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एमपी पुलिस महकमे में महा-हड़कंप: फर्जी ड्रग्स केस में 2 थाना प्रभारियों समेत 90 पुलिसवालों पर FIR दर्ज करने के आदेश; राजस्थान की चौमहला कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

एमपी पुलिस महकमे में महा-हड़कंप: फर्जी ड्रग्स केस में 2 थाना प्रभारियों समेत 90 पुलिसवालों पर FIR दर्ज करने के आदेश; राजस्थान की चौमहला कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

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The Khabrilal

Published On: Jun 15, 2026, 8:28 PM IST

Updated On: Jun 15, 2026, 8:28 PM IST

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आगर मालवा/झालावाड़: मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा से सटे इलाकों में कानून के रखवालों पर ही कानून का सबसे बड़ा चाबुक चला है। मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में जनवरी महीने में हुई एक बहुचर्चित एनडीपीएस (NDPS – ड्रग्स बरामदगी) की बड़ी कार्रवाई अब खुद पुलिस के लिए ही गले की फांस बन गई है। राजस्थान के झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट ने आगर मालवा पुलिस की इस रेड को पूरी तरह संदिग्ध, प्रक्रिया के खिलाफ और फर्जी मानते हुए 2 थाना प्रभारी (TI) सहित करीब 90 पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने का ऐतिहासिक और सख्त आदेश दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद डग थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है, जिसने मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।

करोड़ों की ‘फर्जी’ एमडी ड्रग्स बरामदगी का पूरा सच

अदालती दस्तावेजों और वकीलों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे हाई-वोल्टेज मामले का घटनाक्रम और पुलिस की थ्योरी इस प्रकार है:

  • 28 जनवरी 2026 का छापा: आगर मालवा की कोतवाली पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने राजस्थान के झालावाड़ जिले के घाटाखेड़ी गांव में एक गुप्त गोदाम पर छापा मारा है। पुलिस ने मौके से करोड़ों रुपये की एमडी (MD) ड्रग्स, नशीला केमिकल और ड्रग्स बनाने की मशीनरी जब्त करने के साथ दो लोगों को जेल भेजा था।
  • परिजनों ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा: गिरफ्तार आरोपियों के परिजनों ने इस पूरी कार्रवाई को मनगढ़ंत और साजिश बताते हुए अदालत की शरण ली। परिजनों का आरोप था कि पुलिस ने साठगांठ कर उनके निर्दोष भाइयों को झूठे केस में फंसाया है।

बैटरी खत्म होने का अजीब बहाना; जांच में खुलीं पुलिस की गंभीर खामियां

चौमहला कोर्ट ने जब इस पूरे मामले की अंदरूनी जांच कराई, तो आगर मालवा पुलिस की बड़ी लापरवाही और नियम विरुद्ध की गई कार्रवाई की परतें खुलती चली गईं:

  1. लोकल पुलिस को नहीं दी सूचना: नियमों के मुताबिक, जब एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य की सीमा में रेड करती है, तो स्थानीय थाने में ‘आमद-रवानगी’ (आधिकारिक एंट्री) दर्ज कराना अनिवार्य है, जो एमपी पुलिस ने नहीं किया।
  2. वीडियो रिकॉर्डिंग गायब: ड्रग्स की जब्ती के समय पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराना कानूनी रूप से जरूरी है, लेकिन पुलिस के पास इस रेड का कोई वीडियो साक्ष्य नहीं था।
  3. 90 पुलिसवालों के मोबाइल बंद?: स्थानीय पुलिस को समय पर सूचना न देने के पीछे एमपी पुलिस ने कोर्ट में तर्क दिया कि “मौके पर पुलिसकर्मियों के मोबाइल की बैटरी खत्म हो गई थी।” कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जब 90 पुलिसकर्मी साथ थे, तो सभी के फोन एक साथ बंद होना नामुमकिन और बेहद संदिग्ध है।

डग थाने में दर्ज हुआ मुकदमा; ऊपरी अदालत जाने की तैयारी में पुलिस

दोनों पक्षों की कानूनी प्रतिक्रिया —

“फरियादी पक्ष के वरिष्ठ वकील असगर अली ने इस आदेश को ‘न्याय की जीत’ बताया है। उन्होंने कहा कि वर्दी की आड़ में बेगुनाहों को फंसाने वाले अधिकारियों को कोर्ट ने सही सबक सिखाया है। दूसरी ओर, इस मामले में नामजद हुईं कोतवाली आगर की थाना प्रभारी शशि उपाध्याय का कहना है कि पुलिस ने पूरी ईमानदारी से ड्रग्स माफिया के खिलाफ कार्रवाई की थी और वे इस आदेश के खिलाफ ऊपरी अदालत (हाईकोर्ट) में अपील दायर करेंगी।”

इन नामजद अधिकारियों समेत 90 पर गिरी गाज:

राजस्थान कोर्ट के आदेश के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत डग थाने में जिन मुख्य पुलिस अधिकारियों को नामजद किया गया है, उनमें शामिल हैं:

  • शशि उपाध्याय (थाना प्रभारी, कोतवाली आगर)
  • रूपसिंह राजपूत (थाना प्रभारी, बड़ौद)
  • राखी गुर्जर (उप निरीक्षक / SI)
  • अजय जाट (सहायक उप निरीक्षक / ASI)
  • राहुल विश्वकर्मा व शुभम (आरक्षक/पुलिसकर्मी)

इसके अलावा कार्रवाई की टीम में शामिल रहे करीब 80 से 90 अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों को भी इस एफआईआर में सह-आरोपी बनाया गया है। राजस्थान पुलिस अब इस मामले की आगे की विवेचना कर रही है।

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