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Prarthana Hospital में 21 वर्षीय अक्षत शुक्ला की मौत पीड़ित परिवार से मिले डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल

Prarthana Hospital में 21 वर्षीय अक्षत शुक्ला की मौत पीड़ित परिवार से मिले डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल

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महफूज खान

Published On: Nov 3, 2026, 6:53 PM IST

Updated On: Nov 3, 2026, 6:53 PM IST

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रीवा: Prarthana Hospital में 21 वर्षीय अक्षत शुक्ला की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन और इलाज में शामिल डॉक्टरों पर चिकित्सकीय लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। इसी बीच मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर उनकी पीड़ा सुनी और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच तथा न्याय का भरोसा दिलाया।

डिप्टी सीएम से मुलाकात के दौरान मृतक अक्षत शुक्ला के पिता ने अपने बेटे के इलाज के दौरान अस्पताल में हुई घटनाओं की पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस तरह उनका बेटा इलाज के लिए प्रार्थना हॉस्पिटल पहुंचा था और वहां उपचार के दौरान कथित तौर पर लापरवाही बरती गई। पिता ने अस्पताल के डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इलाज में बरती गई कथित लापरवाही के कारण ही उनके बेटे की जान चली गई।

परिवार ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, इलाज में शामिल डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की पड़ताल करने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

बेटे को खोने का दर्द, पिता ने डिप्टी सीएम के सामने रखी पूरी बात

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात के दौरान अक्षत के पिता भावुक नजर आए। उन्होंने अपने बेटे की मौत से जुड़े घटनाक्रम को विस्तार से बताते हुए कहा कि परिवार ने इलाज के दौरान अस्पताल और डॉक्टरों से काफी उम्मीदें लगा रखी थीं, लेकिन उनका बेटा जिंदगी की जंग हार गया।

पिता ने डॉ. मुकेश तिवारी सहित अस्पताल के अन्य डॉक्टरों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इलाज के दौरान जरूरी सावधानी और जिम्मेदारी का पालन नहीं किया गया। परिवार का मानना है कि यदि समय रहते उचित उपचार और आवश्यक चिकित्सकीय कदम उठाए गए होते, तो शायद अक्षत की जान बचाई जा सकती थी।

पिता ने डिप्टी सीएम के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनके लिए बेटे को वापस पाना संभव नहीं है, लेकिन यह जरूरी है कि किसी दूसरे परिवार के साथ ऐसी घटना न हो। यदि इलाज में किसी स्तर पर लापरवाही हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

डिप्टी सीएम ने परिवार को दिया निष्पक्ष जांच का भरोसा

परिवार की बातें सुनने के बाद उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मामले को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया। उन्होंने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायत और उठाए गए सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। परिवार को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

डिप्टी सीएम ने परिवार की पीड़ा को समझते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि मामले की निष्पक्षता के साथ जांच और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में पहल की जाएगी। परिवार को उम्मीद है कि उप मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद मामले की जांच में तेजी आएगी और उन्हें न्याय मिल सकेगा।

इस मुलाकात के बाद परिवार की उम्मीदें प्रशासनिक और सरकारी स्तर पर होने वाली कार्रवाई से जुड़ गई हैं। परिजनों की मांग है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि इलाज से संबंधित सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जाए।

21 साल की उम्र में बुझ गया परिवार का चिराग

अक्षत शुक्ला की उम्र महज 21 वर्ष थी। यह वह उम्र होती है, जब युवा अपने भविष्य के सपने संजोता है और परिवार भी उससे कई उम्मीदें रखता है। परिवार ने भी अक्षत के लिए बेहतर भविष्य की कल्पना की थी। लेकिन उसकी असमय मौत ने इन उम्मीदों को गहरे सदमे में बदल दिया।

बेटे की मौत के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इलाज के दौरान ऐसा क्या हुआ, जिसके कारण अक्षत की जान चली गई। परिजन इस बात का जवाब चाहते हैं कि अस्पताल में उपचार की प्रक्रिया के दौरान सभी आवश्यक चिकित्सकीय मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

परिवार के लिए यह घटना केवल एक सदस्य को खोने का मामला नहीं है, बल्कि उस भरोसे के टूटने का भी सवाल है, जिसके साथ लोग गंभीर बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी में अस्पताल पहुंचते हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों को बेहतर और जिम्मेदार उपचार मिलना चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही होती है, तो उसकी जांच कर जवाबदेही तय करना जरूरी है।

डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की जांच की मांग

इस मामले में परिवार ने डॉ. मुकेश तिवारी समेत अस्पताल के अन्य संबंधित डॉक्टरों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान हुई कथित लापरवाही की वजह से अक्षत की मौत हुई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि निष्पक्ष जांच और संबंधित चिकित्सकीय तथ्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।

परिवार चाहता है कि जांच के दौरान इलाज से जुड़े सभी दस्तावेजों, चिकित्सकीय रिकॉर्ड और उपचार की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि मरीज को किस स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उपचार के दौरान कौन-कौन से कदम उठाए गए और निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं।

परिजनों के अनुसार, मामले की जांच ऐसी होनी चाहिए जिसमें किसी भी पक्ष के दबाव या प्रभाव की गुंजाइश न रहे। उनका कहना है कि यदि जांच में डॉक्टरों या अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

न्याय की उम्मीद में  टिकी निगाहें

अक्षत शुक्ला की मौत के बाद परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात को परिजन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि सरकार और प्रशासन के स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और जांच के जरिए वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

परिवार की मांग है कि जांच में पारदर्शिता बरती जाए और किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को बचाने का प्रयास न हो। साथ ही, जांच की प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों की जानकारी भी परिवार को दी जाए, ताकि उन्हें यह भरोसा हो सके कि मामले में न्यायसंगत कार्रवाई की जा रही है।

Prarthana Hospital में हुई 21 वर्षीय अक्षत शुक्ला की मौत का मामला अब केवल परिवार की शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है। यह अस्पतालों में मरीजों के उपचार, चिकित्सकीय जिम्मेदारी और जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े कर रहा है। फिलहाल परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि डिप्टी सीएम द्वारा दिए गए भरोसे के अनुरूप मामले की निष्पक्ष जांच हो, सच्चाई सामने आए और यदि किसी की लापरवाही साबित होती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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