रीवा: रीवा जिले के बहुचर्चित शुभम मिश्रा Murder में आखिरकार करीब दस साल के लंबे इंतजार के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिल गया। वर्ष 2016 में हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड में पंचम अपर सत्र न्यायाधीश संदीप श्रीवास्तव की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने तीनों दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया है। सजा सुनाए जाने के बाद दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच केंद्रीय जेल रीवा भेज दिया गया।
यह मामला वर्ष 2016 का है, जब बसंत पंचमी के अवसर पर कष्टहरनाथ मंदिर का मेला देखकर बाइक से घर लौट रहे 22 वर्षीय शुभम मिश्रा की मामूली विवाद के बाद बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। बताया गया कि एक ऑटो द्वारा बाइक में कट मारने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया और आरोपियों ने भारी पत्थर से शुभम के सिर पर वार कर दिया। गंभीर रूप से घायल शुभम की बाद में उपचार के दौरान मौत हो गई थी।
दस वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले से मृतक के परिवार को राहत मिली है। परिजनों ने अदालत के फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उनके बेटे को न्याय मिला है।
बसंत पंचमी पर कष्टहरनाथ मेला देखने गया था शुभम
अपर लोक अभियोजक सुनील शर्मा के अनुसार, मृतक शुभम मिश्रा पिता चंद्रभान मिश्रा, उम्र 22 वर्ष, ग्राम पटेहरा, थाना मनगवां, जिला रीवा का निवासी था। घटना 13 फरवरी 2016 की है। उस दिन बसंत पंचमी का पर्व था और शुभम अपने एक साथी के साथ मोटरसाइकिल से गुढ़ स्थित प्रसिद्ध कष्टहरनाथ मंदिर का मेला देखने गया था।
शुभम ने अपने साथी के साथ मेले में समय बिताया और शाम को घर लौटने के लिए निकला। शाम करीब पांच बजे दोनों मोटरसाइकिल से वापस अपने गांव की ओर जा रहे थे। इसी दौरान गुढ़ कस्बे में गैस एजेंसी के सामने एक ऐसी घटना हुई, जिसने मामूली सड़क विवाद को खूनी वारदात में बदल दिया।
बताया गया कि सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार ऑटो ने शुभम की मोटरसाइकिल में कट मार दिया। अचानक हुई इस घटना के बाद बाइक और ऑटो दोनों रुक गए। इसके बाद ऑटो में सवार युवकों और शुभम के बीच कहासुनी शुरू हो गई।
बाइक में कट मारने को लेकर शुरू हुआ विवाद
ऑटो से कट लगने के बाद दोनों पक्षों के बीच पहले बहस हुई। आरोप है कि ऑटो में सवार युवकों ने शुभम के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद बढ़ता चला गया। सड़क पर शुरू हुई कहासुनी ने कुछ ही देर में हिंसक रूप ले लिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, ऑटो सवार युवकों ने शुभम के साथ मारपीट शुरू कर दी। शुभम को संभलने का मौका भी नहीं मिला और आरोपियों ने उस पर हमला कर दिया। मामूली सड़क विवाद में शुरू हुई यह घटना इतनी गंभीर हो गई कि आरोपियों ने युवक की जान लेने तक की कोशिश की।
घटना के समय मौजूद लोगों के लिए भी यह वारदात बेहद चौंकाने वाली थी। एक सामान्य सड़क विवाद का इस तरह हत्या में बदल जाना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया था।
भारी पत्थर से सिर पर किया जानलेवा हमला
मारपीट के दौरान आरोपियों ने पास में पड़ा एक बड़ा और भारी पत्थर उठा लिया। आरोप है कि इसी पत्थर से शुभम के सिर पर जोरदार वार किया गया। हमला इतना गंभीर था कि शुभम लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़ा।
सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घायल शुभम को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
22 वर्षीय युवक की इस तरह हुई असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस बेटे के साथ परिवार ने भविष्य के सपने देखे थे, उसकी जिंदगी एक मामूली विवाद के बाद खत्म हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों और गांव के लोगों में आक्रोश फैल गया।
गुढ़ थाने में दर्ज हुआ हत्या का मामला
घटना के बाद परिजनों ने गुढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हत्या का अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस ने घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाया। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ प्रकरण तैयार कर चालान न्यायालय में पेश किया गया।
पुलिस की जांच के बाद मामला न्यायालय पहुंचा, जहां सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुई। यह मामला केवल एक हत्या की घटना नहीं था, बल्कि एक ऐसे परिवार की न्याय की लड़ाई बन गया था, जिसने अपने जवान बेटे को खो दिया था।
दस साल तक चली सुनवाई, अभियोजन ने पेश किए साक्ष्य
शुभम मिश्रा हत्याकांड की न्यायिक प्रक्रिया करीब दस वर्षों तक चली। इस दौरान अदालत में अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। अपर लोक अभियोजक सुनील शर्मा ने अभियोजन की ओर से पक्ष रखा।
अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की समीक्षा की गई। न्यायालय ने पूरी सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों का परीक्षण किया। अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को हत्या का दोषी पाया।
लंबे समय से फैसले की प्रतीक्षा कर रहे मृतक के परिजनों के लिए अदालत का निर्णय बेहद महत्वपूर्ण रहा। दस साल पहले जिस घटना ने परिवार की खुशियां छीन ली थीं, उसी मामले में अब न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया।
इन तीन आरोपियों को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा
इस हत्याकांड में अदालत ने जिन तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, उनके नाम हैं—
- दीपक उर्फ तालेंद्र चौरसिया
- राजेश उर्फ ललउना
- रिंकेश उर्फ रिंकू चौरसिया
तीनों आरोपी ग्राम महसांव, थाना गुढ़, जिला रीवा के निवासी हैं। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश संदीप श्रीवास्तव की अदालत ने तीनों को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही उन पर अर्थदंड भी लगाया गया है।
सजा सुनाए जाने के बाद तीनों दोषियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच केंद्रीय जेल रीवा भेज दिया गया।
फैसले से परिवार को मिली राहत, बोले- आखिरकार बेटे को न्याय मिला
अदालत के फैसले के बाद मृतक शुभम मिश्रा के परिवार ने राहत की सांस ली। करीब दस साल तक न्याय की प्रतीक्षा करने वाले परिजनों ने अदालत के प्रति आभार जताया। परिवार का कहना है कि बेटे की हत्या के बाद से ही वे न्याय की उम्मीद लगाए बैठे थे। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बावजूद उन्होंने न्याय की लड़ाई जारी रखी।
परिजनों के लिए यह फैसला उस दर्द की भरपाई तो नहीं कर सकता, जो उन्हें अपने बेटे को खोने के कारण मिला है, लेकिन इससे उन्हें यह संतोष जरूर मिला है कि अदालत ने मामले में दोषियों को सजा सुनाई है।
मामूली विवाद से हत्या तक पहुंची घटना ने खड़े किए थे गंभीर सवाल
शुभम मिश्रा हत्याकांड ने उस समय पूरे इलाके को झकझोर दिया था। सड़क पर वाहन को कट लगने जैसी मामूली बात ने इतना गंभीर रूप ले लिया कि एक युवक की जान चली गई। इस घटना ने गुस्से और विवाद के दौरान हिंसा पर उतर आने की प्रवृत्ति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे।
करीब दस साल बाद अदालत के फैसले ने इस मामले को निर्णायक मोड़ दिया है। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश संदीप श्रीवास्तव की अदालत द्वारा तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद पीड़ित परिवार को लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला है। परिवार के लिए यह फैसला अपने बेटे की यादों के साथ न्याय की लड़ाई पूरी होने का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।











