सतना रेलवे स्टेशन पर शर्मसार हुई इंसानियत, एम्बुलेंस मिली न डॉक्टर: पहचान पत्र न होने पर तमाशाबीन बना रहा रेल प्रशासन; प्रतीक्षालय में तड़पती रही गरीब प्रसूता, महिला यात्रियों ने कराया सुरक्षित प्रसव


सतना: डिजिटल इंडिया और सुगम स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच सतना रेलवे स्टेशन से व्यवस्था और संवेदनशीलता को पूरी तरह कटघरे में खड़ा करने वाला एक बेहद विचलित और गंभीर विधिक मामला सामने आया है। शनिवार तड़के एक गरीब गर्भवती महिला घंटों प्रसव पीड़ा से तड़पती रही, लेकिन विधिक पहचान पत्र (दस्तावेजों) के अभाव और गरीबी के कारण न तो रेलवे प्रशासन पसीजा और न ही समय पर जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस सेवा नसीब हो सकी। अंततः स्टेशन परिसर के टिकट काउंटर के समीप ही महिला को शिशु को जन्म देना पड़ा। इस हृदयविदारक घटना ने अंचल की आपातकालीन स्वास्थ्य विंग और स्टेशन प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है।


तड़के 4:22 बजे शुरू हुई थी पीड़ा; रोज मांगकर खाने वाली खुशबू बनी शिकार

सतना रेलवे स्टेशन के प्रतीक्षालय और चश्मदीदों से प्राप्त प्राथमिक इनपुट के अनुसार, इस अमानवीय घटनाक्रम की मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • दस्तावेजों की भेंट चढ़ी संवेदनशीलता: पीड़ित महिला की पहचान खुशबू के रूप में हुई है, जो रोज मांगकर अपना जीवन बसर करती है। शनिवार तड़के करीब 4:22 बजे जब वह यात्री प्रतीक्षालय में अकेली थी, उसे असहनीय प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। उसके पास कोई विधिक दस्तावेज (पहचान पत्र) न होने के कारण स्टेशन स्टाफ मूकदर्शक बना रहा।
  • अस्पताल ले जाने के एवज में मांगे पैसे: वहां मौजूद अन्य प्रबुद्ध महिला यात्रियों ने जब प्रसूता की हालत देखी, तो तुरंत आपातकालीन एम्बुलेंस और जननी एक्सप्रेस को फोन किया। महिला यात्रियों का आरोप है कि कॉल के बावजूद काफी देर तक कोई वाहन मौके पर नहीं पहुंचा। उल्टा, प्रसूता को जिला अस्पताल शिफ्ट करने के एवज में विधिक नियमों को ताक पर रखकर रुपयों की मांग किए जाने की बात भी सामने आ रही है।

टिकट काउंटर के सामने गूंजी नवजात की किलकारी; तमाशाबीन भीड़ के बीच देवदूत बनीं महिला यात्री

एक घंटे से अधिक समय तक बिना किसी चिकित्सकीय सहारे के तड़पने के बाद व्यवस्था की विधिक कड़ियाँ पूरी तरह फेल हो गईं:

  1. काउंटर के पास हुआ प्रसव: जब दर्द बर्दाश्त से बाहर हो गया, तो महिला ने टिकट काउंटर के ठीक सामने एक नवजात शिशु को जन्म दिया। इस दौरान स्टेशन पर मौजूद आम लोग और पुरुष यात्री केवल मूकदर्शक और तमाशाबीन बने रहे, जो सामाजिक चेतना पर बड़ा सवाल है।
  2. यात्रियों के साहस से बची जान: विपरीत परिस्थितियों में वहां मौजूद कुछ अन्य महिला यात्रियों ने अदम्य साहस और मानवीय कड़ियों का परिचय दिया। उन्होंने स्वयं आगे बढ़कर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कराया और मां व नवजात की विधिक देखभाल की। इसके बाद दोनों को उपचार उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए।

रेलवे और स्वास्थ्य विभाग की विंग में मचा हड़कंप, कलेक्ट्रेट ले सकता है विधिक संज्ञान

प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी वैधानिक जांच की कड़ियाँ —
“सतना के सामाजिक संगठनों ने इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा है कि किसी आपात स्थिति में मरीज से विधिक पहचान पत्र या पैसों की मांग करना मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है.
जिला अस्पताल और कलेक्ट्रेट की स्वास्थ्य विंग ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जननी एक्सप्रेस के नोडल अधिकारी से जवाब तलब करने की बात कही है. वहीं रेलवे कप्तानी और स्टेशन प्रबंधक कार्यालय द्वारा भी यह जांच कराई जा रही है कि आपातकालीन स्थिति में ऑन-ड्यूटी स्टाफ ने तुरंत स्थानीय एम्बुलेंस या डॉक्टर कड़ियों को सक्रिय क्यों नहीं किया।”

Hot this week

पलक गुप्ता बनीं मिस मध्य प्रदेश 2025,मैहर जिले का नाम किया रोशन

Miss Madhya Pradesh 2025:मैहर जिले की बेटी पलक गुप्ता...

अतिथि शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम SDM को सौंपा 6 सूत्रीय मांगो का ज्ञापन

The Khabrilal : अतिथि शिक्षक संघर्ष समिति ब्लॉक रामनगर...

Customer Engagement Marketing: New Strategy for the Economy

I actually first read this as alkalizing meaning effecting...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img