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मऊगंज में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का महा-आक्रोश, कलेक्ट्रेट का किया घेराव: ‘काला दिवस’ मनाकर सरकार को दिया अल्टीमेटम— ‘हमें ग्रेड-३ सरकारी कर्मचारी का दर्जा और ₹41,000 मानदेय दे सरकार’

मऊगंज में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का महा-आक्रोश, कलेक्ट्रेट का किया घेराव: ‘काला दिवस’ मनाकर सरकार को दिया अल्टीमेटम— ‘हमें ग्रेड-३ सरकारी कर्मचारी का दर्जा और ₹41,000 मानदेय दे सरकार’

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The Khabrilal

Published On: Jul 10, 2026, 7:50 PM IST

Updated On: Jul 10, 2026, 7:50 PM IST

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मऊगंज: मध्य प्रदेश के नवनिर्मित जिले मऊगंज में महिला सशक्तिकरण और सरकारी वादों की जमीनी हकीकत को बयां करती एक बेहद बड़ी और तीखी विधिक संगठनात्मक हलचल सामने आई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन मध्यप्रदेश के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को मऊगंज की सड़कें नारंगी साड़ियों और नारों से गूंज उठीं। कार्यक्षेत्र में लगातार बढ़ते काम के दबाव और साल २०१८ के बाद से मानदेय में एक रुपये की भी बढ़ोतरी न होने से आक्रोशित सैकड़ों कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव कर ‘काला दिवस’ मनाया। प्रदर्शनकारियों ने देश के प्रधानमंत्री और सूबे के मुख्यमंत्री के नाम एक कड़ा विधिक मांग पत्र (ज्ञापन) जिला प्रशासन को सौंपा।

साधना त्रिपाठी के नेतृत्व में उमड़ा सैलाब; डिप्टी कलेक्टर रश्मि चतुर्वेदी को सौंपा विधिक विलेख

मऊगंज जिला मुख्यालय पर हुए इस ऐतिहासिक महिला प्रदर्शन की मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • शीर्ष विंग ने संभाली कमान: यूनियन की जिला अध्यक्ष साधना त्रिपाठी के कुशल नेतृत्व में निकले इस विशाल आक्रोश मार्च में उपाध्यक्ष अर्चना द्विवेदी, सविता द्विवेदी, विभा मिश्रा, स्नेहलता मिश्रा और मनोरमा चौरसिया सहित हनुमना, नईगड़ी और मऊगंज ब्लॉकों की सैकड़ों महिलाएं शामिल रहीं। कलेक्ट्रेट विंग की ओर से डिप्टी कलेक्टर रश्मि चतुर्वेदी ने धरना स्थल पर पहुंचकर विधिक रूप से ज्ञापन लिया।
  • श्रम कानूनों का हवाला: यूनियन ने साफ किया कि संविधान के अनुच्छेदों और श्रम कानूनों के अंतर्गत न्यूनतम वेतन के सिद्धांत को ताक पर रख दिया गया है। वर्ष २०१८ के बाद से महंगाई आसमान छू रही है, लेकिन आंगनबाड़ी विंग के वित्तीय अधिकारों की कड़ियाँ पूरी तरह फ्रीज हैं।

क्या हैं आंगनबाड़ी एकता यूनियन की प्रमुख विधिक मांगें? ₹41 हजार मानदेय से लेकर पेंशन तक का पूरा ब्लूप्रिंट

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित विधिक और व्यावहारिक सुधारों की कड़ियाँ रखी हैं:

  1. नियमितीकरण और ग्रेडिंग विलेख: कार्यकर्ताओं को शासकीय सेवा के ग्रेड-३ तथा सहायिकाओं को ग्रेड-४ के अंतर्गत शामिल कर पूर्ण सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। जब तक नियमितीकरण की विधिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक कार्यकर्ताओं को ₹41,000 और सहायिकाओं को ₹35,000 प्रतिमाह का सम्मानजनक मानदेय दिया जाए।
  2. पेंशन और ग्रेच्युटी (सर्वोच्च न्यायालय का आदेश): सेवानिवृत्ति के बाद जीवन सुरक्षा के लिए ₹18,000 मासिक पेंशन की व्यवस्था हो। माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के ऐतिहासिक आदेशों का अनुपालन करते हुए तत्काल प्रभाव से ग्रेच्युटी विलेख लागू किया जाए।
  3. डिजिटल बंदिशों से मुक्ति: ऐप में आने वाली तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए ‘फेस रिकग्निशन सिस्टम’ (चेहरा पहचान प्रणाली) और ई-केवाईसी (e-KYC) की अनिवार्यता को तुरंत समाप्त किया जाए। शासन स्वयं सभी को हाई-टेक टैबलेट और इंटरनेट डेटा की विधिक सुविधा मुहैया कराए।

“गैर-आईसीडीएस कार्यों से प्रभावित हो रहा है बच्चों का कुपोषण सर्वे” — बीएलओ ड्यूटी का कड़ा विरोध

प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी वैधानिक आंदोलन की कड़ियाँ —

“यूनियन की जिला अध्यक्ष साधना त्रिपाठी ने कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि आंगनबाड़ी केंद्रों के मूल विलेखों (०-६ वर्ष के बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं की देखभाल) को दरकिनार कर उन पर जबरन बीएलओ (BLO) ड्यूटी, चुनाव सर्वे और जनगणना जैसी गैर-विभागीय कड़ियाँ थोपी जा रही हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

इसके अलावा केंद्रों में स्वच्छ पेयजल, रसोई गैस और खिलौनों की नियमित विधिक आपूर्ति की मांग की गई है। कार्यकर्ताओं ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर कलेक्ट्रेट विंग और भोपाल सचिवालय से सकारात्मक विलेख जारी नहीं हुआ, तो पूरे मध्यप्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला जड़कर उग्र चक्काजाम आंदोलन किया जाएगा।”

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