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पढ़ाई के बाद नहीं मिली नौकरी तो गांव में ही खड़ा किया नर्सरी का बिजनेस; सीमित संसाधनों से शुरू कर अब हर महीने ₹3 लाख तक कमा रहे दो सगे भाई

पढ़ाई के बाद नहीं मिली नौकरी तो गांव में ही खड़ा किया नर्सरी का बिजनेस; सीमित संसाधनों से शुरू कर अब हर महीने ₹3 लाख तक कमा रहे दो सगे भाई

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The Khabrilal

Published On: Jun 21, 2026, 8:54 AM IST

Updated On: Jun 21, 2026, 8:54 AM IST

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भोपाल (रतुआ रतनपुर): मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे एक छोटे से गांव के दो सगे भाइयों ने देश के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं और किसानों के सामने आत्मनिर्भरता की एक अद्भुत मिसाल पेश की है। ग्रेजुएशन (B.Sc) की पढ़ाई पूरी करने के बाद शहर की भागदौड़ और नौकरी के पीछे भागने के बजाय, इन दोनों भाइयों ने अपने पैतृक गांव में आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाया। शुरुआती संघर्षों और सीमित संसाधनों के बावजूद, आज दोनों भाई मिलकर अपनी हाईटेक नर्सरी से तमाम खर्च काटकर हर महीने ढाई से तीन लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। उनकी इस बड़ी कामयाबी ने न केवल उनके परिवार की तकदीर बदली है, बल्कि गांव के ही 15 से 20 स्थानीय लोगों को स्थाई रोजगार भी मुहैया कराया है।

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मात्र 10 हजार पौधों से सफर शुरू, आज 15 लाख का प्रोडक्शन

भोपाल जिले के रतुआ रतनपुर गांव के रहने वाले किसान पुत्र हेमंत कुशवाह और ओम कुशवाह की यह सफलता की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है:

  • शुरुआती छोटा कदम: दोनों भाइयों ने वर्ष 2018 में अपने खेत के एक छोटे से हिस्से यानी मात्र 2,000 वर्ग फीट क्षेत्रफल में एक साधारण पॉलीहाउस बनाकर सफर की शुरुआत की थी। तब उनके पास केवल 10 हजार पौधे थे।
  • आज का विशाल साम्राज्य: अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर आज इन दोनों भाइयों की नर्सरी लगभग 2 एकड़ के विस्तृत क्षेत्रफल में फैल चुकी है, जहाँ 4 हजार वर्गमीटर के इलाके में दो विशाल आधुनिक पॉलीहाउस (Polyhouse) स्थापित हैं। यहाँ अब हर महीने लगभग 15 लाख उच्च गुणवत्ता वाले पौधों का बंपर उत्पादन किया जा रहा है।

सरकारी योजना का मिला सहारा: ₹45 लाख का लोन लेकर किया बिजनेस का विस्तार

कुशवाह भाइयों को यह मुकाम रातों-रात नहीं मिला है, बल्कि इसके पीछे एक सही विजन और सरकारी योजनाओं का बेहतरीन तालमेल रहा है:

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  1. अधिकारियों से मिली ट्रेनिंग: साल 2017-18 में दोनों भाई मध्य प्रदेश शासन के कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के संपर्क में आए। विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने उन्नत कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक नर्सरी प्रबंधन और आधुनिक उत्पादन प्रणालियों की बकायदा प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली।
  2. राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की मदद: बिज़नेस को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए वर्ष 2024 में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की एमआईडीएच (MIDH) योजना के तहत करीब 45 लाख रुपये का सरकारी ऋण (Loan) प्राप्त किया। इस राशि से उन्होंने अपनी नर्सरी में ड्रिप इरिगेशन और फॉगर्स जैसी अत्याधुनिक मशीनें लगाईं।

सब्जियों और फूलों के हाइब्रिड पौधों की 5 राज्यों में भारी डिमांड

बिज़नेस मॉडल और किसानों को फायदा —

“ओम कुशवाह बताते हैं कि वे वर्तमान में बैंगन, टमाटर, मिर्च, गिलकी, लौकी और खीरा जैसी सब्जियों के शत-प्रतिशत हाईब्रिड पौधे तैयार कर रहे हैं। इसके लिए वे सेमिनिस, फेजेंटा और अंकुर बीएनआर जैसी वैश्विक स्तर की उन्नत किस्मों के बीजों का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा नर्सरी में गुलाब, जरबेरा, गेंदा और नौरंगा जैसे कमर्शियल फूलों की पौध भी तैयार होती है। आज इनके तैयार किए गए पौधे मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र के प्रगतिशील किसानों तक सप्लाई हो रहे हैं।”

पानी का संकट झेला, खुद कुआं खोदकर खड़ी की 8 एकड़ सिंचित भूमि

शुरुआती दिनों में इस बिजनेस में पानी की भीषण किल्लत सबसे बड़ा रोड़ा बनी थी, लेकिन भाइयों ने हार मानने की बजाय खुद कुआं खोदकर जल स्रोत विकसित किया। आज उनकी 8 एकड़ की कृषि भूमि पूरी तरह से सिंचित हो चुकी है। हाल ही में भोपाल संभाग के आयुक्त (Commissioner) संजीव सिंह ने खुद रतुआ रतनपुर गांव पहुंचकर इस हाईटेक नर्सरी का अवलोकन किया और दोनों युवा भाइयों की पीठ थपथपाई।

दोनों भाइयों ने साबित कर दिया है कि अगर युवा लीक से हटकर सोचें और सरकारी सबसिडी व आधुनिक विज्ञान का सही इस्तेमाल करें, तो खेती-किसानी को देश का सबसे मुनाफेदार स्टार्टअप (Startup) बनाया जा सकता है।

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