शिलांग/इंदौर: देश के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल ‘हनीमून मर्डर केस’ में मुख्य आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मेघालय उच्च न्यायालय (High Court) से एक बहुत बड़ी विधिक राहत मिल गई है. हाई कोर्ट ने मेघालय राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन द्वारा दायर की गई उस विधिक याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें सोनम की जमानत रद्द (Cancel) करने की गुहार लगाई गई थी. न्यायालय के इस विधिक आदेश के बाद सोनम की जमानत पूरी तरह बरकरार रहेगी और वह जेल से बाहर ही रहेंगी. इस फैसले के आते ही मध्य प्रदेश के इंदौर में रह रहे मृतक राजा रघुवंशी के परिजनों का विधिक व मानसिक दर्द छलक पड़ा है और उन्होंने वर्तमान न्याय व्यवस्था पर गहरी विधिक नाराजगी व्यक्त की है.

सोहरा के वेई सादोंग फॉल्स की खाई में मिला था राजा का शव; प्रेमी राज सहित 5 पर आरोप
मेघालय पुलिस की फाइलों और इस सनसनीखेज हत्याकांड के विधिक घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:
- हनीमून पर रची विधिक साजिश: इंदौर निवासी राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम 21 मई 2025 को हनीमून मनाने मेघालय की राजधानी शिलांग गए थे. वहां से 26 मई को दोनों सोहरा (चेरापूंजी) घूमने निकले, जिसके बाद अचानक दोनों विधिक रूप से लापता घोषित कर दिए गए.
- गहरी खाई से बरामदगी: पुलिस, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) के महा-सर्च ऑपरेशन के बाद 2 जून 2026 को राजा का शव सोहरा के सुप्रसिद्ध वेई सादोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई से क्षत-विक्षत विधिक हालत में बरामद किया गया. जांच में सामने आया कि सोनम ने अपने कथित प्रेमी राज कुशवाहा और तीन कॉन्ट्रैक्ट किलर्स— विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी के साथ मिलकर इस विधिक हत्याकांड को अंजाम दिया था.
“अब न्याय से भरोसा डगमगाने लगा है”— शिलॉन्ग कोर्ट के बाद हाई कोर्ट के फैसले से मां उमा रघुवंशी स्तब्ध
गंभीर आपराधिक मुकदमे के बावजूद निचली अदालत (शिलॉन्ग कोर्ट) द्वारा 28 अप्रैल को दी गई जमानत को हाई कोर्ट द्वारा विधिक रूप से सही ठहराए जाने पर परिवार टूट गया है:
- अपराधियों के हौसले बढ़ेंगे: राजा की मां उमा रघुवंशी ने रोते हुए विधिक प्रतिक्रिया दी कि, “हमें उम्मीद थी कि माननीय उच्च न्यायालय पुलिस के ठोस विधिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की जमानत खारिज कर जेल भेजेगा, लेकिन इस राहत से अपराधियों का मनोबल बढ़ेगा और पीड़ित परिवारों का कानून से विश्वास उठ जाएगा.”
- सिया हत्याकांड का जिक्र: उन्होंने महाराष्ट्र के चर्चित सिया मर्डर केस का विधिक उदाहरण देते हुए आशंका जताई कि यदि ऐसे जघन्य मामलों में भी आरोपियों को इतनी जल्दी विधिक राहत मिलती रही, तो समाज में न्याय की विधिक परिकल्पना ही समाप्त हो जाएगी.
फास्ट ट्रैक कोर्ट की विधिक मांग; मुख्यमंत्री मोहन यादव से गुहार लगाएंगे पिता अशोक रघुवंशी
डीजीपी इदाशिशा नोंगरांग की विधिक दलील और पिता का संकल्प —
“इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस को लेकर मेघालय की पुलिस महानिदेशक (DGP) इदाशिशा नोंगरांग ने पहले ही स्पष्ट किया था कि पुलिस के पास आरोपियों के खिलाफ पुख्ता फॉरेंसिक और डिजिटल विधिक साक्ष्य मौजूद हैं, जिसके आधार पर ही जमानत को चुनौती दी गई थी.
दूसरी ओर, मृतक के पिता अशोक रघुवंशी ने फैसले पर विधिक आक्रोश जताते हुए कहा कि वे इस विधिक अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे. उन्होंने ऐलान किया है कि वे जल्द ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से विधिक मुलाकात करेंगे. पिता की मांग है कि जिस प्रकार महाराष्ट्र सरकार ने गंभीर केसों को फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में चलाने का विधिक निर्णय लिया है, ठीक उसी तरह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी मेघालय के मुख्यमंत्री से सीधे विधिक संवाद स्थापित कर इस मामले की दैनिक सुनवाई सुनिश्चित करवाएं ताकि उनके दिवंगत बेटे की आत्मा को विधिक और सच्चा न्याय मिल सके.”







