भोपाल: नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा मध्यप्रदेश अब देश के अग्रणी ‘ग्रीन एनर्जी हब’ के रूप में विधिक व तकनीकी रूप से स्थापित होने जा रहा है. राजधानी भोपाल में आयोजित एक उच्च स्तरीय विधिक व प्रशासनिक समारोह में 440 मेगावॉट (MW) क्षमता वाले ‘मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज प्रोजेक्ट’ के पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) का भव्य शुभारंभ किया गया. इस ऐतिहासिक समझौते की शुरुआत प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने विधिक रूप से साझा हस्ताक्षर कर की. दोनों ही कद्दावर नेताओं ने इस मेगा प्रोजेक्ट को सूबे की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर हरित विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी और विधिक मील का पत्थर करार दिया है.

देश के नक्शे पर चमकेगा चंबल अंचल; केंद्रीय मंत्री जोशी ने की सीएम डॉ. मोहन यादव की विधिक सराहना
समारोह के मुख्य मंच से केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा दी गई विधिक व तकनीकी जानकारियां इस प्रकार हैं:
- खुद का रिकॉर्ड तोड़ेगा MP: केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने राष्ट्रीय मंच से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रशासनिक व त्वरित विधिक कार्यप्रणाली की जमकर सराहना की. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश जिस तीव्र गति से सोलर और विंड एनर्जी के विधिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है, वह दिन दूर नहीं जब यह राज्य देश की संपूर्ण क्लीन एनर्जी (Clean Energy) की रीढ़ बनेगा.
- पारंपरिक स्रोतों से विमुक्ति: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने विधिक संबोधन में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार कोयले जैसी पारंपरिक और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली बिजली पर निर्भरता को लगातार कम कर रही है. यह प्रोजेक्ट न केवल चंबल अंचल के औद्योगिक विकास को विधिक गति देगा, बल्कि समूचे प्रदेश की भावी ऊर्जा मांग को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से पूरा करेगा.
प्रोजेक्ट की विधिक व तकनीकी खासियत: पीक आवर्स में मिलेगी बिना कटौती के निर्बाध बिजली सप्लाई
इस 440 मेगावॉट की सौर परियोजना को अन्य सोलर प्लांटों से अलग और तकनीकी रूप से बेहद उन्नत बनाने वाली कड़ियां इस प्रकार हैं:
- बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS): इस महा-परियोजना की सबसे बड़ी विधिक व वैज्ञानिक विशेषता यह है कि इसमें सौर ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण (Electricity Storage) की विशाल क्षमता विकसित की जा रही है. आम तौर पर धूप ढलने के बाद सोलर ग्रिड ठप हो जाते हैं, लेकिन यहाँ स्टोरेज तकनीक के माध्यम से दिन में संचित की गई बिजली को रात के ‘पीक आवर्स’ (जब बिजली की मांग सर्वाधिक होती है) में बिना किसी विसंगति के सप्लाई किया जा सकेगा.
- कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी: सरकार के विधिक व पर्यावरणीय आकलन के अनुसार, इस प्लांट के पूर्ण रूप से चालू होने के बाद प्रदेश के कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे वैश्विक पर्यावरण मानकों में सूबे की रैंकिंग सुधरेगी.
चंबल में आएगा बूम: निवेश के साथ सृजित होंगे हजारों स्थानीय रोजगार; उद्योगों के लिए विधिक रास्ता साफ
औद्योगिक क्रांति और अक्षय ऊर्जा का विधिक रोडमैप —
“ऊर्जा विभाग के आला विधिक अधिकारियों ने बताया कि मुरैना का यह ग्रिड-कनेक्टेड सोलर स्टोरेज प्रोजेक्ट न केवल घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली देगा, बल्कि अंचल में स्थापित हो रहे भारी उद्योगों के लिए ‘अक्षय ऊर्जा’ की विधिक व सस्ती उपलब्धता सुनिश्चित करेगा.
इस PPA के विधिक रूप से लागू होते ही परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी आएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर तकनीकी और गैर-तकनीकी संवर्गों में हजारों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के विधिक अवसर पैदा होंगे. मुख्यमंत्री ने विधिक आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार भविष्य में भी ऐसी अत्याधुनिक स्टोरेज-बेस्ड ग्रिड परियोजनाओं को पूरे प्रदेश में बढ़ावा देगी ताकि विकास की रफ्तार पर्यावरण संरक्षण के साथ विधिक सामंजस्य बनाकर चल सके.”







