अनूपपुर में सिस्टम हुआ शर्मसार! 12 वर्षीय मासूम की मौत के बाद अधिकारियों की मौजूदगी में बाइक से ढोया गया शव; अस्पताल में बिजली-जनरेटर भी फेल

अनूपपुर: मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले से एक ऐसी विधिक व मानवीय दृष्टिकोण को झकझोर देने वाली हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था, आपातकालीन सेवाओं और प्रशासनिक दावों की विधिक पोल खोलकर रख दी है. यहाँ पानी में डूबने से एक 12 वर्षीय मासूम बालक की अकाल मौत के बाद, मौके पर कई विभागों के आला अधिकारियों की विधिक मौजूदगी के बावजूद पीड़ित परिवार को एक एंबुलेंस तक मयस्सर नहीं हो सकी. लाचार परिजनों को बालक के शव को बाइक पर बीच में दबाकर अस्पताल ले जाना पड़ा. विडंबना का अंत यहीं नहीं हुआ, जब शव अस्पताल पहुंचा तो वहां की बिजली गुल थी और जनरेटर बैकअप न होने के कारण डॉक्टरों को घने अंधेरे में ही शव का विधिक परीक्षण करना पड़ा. इस पूरी विधिक लापरवाही का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

मौके पर मौजूद था प्रशासनिक अमला, फिर भी नहीं मिली एंबुलेंस

घटनाक्रम की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक संवेदनहीनता का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:

  • तमाशाबीन बने रहे अधिकारी: जानकारी के अनुसार, 12 वर्षीय मासूम बालक पानी के गहरे तेज बहाव में डूब गया था. स्थानीय लोगों की सूचना के बाद मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उसे बाहर निकाला गया. इस दौरान प्रशासनिक गंभीरता का आलम यह था कि मौके पर एसईसीएल (SECL) प्रशासन, नगरीय निकाय, जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस सहित कई विभागों के जिम्मेदार अधिकारी विधिक रूप से मुस्तैद थे.
  • बाइक पर ले जाने की विवशता: रेस्क्यू टीम द्वारा बालक को बाहर निकालने के बाद जब अस्पताल ले जाने की विधिक बारी आई, तो तमाम दावों के विपरीत मौके पर कोई आपातकालीन एंबुलेंस या सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं कराया जा सका. अधिकारियों की आंखों के सामने ही परिजन रोते-बिलखते हुए मासूम को बाइक पर लादकर ले जाने को विधिक रूप से मजबूर हुए.

एसईसीएल क्षेत्रीय अस्पताल में पसरा था अंधेरा; डॉक्टरों ने टॉर्च की रोशनी में किया विधिक परीक्षण

अस्पताल पहुंचने पर स्वास्थ्य महकमे की एक और गंभीर तकनीकी व प्रशासनिक विफलता उजागर हुई:

  1. नो पावर बैकअप: बदहवास परिजन जब बालक को लेकर एसईसीएल (SECL) के क्षेत्रीय चिकित्सालय पहुंचे, तो वहां मुख्य बिजली सप्लाई पूरी तरह से ठप थी. करोड़ों रुपये के बजट वाले इस अस्पताल में आपातकालीन बिजली बैकअप के लिए रखा गया जनरेटर भी विधिक रूप से बंद या खराब पड़ा था.
  2. अंधेरे में औपचारिकता: अस्पताल प्रबंधन की इस घोर लापरवाही के चलते ड्यूटी पर तैनात विधिक डॉक्टरों को मोबाइल की टॉर्च और आपातकालीन कम रोशनी के बीच ही बालक के पार्थिव शरीर का विधिक व चिकित्सकीय परीक्षण करना पड़ा, जो कि विधिक नियमों और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है.

सोशल मीडिया पर फूटा जनता का आक्रोश; कलेक्टर से दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की मांग

संसाधनों की बर्बादी और जवाबदेही तय करने का यक्ष प्रश्न —

“इस पूरी विधिक और प्रशासनिक विफलता का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, वैसे ही अंचल के नागरिकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. लोग लगातार ट्वीट और पोस्ट कर सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि जिस कोयला अंचल क्षेत्र में कोल इंडिया और एसईसीएल के माध्यम से हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व और सीएसआर (CSR) फंड बुनियादी सुविधाओं के लिए आता है, वहां आपातकालीन परिस्थितियों में एक एंबुलेंस, बिजली और जनरेटर जैसी मूलभूत विधिक व्यवस्थाएं फेल क्यों हैं?

स्थानीय सामाजिक संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने अनूपपुर जिला कलेक्टर से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय विधिक जांच कराने, अस्पताल प्रबंधन का विधिक लाइसेंस निलंबित करने और मौके पर मूकदर्शक बने रहे दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर सख्त दंडात्मक विधिक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अन्य गरीब परिवार को इस तरह के विधिक व मानसिक उत्पीड़न से न गुजरना पड़े.”

Hot this week

पलक गुप्ता बनीं मिस मध्य प्रदेश 2025,मैहर जिले का नाम किया रोशन

Miss Madhya Pradesh 2025:मैहर जिले की बेटी पलक गुप्ता...

अतिथि शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम SDM को सौंपा 6 सूत्रीय मांगो का ज्ञापन

The Khabrilal : अतिथि शिक्षक संघर्ष समिति ब्लॉक रामनगर...

Customer Engagement Marketing: New Strategy for the Economy

I actually first read this as alkalizing meaning effecting...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img