एमपी का अमरनाथ! लाठी के सहारे दुर्गम और जोखिम भरे रास्तों पर 22 किमी पैदल चले कलेक्टर सोमेश मिश्रा; तब जाकर पहुंचे ‘नागलोक’ गुफा

नर्मदापुरम: मध्य प्रदेश के अमरनाथ के रूप में विख्यात और सतपुड़ा के घने जंगलों व ऊंचे पहाड़ों के बीच स्थित ‘नागद्वारी गुफा’ की प्रसिद्ध वार्षिक यात्रा को लेकर प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। आगामी अगस्त 2026 में शुरू होने जा रही इस बेहद कठिन और जोखिम भरी धार्मिक यात्रा की जमीनी हकीकत और तैयारियों को परखने के लिए नर्मदापुरम के कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने एक अनूठी मिसाल पेश की है। कलेक्टर किसी लग्जरी गाड़ी या तामझाम के बिना, हाथ में लाठी टेककर खुद अधिकारियों के दल-बल के साथ 22 किलोमीटर लंबे दुर्गम ट्रैकिंग मार्ग पर पैदल निकल पड़े। उन्होंने नागलोक (नागद्वारी मंदिर) तक पहुंचकर श्रद्धालुओं के लिए की जा रही मूलभूत व्यवस्थाओं का चप्पे-चप्पे पर जायजा लिया।

जलगली से स्वर्गद्वार तक किया सघन निरीक्षण

टाइगर रिजर्व क्षेत्र के भीतर आने वाले इस बेहद संकरे और खतरनाक पहाड़ी रास्तों पर कलेक्टर ने प्रशासनिक अमले के साथ पैदल भ्रमण किया:

  • इन महत्वपूर्ण स्थलों को परखा: निरीक्षण के दौरान कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने कड़े पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए जलगली, नागफनी, कालाझाड़, चिंतामन, चित्रशाला, स्वर्गद्वार, पश्चिमद्वार, मुख्य नागद्वारी मंदिर और काजरी सहित मेले के सभी संवेदनशील पड़ावों का सघन मुआयना किया।
  • समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश: उन्होंने मौके पर मौजूद लोक निर्माण विभाग, वन विभाग और बिजली कंपनी के अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि बारिश के मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम-सुरक्षित बनाने के लिए ट्रैकिंग मार्गों का समय रहते तत्काल सुधार कर लिया जाए।

सिर्फ 10 दिनों के लिए खुलता है यह रहस्यमयी ‘नागलोक’

नागद्वारी की यह रहस्यमयी और अलौकिक यात्रा साल में सिर्फ एक बार आयोजित होती है, जिसकी धार्मिक मान्यताएं बेहद खास हैं:

  1. साल में सिर्फ एक बार मौका: चूंकि यह पूरा गलियारा और गुफा क्षेत्र सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) के कोर एरिया के अंतर्गत आता है, इसलिए सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के लिहाज से इसे आम जनता के लिए प्रतिबंधित रखा जाता है। साल में केवल एक बार नागपंचमी पर्व से ठीक 10 दिन पहले इस रूट को खोला जाता है।
  2. सांपों से होता है सामना: 10 दिनों तक चलने वाली इस अमरनाथ जैसी कठिन यात्रा में श्रद्धालुओं का सामना घने जंगलों के बीच साक्षात जहरीले सांपों से भी होता है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव ने अपने गले का नाग यहीं छोड़ा था, जिसके बाद से यह पवित्र स्थान ‘पद्मशेष नागदेवता’ का स्थाई आवास बन गया।

पेयजल, स्वास्थ्य और संचार व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का ‘कड़ा अल्टीमेटम’

कलेक्टर सोमेश मिश्रा का आधिकारिक बयान —

“नागद्वारी मेला न केवल मध्य प्रदेश बल्कि महाराष्ट्र सहित देश के कई अन्य राज्यों के लाखों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है। इसलिए सभी संबंधित विभागों की यह सामूहिक नैतिक जिम्मेदारी है कि वे आपसी समन्वय (Coordination) के साथ काम करें। मेला क्षेत्र में शुद्ध पेयजल, अस्थाई स्वास्थ्य शिविर, आकस्मिक आपदा प्रबंधन, सुदृढ़ सुरक्षा घेरा, बिजली और जंगलों में वायरलेस संचार व्यवस्था को पूरी तरह मुस्तैद रखा जाए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।”

कलेक्टर के इस साहसिक कदम और पैदल मॉनिटरिंग की वीडियो तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब सराहना बटोर रही हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि शीर्ष अधिकारी खुद जमीन पर उतरकर व्यवस्थाएं देख रहे हैं, तो निश्चित रूप से इस बार की नागद्वारी यात्रा पूर्व के वर्षों से अधिक सुरक्षित और सुगम होगी।

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