदाता ने व्यवस्था को आईना दिखाने के लिए ऐसा खौफनाक कदम उठाया, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। व्यथित किसान शुक्रवार को इंसान की तरह नहीं, बल्कि अपने गले में मवेशियों को बांधने वाला ‘पगहा’ (रस्सी) डालकर सीधे लोक सेवा केंद्र पहुंच गया। इस अनोखे और आत्मघाती विरोध ने चीख-चीखकर गवाही दी कि सरकारी दफ्तरों में किसानों को इंसान नहीं, बल्कि मवेशी समझा जा रहा है।

“बिना चढ़ावे के यहाँ कागज एक इंच नहीं खिसकता”

पीड़ित अन्नदाता ने मऊगंज के राजस्व सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपना दर्द बयां किया:

  • महीनों से काट रहा चक्कर: किसान का आरोप है कि वह अपने वैधानिक हक (उत्तराधिकार नामांतरण) के लिए पिछले कई महीनों से हनुमना तहसील के चक्कर काट-काटकर थक चुका था।
  • कथित रिश्वत की मांग: पीड़ित के मुताबिक, हर बार जब वह अपनी फाइल की स्थिति जानने बाबू के पास जाता, तो फाइल को आगे बढ़ाने के एवज में कथित रूप से मोटी ‘चढ़ावे’ (रिश्वत) की मांग की जाती थी। परेशान होकर उसने कहा, “जब जिम्मेदार हमारी सुनते ही नहीं और हमें मवेशी समझा जा रहा है, तो इंसान बनकर जीने का क्या फायदा?”

वीडियो वायरल होते ही दौड़े एसडीएम-तहसीलदार; मौके पर ही निपटाई फाइल

सोशल मीडिया पर जैसे ही गले में रस्सी बांधे किसान का यह मार्मिक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिला प्रशासन में खलबली मच गई:

  1. तत्काल हटवाई गई रस्सी: हनुमना एसडीएम और तहसीलदार भारी पुलिस बल के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले किसान को ढांढस बंधाया, समझाया-बुझाया और उसके गले से मवेशी वाली रस्सी को हटवाया।
  2. ऑन-द-स्पॉट निराकरण: मामले की गंभीरता और चौतरफा फजीहत को देखते हुए एसडीएम ने तत्काल प्रभाव से मौके पर ही किसान की वारिसाना फाइल को मंगाकर उसका वैधानिक निराकरण करने के कड़े निर्देश जारी किए।

सिस्टम का विरोधाभास: गुनाह तहसील के बाबू का, तो सजा लोक सेवा केंद्र को क्यों?

जांच की दिशा और प्रशासनिक रुख —

“इस पूरे मामले में प्रशासनिक विरोधाभास भी खुलकर सामने आ गया है। प्रथम दृष्टया जांच में यह साफ हो गया है कि असली फाइल तहसील के बाबू के पास अटकी हुई थी। इसके बावजूद, एसडीएम ने नोटिस लोक सेवा केंद्र (LSK) के संचालक को थमाने के निर्देश दिए हैं। इस विसंगति पर जब हनुमना एसडीएम राजेश मेहता से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य फाइल भले ही तहसील बाबू के पास है, लेकिन लोक सेवा केंद्र परिसर में अव्यवस्था और मॉनिटरिंग की कमी पाए जाने के कारण संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषी कर्मचारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

इस घटना ने एक बार फिर मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में नामांतरण और फौती जैसे कामों के लिए किसानों को होने वाली जमीनी प्रताड़ना को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। विंध्य अंचल के किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो मऊगंज और सतना समेत पूरे संभाग में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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