मैहर में आदिवासियों का मुंह में चारा दबाकर अनूठा प्रदर्शन, पूर्व नप अध्यक्ष रामसुशील पटेल पर 39 एकड़ जमीन हड़पने का आरोप: ‘रास्ता बंद कर भूखा-प्यासा तड़पाया, जेल भेजने की दे रहे धमकी’

मैहर: मध्य प्रदेश के मैहर जिले से आदिवासी समाज के दमन और जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर एक बेहद झकझोरने वाला मामला सामने आया है। न्याय की गुहार लगाने और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए जगनगरा और पोडिआ गांव के पीड़ित आदिवासियों ने अपने मुंह में मवेशियों का चारा दबाकर एक बेहद अनूठा और मूक प्रदर्शन किया। पीड़ितों का सीधा आरोप है कि रसूख के बल पर पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष रामसुशील पटेल ने उनकी पुश्तैनी 39 एकड़ कृषि भूमि पर बलपूर्वक कब्जा कर लिया है और उनका मुख्य रास्ता बंद कर उन्हें भूख-प्यास से तड़पने के लिए मजबूर कर दिया है।

जगनगरा और पोडिआ गांव के आदिवासियों का फूटा गुस्सा; झूठे मुकदमों का आरोप

मैहर अंचल के इस जमीनी विवाद और प्रदर्शन की मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • रसूख के आगे बेबस आदिवासी: प्रदर्शन कर रहे पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इस 39 एकड़ जमीन पर खेती कर अपना जीवन यापन कर रहे थे। लेकिन पूर्व नप अध्यक्ष रामसुशील पटेल ने अपनी राजनैतिक और बाहुबल की कड़ियों का इस्तेमाल कर पूरी जमीन को अपने नियंत्रण में ले लिया है। विरोध करने पर आदिवासियों का रास्ता रोक दिया गया, जिससे उनके सामने दाने-दाने का संकट खड़ा हो गया है।
  • जेल भेजने की विधिक धमकी: आदिवासियों ने आरोप लगाया कि जब भी वे अपनी जमीन पर जाने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें ऊंचे रसूख का वास्ता देकर पुलिसिया कार्रवाई और झूठे आपराधिक मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने की विधिक धमकियां दी जाती हैं। इसी भय और प्रशासनिक उदासीनता के कारण उन्हें यह अनूठा प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा।

कलेक्ट्रेट विंग और मैहर पुलिस तक पहुंची गूंज; निष्पक्ष जांच की मांग

मुंह में घास और चारा दबाकर सड़क पर उतरे इन आदिवासियों की तस्वीरें सोशल मीडिया विंग पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है:

  1. अधिकारों के हनन का विलेख: पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन को एक विधिक शिकायती पत्र सौंपते हुए मांग की है कि आदिवासियों की जमीनों के संरक्षण के लिए बने कड़े कानूनों के तहत मामले की तत्काल उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। रास्ता बंद होने से उनके मवेशी भी भूख से तड़प रहे हैं।
  2. प्रशासनिक मुस्तैदी की दरकार: इस संवेदनशील मामले पर स्थानीय राजस्व अमले (पटवारी और तहसीलदार विंग) की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी 39 एकड़ भूमि पर कब्जे का विलेख आखिर किसकी शह पर तैयार हुआ।

मामला तूल पकड़ने पर जांच और विधिक कार्रवाई के निर्देश

प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी वैधानिक कदम की कड़ियाँ —

“मैहर कलेक्ट्रेट और पुलिस प्रशासन की विंग ने इस अनोखे प्रदर्शन का संज्ञान लेते हुए राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम को मौके पर जाकर सीमांकन करने के निर्देश दिए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि आदिवासियों के विधिक अधिकारों का किसी भी कीमत पर हनन नहीं होने दिया जाएगा। यदि जांच में पूर्व नप अध्यक्ष या उनके समर्थकों द्वारा बलपूर्वक रास्ता रोकने या जमीन दबाने की कड़ियाँ सच पाई जाती हैं, तो उनके खिलाफ भू-माफिया अधिनियम के तहत सख्त विधिक मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।”

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