भोपाल: मध्यप्रदेश में अवैध Liquor के कारोबार और शराब तस्करी पर लगाम लगाने के लिए मोहन सरकार अब सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। देवास शराब कांड के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रदेश में शराब माफिया और तस्करी के नेटवर्क को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री निवास (सीएम हाउस) में मंगलवार को आयोजित हाईलेवल बैठक में लगभग दो घंटे तक प्रदेश की कानून-व्यवस्था की समीक्षा की गई। बैठक में अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण, पुलिस की जवाबदेही, सीमावर्ती जिलों में निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत बनाने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक समाप्त होने के बाद सरकार की रणनीति के प्रमुख बिंदु सामने आए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अवैध शराब के निर्माण, परिवहन, भंडारण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रदेशभर में प्रभावी कार्रवाई की जाए। पुलिस को इस दिशा में कार्रवाई करने के लिए खुली छूट देने का संकेत दिया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि यदि किसी क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार पकड़ा जाता है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
सरकार का मानना है कि अवैध शराब का कारोबार केवल कुछ लोगों की गतिविधि नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठित नेटवर्क काम करता है। ऐसे नेटवर्क को खत्म करने के लिए पुलिस को सक्रिय और जवाबदेह बनाना जरूरी है। बैठक में इसी दिशा में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए।
पुलिस को एक्शन के लिए खुली छूट, अफसरों की भी तय होगी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अब पुलिस को कार्रवाई के दौरान किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतने को कहा गया है। शराब तस्करी से जुड़े लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक का सबसे अहम संदेश यह रहा कि अवैध शराब का कारोबार पकड़े जाने पर केवल कारोबारियों और तस्करों पर ही कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी। यदि किसी इलाके में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार चल रहा है और स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
शराब दुकानों पर होगी नियमित चेकिंग, पुलिस की निगरानी भी बढ़ेगी
बैठक में शराब दुकानों की नियमित जांच करने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शराब दुकानों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए। दुकानों पर नियमों के पालन, शराब की आपूर्ति और बिक्री से संबंधित व्यवस्थाओं की जांच की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते पकड़ा जा सके।
शराब दुकानों की निगरानी को लेकर पुलिस और आबकारी विभाग के बीच बेहतर तालमेल बनाने की तैयारी है। अभी तक कई मामलों में विभागीय जिम्मेदारियों के कारण समन्वय की चुनौती सामने आती रही है। ऐसे में सरकार चाहती है कि पुलिस और आबकारी विभाग मिलकर अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाएं।
सीमावर्ती जिलों में विशेष अभियान, वाहनों की चेकिंग बढ़ेगी
शराब तस्करी रोकने के लिए सीमावर्ती जिलों को विशेष रूप से निगरानी के दायरे में रखने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जाए। दूसरे राज्यों से मध्यप्रदेश में अवैध शराब लाने और यहां से अन्य क्षेत्रों में भेजने वाले नेटवर्क पर नजर रखी जाए।
सरकार की रणनीति है कि तस्करों को परिवहन के दौरान ही पकड़ा जाए, ताकि अवैध शराब का बड़ा जखीरा बाजार तक पहुंचने से पहले ही जब्त किया जा सके। सीमावर्ती जिलों में विशेष अभियान के माध्यम से दूसरे राज्यों से जुड़े तस्करी नेटवर्क की भी पहचान करने का प्रयास किया जाएगा।
वाहनों की नियमित जांच के साथ पुलिस को अपने सूचना तंत्र को भी सक्रिय रखने के लिए कहा गया है। केवल नाकेबंदी और चेकिंग से तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाना संभव नहीं है। इसके लिए तस्करों के नेटवर्क, उनके संपर्कों और परिवहन के तरीकों की जानकारी जुटाना भी जरूरी होगा।
आबकारी विभाग के साथ समन्वय बनाकर काम करेगी पुलिस
बैठक में पुलिस और आबकारी विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया। अवैध शराब के कारोबार पर नियंत्रण के लिए दोनों विभागों को मिलकर काम करना होगा। पुलिस कानून-व्यवस्था और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी, जबकि आबकारी विभाग शराब के लाइसेंस, दुकानों और बिक्री से जुड़े नियमों के पालन की निगरानी करेगा।
