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सतना में विकास के दावों की खुली पोल, एम्बुलेंस नहीं पहुंची तो चारपाई बनी सहारा: पैरालिसिस पीड़ित बुजुर्ग महिला को 1.5 किमी कीचड़ में ढोकर मुख्य सड़क तक लाए ग्रामीण; वीडियो वायरल

सतना में विकास के दावों की खुली पोल, एम्बुलेंस नहीं पहुंची तो चारपाई बनी सहारा: पैरालिसिस पीड़ित बुजुर्ग महिला को 1.5 किमी कीचड़ में ढोकर मुख्य सड़क तक लाए ग्रामीण; वीडियो वायरल

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The Khabrilal

Published On: Jul 12, 2026, 2:18 PM IST

Updated On: Jul 12, 2026, 2:18 PM IST

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सतना: मध्य प्रदेश के सतना (Satna) जिले से ग्रामीण अंचलों की बदहाल स्वास्थ्य और सड़क कनेक्टिविटी को उजागर करने वाली एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। कोठी तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रामपुरा गांव में पक्की सड़क न होने के कारण एक गंभीर रूप से बीमार बुजुर्ग महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को चारपाई (खटिया) का सहारा लेना पड़ा। पैरालिसिस (लकवा) की गंभीर बीमारी से तड़पती बुजुर्ग महिला को ग्रामीण करीब डेढ़ किलोमीटर तक कीचड़ और फिसलन भरे रास्ते से चारपाई पर उठाकर मुख्य मार्ग तक लाए, जिसके बाद उन्हें चिकित्सा केंद्र ले जाया जा सका। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कलेक्ट्रेट प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के विधानसभा क्षेत्र का मामला; 20 साल से मरम्मत का इंतजार

रामपुरा गांव की इस जमीनी हकीकत और प्रशासनिक उदासीनता की मुख्य कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • एम्बुलेंस के पहिये थमे, ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा: ग्राम पंचायत गौरैया के अंतर्गत आने वाले रामपुरा गांव की निवासी प्रेमवती त्रिवेदी पैरालिसिस से पीड़ित हैं। रविवार को अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। परिजनों ने तुरंत आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा को कॉल किया, लेकिन गांव की एप्रोच रोड पर भारी कीचड़ होने के कारण चालक ने वाहन को मुख्य सड़क पर ही रोक दिया। इसके बाद गांव के युवाओं और परिजनों ने सूझबूझ दिखाई और बुजुर्ग को चारपाई पर लिटाकर पैदल ही सफर तय किया।
  • 20 साल पहले बनी थी डब्ल्यूबीएम सड़क: ग्रामीणों ने बताया कि करीब 20 वर्ष पहले लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस मार्ग पर डब्ल्यूबीएम (WBM) सड़क का निर्माण कराया था। इसके बाद से आज तक इस मार्ग की कोई सुध नहीं ली गई। रखरखाव के अभाव में गिट्टियां उखड़ गईं और अब यह पूरा डेढ़ किलोमीटर का टुकड़ा एक गहरे कच्चे और दलदली रास्ते में तब्दील हो चुका है।

100 परिवारों की आबादी बारिश में कैद; कलेक्ट्रेट और जनप्रतिधियों से कई बार की गई मांग

बारिश के मौसम में अंचल के इस हिस्से में रहने वाले नागरिकों की विवशता की कड़ियाँ लगातार गंभीर होती जा रही हैं:

  1. गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों पर संकट: रामपुरा गांव में करीब 100 से अधिक परिवार निवास करते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल मानसून के चार महीनों में पूरा गांव एक तरह से टापू बन जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं, स्कूली बच्चों और आपातकालीन मरीजों को होती है, जिन्हें मुख्य सड़क तक ले जाने में जान का जोखिम बना रहता है।
  2. हाई-प्रोफाइल क्षेत्र फिर भी उपेक्षा: ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पूरा इलाका मध्य प्रदेश शासन की नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। ग्रामीणों का विलेख आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर आदिवासियों और ग्रामीणों को आज भी बुनियादी विधिक अधिकार (सड़क और स्वास्थ्य) नसीब नहीं हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद पीडब्ल्यूडी विंग में मची खलबली, जल्द निर्माण का भरोसा

प्रशासनिक मुस्तैदी और आगामी वैधानिक निर्माण की कड़ियाँ —

“मामले का वीडियो कलेक्ट्रेट और जिला प्रशासन की विंग तक पहुंचने के बाद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने सफाई दी है. PWD के स्थानीय अमले के अनुसार, इस डेढ़ किलोमीटर की उखड़ी सड़क के नवीनीकरण और डामरीकरण का प्रस्ताव शासन स्तर पर तकनीकी स्वीकृति के लिए भेजा गया है.

फिलहाल, ग्रामीणों ने कड़े लहजे में जिला कलेक्टर से मांग की है कि जब तक पक्की सड़क की कड़ियाँ नहीं जुड़तीं, तब तक वैकल्पिक रूप से मुरुम डंप करवाकर रास्ते को चलने योग्य बनाया जाए ताकि भविष्य में किसी मरीज की जान पर न बन आए।”

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