मध्य प्रदेश में 10 साल बाद शुरू हुईं पदोन्नतियां, 1 लाख से अधिक कर्मचारियों को मिलेगा तोहफा; नए नियमों से इंजीनियरों को लगा बड़ा झटका, हाई कोर्ट में आज पक्ष रखेगी सरकार


भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी महकमों में पिछले एक दशक से थमा पदोन्नति (प्रमोशन) का दौर आखिरकार शुरू हो गया है। सूबे की मोहन यादव सरकार ने 1 जुलाई 2026 से राज्य के शासकीय सेवकों को उच्च पद का प्रभार देने की विधिक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है, जिससे 1 लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों का प्रमोट होना तय है। हालांकि, इस ऐतिहासिक प्रशासनिक मुस्तैदी के बीच प्रदेश के इंजीनियरों को तगड़ा झटका लगा है। नए प्रमोशन नियमों में तकनीकी अधिकारियों को मिलने वाली एक दशक पुरानी विशेष विधिक छूट को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।


सामान्य प्रशासन विभाग ने बदला नियम; योग्यता सह वरिष्ठता का प्रविधान खत्म

राज्य ब्यूरो भोपाल और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) से प्राप्त आधिकारिक विलेखों के अनुसार, नियमों में हुए बदलाव की मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • इंजीनियरों की विशेष छूट पर कैंची: लोक निर्माण विभाग (PWD) की पहल पर साल 2016 में पदोन्नति नियमों में एक विशेष संशोधन किया गया था। इसके तहत द्वितीय श्रेणी से प्रथम श्रेणी के पदों पर प्रमोशन के लिए ‘योग्यता सह वरिष्ठता’ को मुख्य आधार बनाया गया था, ताकि बेहतर परफॉर्मेंस करने वाले युवा इंजीनियरों को आगे आने का मौका मिले। लेकिन 2025 के नए पदोन्नति नियम में इस प्रविधान को विधिक रूप से विलोपित कर दिया गया है।
  • अब सभी संवर्गों के लिए एक समान व्यवस्था: नए गजट नोटिफिकेशन के बाद अब इंजीनियरों को भी उसी सामान्य विधिक प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिससे अन्य विभागों के द्वितीय श्रेणी अधिकारी गुजरते हैं। इस बदलाव के कारण मैदानी स्तर पर कार्यरत और जल्दी प्रमोशन की उम्मीद लगाए बैठे तकनीकी अधिकारियों में भारी निराशा है।

विवादों से बचने के लिए GAD ने दिया तर्क; हाई कोर्ट जबलपुर में आज सरकार देगी विलेख जवाब

कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए प्रशासनिक विंग द्वारा उठाए गए विधिक कदमों की कड़ियाँ निम्नलिखित हैं:

  1. न्यायालयीन मुकदमों से बचने का प्रयास: सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का तर्क है कि यदि इंजीनियरों के लिए अलग और विशेष नियम रखे जाते, तो अन्य संवर्गों के कर्मचारी इसे विधिक समानता के अधिकार का उल्लंघन बताकर कोर्ट में चुनौती दे सकते थे। 10 साल से लंबित पदोन्नति को बिना किसी विघ्न के लागू करने के लिए ही सभी पेचीदा प्रविधानों को नियम से बाहर रखा गया है।
  2. हाई कोर्ट में आज अहम सुनवाई: वर्ष 2025 के नए पदोन्नति नियमों को लेकर हाई कोर्ट जबलपुर में सोमवार (13 जुलाई 2026) को सरकार अपना विधिक पक्ष प्रस्तुत करेगी। सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक अधिकारी-कर्मचारी संस्था (सपाक्स) द्वारा नए नियमों पर रोक लगाने के लिए दायर याचिका पर महाधिवक्ता (Advocate General) प्रशांत सिंह की विंग सरकार का पक्ष रखेगी।

कर्मचारी संगठनों में उत्साह, कलेक्ट्रेट और मंत्रालयों में सूचियां तैयार

प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी वैधानिक पदोन्नति की कड़ियाँ —
“भले ही नए नियमों से तकनीकी विंग के कुछ प्रविधान हटे हों, लेकिन समग्र रूप से 10 साल का सूखा खत्म होने से सचिवालय से लेकर जिला कलेक्ट्रेट स्तर तक के कर्मचारियों में भारी उत्साह है.
सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश पर सभी विभागों की स्क्रूटनी कमेटियों ने वरिष्ठता सूचियों के विलेख तैयार कर लिए हैं। हाई कोर्ट से हरी झंडी मिलते ही राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) की विधिक बैठकें आयोजित कर आदेश जारी करना शुरू कर देगी।”


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