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Dewas कांड के बाद एक्शन मोड में मोहन सरकार माफिया के नेटवर्क पर चलेगा बुलडोजर

Dewas कांड के बाद एक्शन मोड में मोहन सरकार माफिया के नेटवर्क पर चलेगा बुलडोजर

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महफूज खान

Published On: Nov 4, 2026, 7:45 AM IST

Updated On: Nov 4, 2026, 7:45 AM IST

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भोपाल: Dewas में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस अधिकारी की मौत के मामले को मध्यप्रदेश सरकार ने गंभीरता से लिया है। घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में अवैध शराब, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराधों के खिलाफ अब व्यापक और निर्णायक अभियान चलाया जाएगा। सरकार ने न केवल देवास शराब कांड में शामिल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है, बल्कि पांच जिलों में फैले अवैध शराब कारोबार के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री निवास पर मंगलवार को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध शराब के कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाए। उन्होंने कहा कि इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। बैठक में प्रदेश में ड्रग्स माफिया, अवैध शराब कारोबार और संगठित अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस रणनीति तैयार की गई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पांच जिलों में सक्रिय अवैध शराब कारोबारियों, उनके सहयोगियों, परिवहनकर्ताओं और संरक्षण देने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि कार्रवाई केवल छोटे कारोबारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए पुलिस, आबकारी विभाग और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।

2029 तक ड्रग्स माफिया के खिलाफ निर्णायक अभियान का लक्ष्य

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2029 तक देश में ड्रग्स माफिया के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का संकल्प व्यक्त किया है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश में भी प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए मजबूत तंत्र विकसित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्रग्स का अवैध कारोबार केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि यह युवा पीढ़ी और समाज के भविष्य के लिए भी गंभीर खतरा है। मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े अपराधी संगठित तरीके से अपना नेटवर्क संचालित करते हैं। ऐसे में इनके खिलाफ कार्रवाई भी योजनाबद्ध और व्यापक होनी चाहिए। पुलिस को आधुनिक संसाधन, तकनीकी सहायता और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि अपराधियों के आर्थिक और आपराधिक नेटवर्क को प्रभावी ढंग से तोड़ा जा सके।

उन्होंने प्रदेश में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने दृढ़ इच्छाशक्ति और बेहतर रणनीति के दम पर नक्सलवाद के खिलाफ सफलता हासिल की है। निर्धारित समय-सीमा में नक्सलवाद से मुक्ति पाने की दिशा में मिली उपलब्धि यह साबित करती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और प्रशासनिक समन्वय से बड़े लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। इसी प्रकार ड्रग्स माफिया और संगठित अपराधों के खिलाफ भी निर्णायक परिणाम हासिल किए जाएंगे।

पूरे प्रदेश में एक साथ होगी अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई

Dewas शराब कांड के बाद सरकार ने अवैध शराब के परिवहन भंडारण और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने की रणनीति तैयार की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ विशेष अभियान चलाया जाए। इस अभियान के तहत अवैध शराब बनाने वाले ठिकानों, गोदामों, परिवहन मार्गों और वितरण नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का मानना है कि अवैध शराब का कारोबार केवल स्थानीय स्तर पर संचालित नहीं होता, बल्कि इसके पीछे कई जिलों में फैला संगठित नेटवर्क काम करता है। इसमें शराब की आपूर्ति करने वाले, वाहन उपलब्ध कराने वाले, परिवहनकर्ता, भंडारण करने वाले और बिक्री कराने वाले लोग शामिल रहते हैं। इसलिए इस पूरे तंत्र की पहचान कर सभी संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अवैध शराब के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की निगरानी बढ़ाई जाए। सीमावर्ती क्षेत्रों और प्रमुख परिवहन मार्गों पर भी विशेष सतर्कता बरती जाए। किसी भी जिले में अवैध शराब के कारोबार की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बलिदानी टीआई दिलीप पुरी के परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता

Dewas में अवैध शराब पकड़ने के दौरान कर्तव्य निर्वहन करते हुए जान गंवाने वाले थाना प्रभारी दिलीप पुरी के परिवार के प्रति मुख्यमंत्री ने गहरी संवेदना व्यक्त की। सरकार ने उनके बलिदान को सम्मान देते हुए परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही उनकी पत्नी को उपनिरीक्षक (एसआई) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि टीआई दिलीप पुरी ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए साहस, निष्ठा और समर्पण का परिचय दिया। कानून व्यवस्था बनाए रखने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए उन्होंने अपनी जान की परवाह नहीं की। उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। सरकार इस कठिन समय में उनके परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परिवार को घोषित आर्थिक सहायता और अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। परिवार को सभी जरूरी सुविधाएं और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

