सतना/मझगवां: शासकीय कार्य के दौरान फिल्मी अंदाज में लाइसेंसी बंदूक चमकाने के आरोप में सस्पेंड हुए मझगवां जनपद के उपयंत्री (Sub Engineer) सतीश समेले ने अब प्रशासनिक अमले के खिलाफ एक बेहद आक्रामक और सनसनीखेज मोर्चा खोल दिया है। निलंबन की विधिक कार्रवाई से भड़के उपयंत्री ने पूरे सरकारी तंत्र को कटघरे में खड़ा करते हुए पंचायत से लेकर मंत्रालय (वल्लभ भवन) तक फैले भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के कथित नेटवर्क की कड़ियाँ सार्वजनिक कर दी हैं। समेले ने उन पर कार्रवाई करने वाले जिला पंचायत सीईओ (CEO) पर सीधे उगाही के गंभीर आरोप लगाते हुए पूरी व्यवस्था की विधिक पोल खोल दी है, जिससे विंध्य अंचल के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

२० साल पुरानी दुश्मनी के कारण बंदूक; हिरौंदी की सुनसान पुलिया का था वो वीडियो
सस्पेंड उपयंत्री ने मीडिया के समक्ष अपने विलेख बयान में आरोपों की कड़ियाँ इस प्रकार जोड़ी हैं:
- सुरक्षा के लिए शस्त्र का विलेख: सतीश समेले ने स्पष्ट किया कि वे कोई दिखावा नहीं कर रहे थे। उन्होंने वर्ष २००५-०६ में तत्कालीन कलेक्टर से विधिक शस्त्र लाइसेंस लिया था। उनके और उनके परिवार के कई दुश्मन हैं, जिससे जान-माल का लगातार खतरा रहता है। जिस साइट (मझगवां के हिरौंदी के पास पुलिया) का वीडियो वायरल हुआ है, वह बेहद सुनसान इलाका था, इसलिए वे आत्मरक्षार्थ बंदूक साथ ले गए थे।
- सीईओ पर चंदा वसूली का आरोप: उपयंत्री ने सीधे जिला पंचायत सीईओ पर वार करते हुए दावा किया कि वे स्वयं पंचायतों से रोजाना १० से २० हजार रुपये की विधिक व प्रशासनिक धमकी देकर चंदा वसूली करवाते हैं।
“कोई माई का लाल यह नहीं कह सकता कि वह ईमानदार है” — उपयंत्री ने सार्वजनिक किया कमीशन का पूरा स्लैब
प्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए उपयंत्री ने हर स्तर पर होने वाले कथित वित्तीय वितरण के विलेखों को मीडिया के सामने रख दिया:
- कमीशन का कथित डिस्ट्रीब्यूशन स्लैब: समेले के अनुसार, व्यवस्था में कड़ियाँ नीचे से ऊपर तक जुड़ी हैं— १०% सरपंच, ५% सचिव, ३% रोजगार सहायक, ५% उपयंत्री (सब इंजीनियर), २ से ३% असिस्टेंट इंजीनियर और ३% जनपद सीईओ तक जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले या कमिश्नर कार्यालय से आने वाले हर निरीक्षण दल के लिए अगले दिन ‘सूटकेस’ की तैयारी का सीक्वेंस तय रहता है।
- संविदा वृद्धि का विलेख खेल: उन्होंने आगे आरोप लगाया कि हर संविदा सब इंजीनियर की सेवा अवधि (संविदा वृद्धि) बढ़ाने के एवज में प्रतिवर्ष ₹४०,००० की अवैध राशि वसूली जाती है, जिसमें पूरा तंत्र संलिप्त है।
अपर कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह ने विधिक बयानों पर साधी चुप्पी
प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी वैधानिक जांच की कड़ियाँ —
“उपयंत्री के इस अभूतपूर्व और विस्फोटक खुलासे पर अपर कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह ने बेहद नपा-तुला विधिक स्टैंड लिया है. उन्होंने कहा कि उपयंत्री के खिलाफ केवल कार्यस्थल पर शस्त्र ले जाने को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है, उनके बयानों को मैंने अभी सुना नहीं है और वर्तमान में मैं इस पर कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हूँ.
कलेक्टर कार्यालय की विंग के अनुसार, उपयंत्री द्वारा खुलेआम लगाए गए इन आरोपों के बाद अब इस पूरे मामले की विधिक और तकनीकी कड़ियों को खंगाला जाएगा। एक तरफ उपयंत्री के वित्तीय रिकॉर्ड्स की जांच चल रही है, तो दूसरी तरफ उनके द्वारा व्यवस्था पर लगाए गए इन दागों से सरकार की किरकिरी होना तय माना जा रहा है।”







