खोडरी पंचायत में ‘कागजी’ निकला सीईओ का नोटिस! 3 महीने पहले खुद पकड़ी थी बिना काम भुगतान की चोरी, फिर भी सरपंच-सचिव पर मेहरबान प्रशासन; किसका है संरक्षण?

मैहर/रामनगर: विंध्य अंचल के मैहर जिले के रामनगर जनपद अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत खोडरी में सरकारी राशि के बंदरबांट और विधिक नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक बेहद संगीन मामला सामने आया है। इस पूरे घोटाले की सबसे हैरान करने वाली विधिक कड़ी यह है कि खुद रामनगर जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने मौके पर जाकर भ्रष्टाचार को रंगे हाथों पकड़ा, आर्थिक वित्तीय अनियमितता की विधिक पुष्टि की और बकायदा लिखित नोटिस भी जारी किया। लेकिन विडंबना देखिए, इस विधिक नोटिस को जारी हुए पूरे तीन महीने बीत चुके हैं, पर आज दिनांक तक न तो दोषियों से एक रुपये की रिकवरी (वसूली) हुई है, न ही किसी का निलंबन (Suspension) हुआ है। प्रशासनिक शिथिलता को देखकर अब अंचल के ग्रामीणों में यह विधिक यक्ष प्रश्न तैर रहा है कि आखिर इन भ्रष्टाचारियों को किसका मूक संरक्षण प्राप्त है?

कागजों पर बन गए ‘खेत-तालाब’, रोजगार सहायक ने मां और सरपंच ने ससुर-चाचा को दिलाया सरकारी लाभ

जनपद सीईओ द्वारा जारी किए गए आधिकारिक विधिक नोटिस के अनुसार, खोडरी पंचायत में भ्रष्टाचार का पूरा ताना-बाना रिश्तेदारों को उपकृत करने के लिए बुना गया था:

  • गायब मिले तालाब: ग्रामीणों की विधिक शिकायत के बाद जब रामनगर जनपद सीईओ ने खोडरी पंचायत के चिन्हित स्थानों का भौतिक व जमीनी निरीक्षण किया, तो वहां धरातल पर कोई खेत-तालाब निर्मित ही नहीं पाया गया। जबकि सरकारी फाइलों में तालाब पूर्ण दिखाकर पूरी विधिक राशि का आहरण (भुगतान) पहले ही किया जा चुका था।
  • रिश्तेदारों की ‘लॉटरी’ लगी: विधिक जांच नोटिस में साफ तौर पर दर्ज है कि रोजगार सहायक राजेश पांडे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी सगी मां सावित्री पांडे को योजना का अवैध लाभ दिलाया। वहीं, पंचायत की महिला सरपंच ने भी विधिक आचरण संहिता को ताक पर रखकर अपने सगे ससुर सत्यनारायण पांडे, चाचा ससुर छबिलाल पांडे, प्यारेलाल पांडे और बाबा ससुर सुखीनंद पांडे के नाम पर सरकारी योजनाओं की विधिक राशि ट्रांसफर कर दी।

नाली और सामुदायिक भवन निर्माण में भी घपला; फाइलों में दबाने की विधिक साजिश!

खोडरी पंचायत में केवल खेत-तालाब ही नहीं, बल्कि अधोसंरचना विकास (Infrastructure Development) के कार्यों को भी विधिक रूप से चूना लगाया गया है:

  1. घटिया और अधूरा निर्माण: पंचायत क्षेत्र के भीतर स्वीकृत की गई नालियों और सामुदायिक भवन निर्माण कार्यों में भी बड़े पैमाने पर तकनीकी विसंगतियां और वित्तीय हेरफेर की विधिक शिकायतें जिला प्रशासन तक पहुंची हैं।
  2. नोटिस सिर्फ औपचारिकता: जब जांच में भ्रष्टाचार विधिक रूप से प्रमाणित हो चुका है, तो तीन महीने की यह लंबी देरी जिला पंचायत और जनपद पंचायत के आला अधिकारियों की विधिक कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह पैदा करती है। क्या यह सरकारी नोटिस सिर्फ ग्रामीणों के गुस्से को शांत करने के लिए एक विधिक औपचारिकता मात्र था?

मैहर कलेक्टर से वित्तीय प्रभार छीनने और FIR दर्ज कराने की मांग; ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

प्रशासनिक जवाबदेही और अंचल की जनता का आक्रोश —

“खोडरी पंचायत के पीड़ित ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस प्रशासनिक सुस्ती के खिलाफ विधिक मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जांच रिपोर्ट में नामजद रिश्तेदारों के खातों में सरकारी पैसा जाना विधिक रूप से सिद्ध हो चुका है, तो पंचायत राज अधिनियम की सुसंगत विधिक धाराओं के तहत सरपंच को पद से पृथक करने और रोजगार सहायक की सेवा समाप्ति की कार्रवाई तुरंत क्यों नहीं की गई?

स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने मैहर जिला कलेक्टर से मांग की है कि इस पूरे मामले का विधिक संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ तत्काल गबन और जालसाजी की धाराओं में पुलिस थाना रामनगर में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाए। यदि आगामी दिनों में इस भ्रष्ट सिंडिकेट के खिलाफ कोई ठोस विधिक और दंडात्मक कार्रवाई सामने नहीं आती है, तो खोडरी सहित रामनगर अंचल की जनता जनपद कार्यालय का विधिक घेराव कर उग्र आंदोलन के लिए विवश होगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।”

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