सरकार की मंशा है कि दोनों विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान नियमित रूप से हो। किसी क्षेत्र में अवैध शराब की गतिविधि की जानकारी मिलने पर संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई करे। एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय संयुक्त अभियान चलाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
इसके साथ ही शराब दुकानों की निगरानी में पुलिस की भूमिका भी बढ़ाई जाएगी। इससे शराब कारोबार से जुड़ी अनियमितताओं और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जिला स्तर पर मजबूत होगा इंटेलिजेंस नेटवर्क
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जिला स्तर पर खुफिया तंत्र यानी इंटेलिजेंस व्यवस्था को मजबूत बनाने के निर्देश दिए हैं। सरकार चाहती है कि पुलिस को अपने क्षेत्र में होने वाली हर महत्वपूर्ण गतिविधि की जानकारी समय पर मिले। अवैध शराब, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराधों से जुड़े नेटवर्क की जानकारी जुटाने के लिए स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को सक्रिय किया जाएगा।
अधिकारियों को कहा गया है कि पुलिस तक पल-पल की खबर पहुंचनी चाहिए। इसके लिए मुखबिर तंत्र को मजबूत करने, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की व्यवस्था विकसित करनी होगी।
जिला स्तर पर पुलिस अधिकारियों को अपने क्षेत्रों की नियमित समीक्षा करनी होगी। किस इलाके में अवैध शराब का कारोबार सक्रिय है, किन मार्गों का इस्तेमाल तस्करी के लिए किया जा रहा है और किन लोगों की गतिविधियां संदिग्ध हैं, इन सभी पहलुओं पर जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी पुलिस की होगी।
पुलिस में प्रवक्ता नियुक्त करने की तैयारी
बैठक में पुलिस की संचार व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रवक्ता नियुक्त करने की तैयारी पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य पुलिस विभाग की ओर से आधिकारिक जानकारी समय पर और व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराना है।
पुलिस प्रवक्ता के माध्यम से महत्वपूर्ण घटनाओं, पुलिस कार्रवाई और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों की आधिकारिक जानकारी मीडिया तक पहुंचाई जा सकेगी। इससे सूचनाओं के आदान-प्रदान में पारदर्शिता आएगी और अलग-अलग स्तरों पर जानकारी को लेकर होने वाली असमंजस की स्थिति कम होगी।
इसके अलावा पुलिस विभाग की ओर से की गई कार्रवाई और उपलब्धियों की जानकारी भी अधिक व्यवस्थित तरीके से सामने आ सकेगी। हालांकि प्रवक्ता नियुक्त करने की व्यवस्था को लेकर आगे क्या स्वरूप तय किया जाएगा, यह संबंधित विभागीय निर्णय के बाद स्पष्ट होगा।
दो घंटे की बैठक के बाद अब कार्रवाई की बारी
सीएम हाउस में हुई लगभग दो घंटे की बैठक में मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश में अपराध और अवैध कारोबार के खिलाफ सख्ती जरूरी है। देवास शराब कांड के बाद सरकार की प्राथमिकता अवैध शराब के नेटवर्क को खत्म करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है।
बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुसार अब शराब दुकानों की जांच, सीमावर्ती जिलों में विशेष अभियान, वाहनों की चेकिंग, आबकारी विभाग के साथ समन्वय और जिला स्तर पर खुफिया तंत्र को मजबूत करने जैसे कदम उठाए जाने हैं। इसके साथ ही अवैध शराब का कारोबार मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
मुख्यमंत्री की बैठक और अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देशों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार वास्तव में जमीन पर बदलाव दिखाई देगा? प्रदेश में समय-समय पर अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाने और तस्करों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाते रहे हैं, लेकिन चुनौती यह है कि ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहे।
अक्सर देखा जाता है कि किसी बड़ी घटना के बाद प्रशासन और पुलिस अचानक सक्रिय हो जाते हैं। छापेमारी होती है, वाहनों की चेकिंग बढ़ाई जाती है और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए जाते हैं। लेकिन कुछ समय बीतने के बाद अभियान की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका बनी रहती है।