घटना के बाद सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी मौके पर भेजा गया था। मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। स्पेशल डीजी उपेंद्र जैन को भी मामले में आवश्यक निर्देश दिए गए थे। वहीं उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं भी दिवंगत टीआई के पिता से बातचीत कर परिवार को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।

मुख्य सरगना राहुल जायसवाल गिरफ्तार ट्रक भी जब्त

Dewas शराब कांड की जांच में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि अवैध शराब कारोबार के मुख्य सरगना राहुल जायसवाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शराब के परिवहन में इस्तेमाल किए गए ट्रक को भी जब्त कर लिया गया है। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

जांच के दौरान वाहन चालक गजेंद्र उर्फ अप्पू रावत और वाहन उपलब्ध कराने वाले किरण सिंह चंदोड की भूमिका भी सामने आई है। इसके अलावा केरल सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस इन सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है, ताकि अवैध शराब की आपूर्ति के स्रोत, परिवहन व्यवस्था और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी मिल सके।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि शराब कहां से लाई गई थी, इसे किन स्थानों पर पहुंचाया जाना था और इस कारोबार में किन-किन लोगों की भूमिका थी। पुलिस को यह भी पता लगाना है कि इस अवैध कारोबार को संचालित करने के लिए किन संसाधनों और माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अपराधियों को संरक्षण देने या उनके साथ मिलीभगत करने वाले लोगों को भी किसी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा।

जिम्मेदार अधिकारी पर भी गिरी गाज

Dewas शराब कांड में प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की दिशा में भी सरकार ने कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिस जिले से अवैध शराब रवाना हुई थी, वहां के सहायक जिला अधिकारी अमर सिंह बघेल को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने डीजीपी और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि यह पता लगाया जाए कि अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से किस तरह संचालित हो रहा था और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिल सकी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या जिम्मेदारी से बचने का मामला सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

 संगठित अपराध के खिलाफ बनेगा मजबूत मैकेनिज्म

बैठक में केवल Dewas शराब कांड तक सीमित रहने के बजाय प्रदेश में संगठित अपराधों पर नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनाने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराधियों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए पुलिस को आधुनिक तकनीक और बेहतर सूचना तंत्र से लैस करना जरूरी है।

ड्रग्स माफिया और संगठित अपराधों के खिलाफ कार्रवाई के लिए ऐसा मैकेनिज्म तैयार किया जाएगा, जिससे अपराधियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। अवैध कारोबार से जुड़े आर्थिक लेन-देन, संपत्तियों और आपूर्ति नेटवर्क की भी जांच की जाएगी। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ उनके नेटवर्क को आर्थिक रूप से कमजोर करने के उपाय भी किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराधों की रोकथाम पर भी ध्यान दिया जाए। इसके लिए खुफिया तंत्र को मजबूत करने, जिलों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी रखने की जरूरत है।

दीपावली पर खतरनाक पटाखों से बचने की अपील

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीपावली के अवसर पर प्रदेशवासियों से सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि दीपावली खुशियों और रोशनी का पर्व है। इसे उत्साह के साथ मनाने के दौरान अपनी और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से खतरनाक और विस्फोटक पटाखों के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ऐसे पटाखों से गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं। इनके विस्फोट से लोगों को चोट लगने के साथ आंखों की रोशनी तक जा सकती है। कई बार बच्चों और आसपास मौजूद लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।

उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को खतरनाक पटाखों से दूर रखें और उन्हें सुरक्षित तरीके से दीपावली मनाने के लिए प्रेरित करें। पटाखे जलाते समय सावधानी बरतें और परिवार के साथ-साथ पड़ोसियों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहार का वास्तविक आनंद तभी है, जब खुशियों के साथ सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का भी ध्यान रखा जाए।

अपराध के खिलाफ सख्त संदेश देने की तैयारी

Dewas शराब कांड के बाद मध्यप्रदेश सरकार की कार्रवाई से स्पष्ट है कि अब अवैध शराब और संगठित अपराधों के खिलाफ व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की तैयारी है। एक ओर सरकार ने बलिदानी टीआई के परिवार को आर्थिक सहायता और नौकरी देने का निर्णय लिया है, वहीं दूसरी ओर मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी, ट्रक की जब्ती और जिम्मेदार अधिकारी को हटाने जैसे कदम उठाए गए हैं।

पांच जिलों में फैले अवैध शराब नेटवर्क की जांच और पूरे प्रदेश में एक साथ कार्रवाई की योजना के बीच सरकार का लक्ष्य अपराधियों के पूरे तंत्र को खत्म करना है। ड्रग्स माफिया के खिलाफ वर्ष 2029 तक निर्णायक कार्रवाई का लक्ष्य भी इसी रणनीति का हिस्सा है।

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